प्र1.
पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु — (क) नद्यः किं न पिबन्ति ? (ख) वृक्षाः अस्मभ्यं किं किं यच्छन्ति ? (ग) इदं शरीरं किमर्थम् अस्ति ? (घ) दशपुत्रसमः कः भवति ? (ङ) केषां विभूतयः परोपकाराय भवन्ति ? (च) अन्यस्य छायां के कुर्वन्ति ?
उत्तर
पूर्णवाक्येन का अर्थ है — कर्ता और क्रिया दोनों लिखकर पूरा वाक्य बनाइए। सरल तरीका यह है कि प्रश्न के शब्दों को ही उत्तर में दोहरा दीजिए और प्रश्नवाचक शब्द की जगह उत्तर रख दीजिए।
| प्रश्नः | उत्तरम् (पूर्णवाक्येन) | हिन्दी अर्थः |
|---|---|---|
| (क) नद्यः किं न पिबन्ति ? | नद्यः स्वयम् एव अम्भः (जलं) न पिबन्ति । | नदियाँ स्वयं अपना जल नहीं पीतीं। |
| (ख) वृक्षाः अस्मभ्यं किं किं यच्छन्ति ? | वृक्षाः अस्मभ्यं शुद्धं वायुं, पुष्पाणि, पत्राणि, फलानि, छायां, मूलानि, वल्कलानि, काष्ठानि च यच्छन्ति । | पेड़ हमें शुद्ध वायु, फूल, पत्ते, फल, छाया, जड़ें, छाल और लकड़ी देते हैं। |
| (ग) इदं शरीरं किमर्थम् अस्ति ? | इदं शरीरं परोपकारार्थम् अस्ति । | यह शरीर परोपकार के लिए है। |
| (घ) दशपुत्रसमः कः भवति ? | दशपुत्रसमः द्रुमः (वृक्षः) भवति । | एक पेड़ दस सन्तानों के समान होता है। |
| (ङ) केषां विभूतयः परोपकाराय भवन्ति ? | सतां (सज्जनानां) विभूतयः परोपकाराय भवन्ति । | सज्जनों की सम्पत्तियाँ परोपकार के लिए होती हैं। |
| (च) अन्यस्य छायां के कुर्वन्ति ? | अन्यस्य छायां वृक्षाः कुर्वन्ति । | दूसरों के लिए छाया पेड़ करते हैं। |
प्रश्नवाचक शब्द और उत्तर की विभक्ति: ‘किं न पिबन्ति?’ → कर्म पूछा गया है, उत्तर द्वितीया में (अम्भः — नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा और द्वितीया का रूप एक-सा होता है)। ‘केषां विभूतयः?’ → सम्बन्ध पूछा है, उत्तर षष्ठी बहुवचन में (सताम् / सज्जनानाम्)। ‘किमर्थम्’ → प्रयोजन पूछा है, उत्तर चतुर्थी या ‘-अर्थम्’ रूप में (परोपकारार्थम्)।
Tip: (ख) का उत्तर पाँचवें सुभाषित से बनता है — ‘पुष्प-पत्र-फल-छाया-मूल-वल्कल-दारुभिः’। सात वस्तुएँ वहीं गिनी हैं; ‘शुद्धं वायुं’ पाठ के आरम्भिक संलाप से जोड़िए। परीक्षा में तीन-चार वस्तुएँ लिख देना भी पर्याप्त होता है।