प्र1.
कोष्ठकात् समुचितं पदं चित्वा वाक्यानि रचयन्तु — (क) अहं …………… गायनं करोमि । (पादेन, नासिकया, मुखेन) (ख) अहं …………… धावनं करोमि । (पादाभ्यां, ललाटेन, कूर्परेण) (ग) अहं …………… आघ्राणं करोमि । (नखैः, नासिकया, चरणेन) (घ) अहं …………… श्रवणं करोमि । (कर्णाभ्याम्, नासिकया, अङ्गुष्ठैः) (ङ) अहं …………… भोजनं करोमि । (मुखेन, पादेन, नासिकया)
उत्तर
यह पूरा प्रश्न तृतीया विभक्ति पर है। नियम एक ही है — करणे तृतीया, यानी जिस साधन से काम हो, उसमें तृतीया विभक्ति लगती है।
| पूर्णं वाक्यम् | हिन्दी | पदस्य विवरणम् |
|---|---|---|
| (क) अहं मुखेन गायनं करोमि । | मैं मुँह से गाता हूँ। | मुख (नपुं.) — तृतीया, एकवचन (मुख एक है) |
| (ख) अहं पादाभ्यां धावनं करोमि । | मैं दोनों पैरों से दौड़ता हूँ। | पाद (पुं.) — तृतीया, द्विवचन (पैर दो हैं) |
| (ग) अहं नासिकया आघ्राणं करोमि । | मैं नाक से सूँघता हूँ। | नासिका (स्त्री.) — तृतीया, एकवचन |
| (घ) अहं कर्णाभ्यां श्रवणं करोमि । | मैं दोनों कानों से सुनता हूँ। | कर्ण (पुं.) — तृतीया, द्विवचन (कान दो हैं) |
| (ङ) अहं मुखेन भोजनं करोमि । | मैं मुँह से भोजन करता हूँ। | मुख (नपुं.) — तृतीया, एकवचन |
तृतीया विभक्ति के तीन साँचे यहीं पूरे हो जाते हैं:
• अकारान्त पुं./नपुं. — एकवचन -ेन (मुखेन, पादेन, चरणेन), द्विवचन -आभ्याम् (पादाभ्याम्, कर्णाभ्याम्), बहुवचन -ैः (नखैः, अङ्गुष्ठैः)
• आकारान्त स्त्रीलिङ्ग — एकवचन -या (नासिकया, जिह्वया)
• ध्यान दीजिए — जो अङ्ग शरीर में दो हैं उनका द्विवचन ही आएगा, ठीक वैसे ही जैसे पाठ में माधव ने कहा — ‘नयनाभ्यां पश्यामि, कर्णाभ्यां शृणोमि, पादाभ्यां चलामि’।
• अकारान्त पुं./नपुं. — एकवचन -ेन (मुखेन, पादेन, चरणेन), द्विवचन -आभ्याम् (पादाभ्याम्, कर्णाभ्याम्), बहुवचन -ैः (नखैः, अङ्गुष्ठैः)
• आकारान्त स्त्रीलिङ्ग — एकवचन -या (नासिकया, जिह्वया)
• ध्यान दीजिए — जो अङ्ग शरीर में दो हैं उनका द्विवचन ही आएगा, ठीक वैसे ही जैसे पाठ में माधव ने कहा — ‘नयनाभ्यां पश्यामि, कर्णाभ्यां शृणोमि, पादाभ्यां चलामि’।
Tip — गलत विकल्प भी पढ़ लीजिए, ये पहचान पक्की कराते हैं: ललाटेन = माथे से, कूर्परेण = कोहनी से, नखैः = नाखूनों से, अङ्गुष्ठैः = अँगूठों से, चरणेन = पैर से। ये सब रूप व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध हैं — इनमें दोष केवल यह है कि अर्थ नहीं बनता। इसलिए ऐसे प्रश्नों में पहले अर्थ देखिए, फिर रूप।