प्र1.
‘मां विना माधवः किमपि द्रष्टुं शक्नोति किम् ?’ इति नयनं वदति । — अस्य प्रश्नस्य उत्तरं संस्कृतेन लिखन्तु । (पृष्ठ 152)
उत्तर
उत्तरम् — न, नयनाभ्यां विना माधवः किमपि द्रष्टुं न शक्नोति ।
(हिन्दी — नहीं, आँखों के बिना माधव कुछ भी नहीं देख सकता।)
पर उत्तर यहीं समाप्त नहीं होता: आँख का कहना सही है, पर अधूरा है। पाठ के अन्त में माधव यही तो समझाता है — ‘मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति’। इसलिए पूरा उत्तर यह होगा — नयनाभ्यां विना माधवः द्रष्टुं न शक्नोति, किन्तु केवलं नयनाभ्यां सर्वं कार्यम् अपि न भवति । (आँख के बिना देखना नहीं होता, पर केवल आँख से सारा काम भी नहीं होता।)
Tip — ‘विना’ के साथ कौन-सी विभक्ति? ‘विना’ के योग में द्वितीया विभक्ति आती है, इसलिए पाठ में ‘मां विना’ लिखा है (माम् = अस्मद् की द्वितीया एकवचन)। तृतीया भी शुद्ध मानी जाती है — ‘मया विना’। पर पुस्तक का प्रयोग द्वितीया वाला है।