प्र1.
पाठे लिखितानि सुभाषितानि सस्वरं पठन्तु, अवगच्छन्तु, लिखन्तु स्मरन्तु च ।
उत्तर
यह करणीय (मौखिक-लेखन) कार्य है — इसका उत्तर कक्षा में करके दिखाना है। चार क्रियाएँ चार सोपान हैं: पठन्तु (लय के साथ पढ़िए) → अवगच्छन्तु (अर्थ समझिए) → लिखन्तु (लिखिए) → स्मरन्तु (कण्ठस्थ कीजिए)।
| सोपानम् | क्या करना है | कैसे करें |
|---|---|---|
| सस्वरं पठन्तु | लय और स्वर के साथ पाठ | अनुष्टुप् छन्द के श्लोकों को ८ + ८ अक्षरों पर रुककर पढ़िए — ‘छायामन्यस्य कुर्वन्ति / तिष्ठन्ति स्वयमातपे’। |
| अवगच्छन्तु | अर्थ समझना | पहले पदच्छेद देखिए, फिर अन्वय, फिर भावार्थ — पुस्तक ने तीनों दे रखे हैं। |
| लिखन्तु | शुद्ध लेखन | विसर्ग (ः), अनुस्वार (ं) और हलन्त (्) पर विशेष ध्यान — ‘वृक्षाः सत्पुरुषाः इव’। |
| स्मरन्तु | कण्ठस्थीकरण | प्रतिदिन एक श्लोक — छह दिन में छहों याद हो जाएँगे। |
नमूना उत्तर (कक्षा में क्या बोलें): ‘अहं षट् सुभाषितानि सस्वरं पठामि । मम प्रियं सुभाषितम् अस्ति — परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः — यतः इदं सुभाषितं कथयति यत् इदं शरीरम् अपि परोपकारार्थम् एव अस्ति ।’ (मैं छहों सुभाषित स्वर के साथ पढ़ता हूँ; मुझे सबसे प्रिय यही है, क्योंकि यह कहता है कि यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है।)