प्र1.
कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारं शरीराङ्गस्य नाम लिखन्तु — यथा – पश्यति – नयनम् । (क) शृणोति – …………… (गुल्फः, चिबुकम्, कर्णः) (ख) धावति – …………… (पादद्वयम्, हस्तद्वयम्, नयनद्वयम्) (ग) नमति – …………… (शिरः, कूर्परः, जङ्घा) (घ) सूचयति – …………… (अङ्गुली, नखः, चरणः) (ङ) लिखति – …………… (हस्तः, मणिबन्धः, कटिः)
उत्तर
यह प्रश्न ठीक पिछले प्रश्न का उलटा है — वहाँ अङ्ग देकर काम पूछा था, यहाँ काम देकर अङ्ग पूछा है।
| क्रियापदम् | उत्तरम् | हिन्दी | अन्ये विकल्पाः किमर्थम् अशुद्धाः |
|---|---|---|---|
| यथा — पश्यति | नयनम् | आँख देखती है | — |
| (क) शृणोति | कर्णः | कान सुनता है | गुल्फः = टखना, चिबुकम् = ठोड़ी — दोनों सुनते नहीं । |
| (ख) धावति | पादद्वयम् | दोनों पैर दौड़ते हैं | हाथों या आँखों से दौड़ा नहीं जाता । |
| (ग) नमति | शिरः | सिर झुकता है | कूर्परः = कोहनी, जङ्घा = पिंडली — प्रणाम सिर से होता है । |
| (घ) सूचयति | अङ्गुली | अङ्गुली इशारा करती है | नखः = नाखून, चरणः = पैर — इशारा अङ्गुली से ही होता है । |
| (ङ) लिखति | हस्तः | हाथ लिखता है | मणिबन्धः = कलाई, कटिः = कमर — लिखना हाथ का काम है । |
‘पादद्वयम्’ जैसा शब्द कैसे बनता है? द्वयम् = दो का जोड़ा। पाद + द्वयम् = पादद्वयम् (दोनों पैर), हस्त + द्वयम् = हस्तद्वयम्, नयन + द्वयम् = नयनद्वयम्, कुण्डल + द्वयम् = कुण्डलद्वयम् (प्रश्न ७ में), पादुका + द्वयम् = पादुकाद्वयम्। ऐसा समास बनने पर पूरा शब्द नपुंसकलिङ्ग एकवचन हो जाता है — इसीलिए ‘पादद्वयम्’ लिखा, ‘पादद्वयः’ नहीं।
Tip — नए अङ्ग-नाम इसी प्रश्न से मिल जाते हैं: गुल्फः (टखना), चिबुकम् (ठोड़ी), कूर्परः (कोहनी), जङ्घा (पिंडली), मणिबन्धः (कलाई), कटिः (कमर), नखः (नाखून), चरणः (पैर), अङ्गुली (अङ्गुली)। ये सब पृष्ठ 158 के चित्र में भी दिखाए गए हैं — वहीं मिलाकर याद कीजिए।