दीपकम् अध्याय 16 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठे लिखितानि सुभाषितानि सस्वरं पठन्तु, अवगच्छन्तु, लिखन्तु स्मरन्तु च ।
उत्तर

यह करणीय (मौखिक-लेखन) कार्य है — इसका उत्तर कक्षा में करके दिखाना है। चार क्रियाएँ चार सोपान हैं: पठन्तु (लय के साथ पढ़िए) → अवगच्छन्तु (अर्थ समझिए) → लिखन्तु (लिखिए) → स्मरन्तु (कण्ठस्थ कीजिए)।

सोपानम्क्या करना हैकैसे करें
सस्वरं पठन्तुलय और स्वर के साथ पाठअनुष्टुप् छन्द के श्लोकों को ८ + ८ अक्षरों पर रुककर पढ़िए — ‘छायामन्यस्य कुर्वन्ति / तिष्ठन्ति स्वयमातपे’।
अवगच्छन्तुअर्थ समझनापहले पदच्छेद देखिए, फिर अन्वय, फिर भावार्थ — पुस्तक ने तीनों दे रखे हैं।
लिखन्तुशुद्ध लेखनविसर्ग (ः), अनुस्वार (ं) और हलन्त (्) पर विशेष ध्यान — ‘वृक्षा सत्पुरुषा इव’।
स्मरन्तुकण्ठस्थीकरणप्रतिदिन एक श्लोक — छह दिन में छहों याद हो जाएँगे।
नमूना उत्तर (कक्षा में क्या बोलें): ‘अहं षट् सुभाषितानि सस्वरं पठामि । मम प्रियं सुभाषितम् अस्ति — परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः — यतः इदं सुभाषितं कथयति यत् इदं शरीरम् अपि परोपकारार्थम् एव अस्ति ।’ (मैं छहों सुभाषित स्वर के साथ पढ़ता हूँ; मुझे सबसे प्रिय यही है, क्योंकि यह कहता है कि यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है।)
प्र2.
पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु — (क) वृक्षाः स्वयं कुत्र तिष्ठन्ति ? (ख) परोपकाराय काः वहन्ति ? (ग) दशवापीसमः कः भवति ? (घ) सत्पुरुषाः इव के सन्ति ? (ङ) अर्थिनः केभ्यः विमुखाः न यान्ति ? (च) वृक्षाः स्वयं कानि न खादन्ति ?
उत्तर

एकपदेन का अर्थ है — केवल एक शब्द में उत्तर, पूरा वाक्य नहीं। और वह एक शब्द उसी विभक्ति-वचन में होगा जिसमें प्रश्नवाचक शब्द है।

प्रश्नःउत्तरम् (एकपदेन)हिन्दीविभक्तिः / मूलश्लोकः
(क) वृक्षाः स्वयं कुत्र तिष्ठन्ति ?आतपेधूप मेंसप्तमी, एकवचन — ‘तिष्ठन्ति स्वयमातपे’
(ख) परोपकाराय काः वहन्ति ?नद्यःनदियाँप्रथमा, बहुवचन (स्त्री.) — ‘परोपकाराय वहन्ति नद्यः’
(ग) दशवापीसमः कः भवति ?ह्रदःतालाबप्रथमा, एकवचन — ‘दशवापीसमो ह्रदः’
(घ) सत्पुरुषाः इव के सन्ति ?वृक्षाःपेड़प्रथमा, बहुवचन — ‘वृक्षाः सत्पुरुषा इव’
(ङ) अर्थिनः केभ्यः विमुखाः न यान्ति ?महीरुहेभ्यः (वृक्षेभ्यः)पेड़ों सेपञ्चमी, बहुवचन — ‘धन्या महीरुहा येषां विमुखा यान्ति नार्थिनः’
(च) वृक्षाः स्वयं कानि न खादन्ति ?फलानिफलद्वितीया, बहुवचन (नपुं.) — ‘स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः’
एकपदेन उत्तर का सुनहरा नियम: प्रश्नवाचक शब्द को देखिए और उत्तर उसी रूप में दीजिए —
कुत्र (कहाँ) पूछा है → उत्तर सप्तमी में (आतपे)
कः / काः / के (कौन) पूछा है → उत्तर प्रथमा में (ह्रदः, नद्यः, वृक्षाः)
केभ्यः (किनसे) पूछा है → उत्तर पञ्चमी बहुवचन में (महीरुहेभ्यः)
कानि (किन-किन को) पूछा है → उत्तर द्वितीया बहुवचन नपुंसकलिङ्ग में (फलानि)
Tip: (ङ) में ‘वृक्षेभ्यः’ लिखना भी शुद्ध है, पर श्लोक का अपना शब्द महीरुहेभ्यः है — पाठ का शब्द लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं।
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