दीपकम् अध्याय 15 पञ्चदशः पाठः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
झटिति मुखं सूचयति — ‘भोः ! सर्वे शृण्वन्तु, माधवः मम कारणेन भोजनं करोति … भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः’ । — अस्य पाठभागस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

दूसरे पृष्ठ पर झगड़ा सुलझ जाता है। पहले मुख अपनी बात कहता है, फिर उदर बीच-बचाव करता है और अन्त में माधव स्वयं निर्णय सुनाता है।

संस्कृतम् (मूलः पाठः)हिन्दी अनुवादः
झटिति मुखं सूचयति — ‘भोः ! सर्वे शृण्वन्तु, माधवः मम कारणेन भोजनं करोति, भाषणं करोति, शिक्षकस्य प्रश्नस्य उत्तरं वदति ।झट से मुँह बताता है — ‘अरे! आप सब सुनिए, मेरे कारण माधव भोजन करता है, भाषण देता है और शिक्षक के प्रश्न का उत्तर देता है।
मम साहाय्येन उदरमपि भोजनं प्राप्नोति । भवन्तः सर्वे सबलाः भवन्ति । अतः अहम् एव श्रेष्ठः’ ।मेरी सहायता से पेट को भी भोजन मिलता है। (उसी से) आप सब बलवान् बनते हैं। इसलिए मैं ही श्रेष्ठ हूँ।’
उदरं सूचयति ‘भवतु, भवतु, कोलाहलं न कुर्वन्तु । वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः’ इति ।पेट कहता है — ‘ठीक है, ठीक है, शोर मत कीजिए। हम सब माधव से ही पूछ लेते हैं कि श्रेष्ठ कौन है।’
माधवः विचारयति बोधयति च — ‘मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति ।माधव विचार करता है और समझाता है — ‘मेरे शरीर के सारे अङ्ग मेरे लिए उपकार करने वाले हैं।
अहं नयनाभ्यां पश्यामि, कर्णाभ्यां शृणोमि, मुखेन भाषणं करोमि भोजनं करोमि च, उदरेण पाचनात् शक्तिं प्राप्नोमि पादाभ्यां च चलामि ।मैं दोनों आँखों से देखता हूँ, दोनों कानों से सुनता हूँ, मुँह से बोलता हूँ और भोजन करता हूँ, पेट से पाचन के द्वारा शक्ति पाता हूँ और दोनों पैरों से चलता हूँ।
अतः भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः । भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः’ ।इसलिए आप सब-के-सब श्रेष्ठ हैं। आप सब-के-सब मुझे प्रिय हैं।’
पाठ का शीर्षक यहीं खुलता है: पाठ का नाम है ‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ — माधव का प्रिय अङ्ग। पूरा पाठ पढ़ने के बाद पता चलता है कि उत्तर कोई एक अङ्ग नहीं है — ‘भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः’। शरीर एक दल (team) है; हर अङ्ग का अपना काम है और कोई भी अकेला पूरा काम नहीं कर सकता। यही बात परिवार, कक्षा और समाज पर भी लागू होती है।
Tip — माधव का उत्तर पूरा व्याकरण-पाठ है: उसके एक ही वाक्य में तृतीया विभक्ति के छह प्रयोग हैं —
नयनाभ्यां पश्यामि (द्विवचन) • कर्णाभ्यां शृणोमि (द्विवचन) • पादाभ्यां चलामि (द्विवचन)
मुखेन भाषणं करोमि (एकवचन) • उदरेण शक्तिं प्राप्नोमि (एकवचन)
जो अङ्ग शरीर में दो हैं उनका द्विवचन, और जो एक है उसका एकवचन — यही पूरे अभ्यास (प्रश्न ६) का आधार है।
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