दीपकम् अध्याय 15 गतिविधि-कार्यम् तथा परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
गतिविधि-कार्यम् — कक्षायां सर्वे छात्राः शिक्षकस्य मार्गदर्शनेन अस्य पाठस्य नाट्याभिनयं कुर्वन्तु ।
उत्तर

यह पाठ नाटक के लिए बना ही हुआ है — इसमें सात पात्र हैं और हर एक के संवाद पहले से लिखे हुए हैं। नीचे पात्रों का बँटवारा, वेशभूषा और संवाद-क्रम दिया है।

पात्रम्वेशभूषा (सरल उपाय)तस्य संवादः (पाठात्)
माधवःसाधारण वस्त्र; एक चटाई या बेंच पर सोने का अभिनय‘मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति … भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः ।’
पादःगत्ते पर बना पैर का चित्र गले में लटकाकर‘अहं श्रेष्ठः । मम कारणेन माधवः चलति ।’
हस्तःगत्ते का हाथ / बड़ा दस्ताना‘अरे अरे ! मम कारणेन माधवः लिखति, गृहकार्यं करोति, वस्तूनि आनयति च ।’
नयनम्गत्ते की बड़ी आँख का मुखौटा‘मां विना माधवः किमपि द्रष्टुं शक्नोति किम् ?’
कर्णःगत्ते का बड़ा कान‘माधवः यदा मार्गे गच्छति … तर्हि दुर्घटना भवेत् ।’ (मुस्कुराकर बोलना है)
मुखम्गत्ते का हँसता हुआ मुँह‘भोः ! सर्वे शृण्वन्तु, माधवः मम कारणेन भोजनं करोति, भाषणं करोति …’
उदरम्कमीज़ के भीतर तकिया रखकर गोल पेट‘भवतु, भवतु, कोलाहलं न कुर्वन्तु । वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः ।’
मंचन का क्रम (पाठ के अनुसार ही): (1) माधव सोता है — पृष्ठभूमि में धीमा सङ्गीत; (2) पादः, हस्तः, नयनम्, कर्णः बारी-बारी से आगे आकर अपना दावा रखते हैं; (3) मुखम् ज़ोर से (‘झटिति’) आकर अपनी बात कहता है; (4) सब एक साथ बोलने लगते हैं — कोलाहल; (5) उदरम् हाथ उठाकर सबको रोकता है; (6) माधव उठकर सबको समझाता है और सब मिलकर ताली बजाते हैं। अन्त में सब मिलकर एक वाक्य दोहराएँ — ‘सर्वाणि अङ्गानि समानरूपेण महत्त्वपूर्णानि सन्ति ।
Tip: संवाद रटने से पहले अर्थ समझ लीजिए, तभी अभिनय में भाव आएगा — जैसे कर्ण को ‘स्मितं कृत्वा’ बोलना है (मुस्कुराते हुए), मुख को ‘झटिति’ (झट से, उतावली में), और उदर को शान्त स्वर में। बड़े शब्दों पर आवाज़ ज़रा ऊँची कीजिए और ‘अहम् एव श्रेष्ठः’ पर सीने पर हाथ रखिए — दर्शकों को बात तुरन्त समझ आ जाएगी।
प्र2.
परियोजनाकार्यम् — योग्यताविस्तरभागे विद्यमानं चित्रं स्फोरकपत्रे रचयित्वा अङ्गानां नामानि लिखन्तु ।
उत्तर

पृष्ठ 158 वाला शरीर-चित्र स्फोरकपत्र (थर्मोकोल की शीट) पर बनाकर उस पर अङ्गों के नाम लिखने हैं। यह याद करने का सबसे अच्छा तरीका है — जो हाथ से बनता है, वह भूलता नहीं।

बनाने की विधि — छह चरण:
(1) लगभग दो फुट × डेढ़ फुट की थर्मोकोल शीट लीजिए; न मिले तो मोटा चार्ट-पेपर भी चलेगा।
(2) पहले पेंसिल से बालक की सीधी खड़ी आकृति बनाइए — हाथ दोनों ओर फैले हुए, ताकि हर अङ्ग अलग दिखे।
(3) आकृति में रंग भरिए और गहरे रंग से बाहरी रेखा खींचिए।
(4) चित्र के बाएँ और दाएँ खाली जगह छोड़िए — नाम वहीं लिखे जाएँगे।
(5) हर अङ्ग से बिन्दु और तीर बनाकर उसे किनारे तक लाइए और वहाँ नाम लिखिए।
(6) नाम दो रंगों में लिखिए — ऊपर संस्कृत नाम बड़े अक्षरों में, नीचे छोटे अक्षरों में हिन्दी अर्थ।

नमूना — किस ओर कौन-सा नाम लिखें (पुस्तक के चित्र के अनुसार) —

वामभागे (बाईं ओर)दक्षिणभागे (दाईं ओर)अधोभागे (नीचे)
केशाः, नेत्रम्, कर्णः, मुखम्, कण्ठः, भुजः, वक्षःस्थलम्, उदरम्, अङ्गुल्यः, कटिः, ऊरुः, जानु, पादःललाटम्, भ्रूः, नासिका, कपोलः, चिबुकम्, ग्रीवा, स्कन्धः, स्तनः, कफोणिः/कूर्परः, नाभिः, मणिबन्धः, अङ्गुष्ठः, हस्तः, जङ्घा, गुल्फः, नखाःअङ्गुल्यः, पार्ष्णिः, पादाङ्गुष्ठः
Try this — परियोजना को और अच्छा बनाने के दो सुझाव:
• हर नाम के आगे कोष्ठक में उसका काम भी लिख दीजिए — जैसे ‘कर्णः (शृणोति)’, ‘नयनम् (पश्यति)’, ‘पादः (चलति)’। इससे प्रश्न २ और ४ का अभ्यास अपने-आप हो जाएगा।
• चित्र के नीचे पाठ का सन्देश एक पंक्ति में लिख दीजिए — ‘भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः, भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः ।’ इससे परियोजना केवल चित्र नहीं, पूरा पाठ बन जाएगी।
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