प्र1.
गतिविधि-कार्यम् — कक्षायां सर्वे छात्राः शिक्षकस्य मार्गदर्शनेन अस्य पाठस्य नाट्याभिनयं कुर्वन्तु ।
उत्तर
यह पाठ नाटक के लिए बना ही हुआ है — इसमें सात पात्र हैं और हर एक के संवाद पहले से लिखे हुए हैं। नीचे पात्रों का बँटवारा, वेशभूषा और संवाद-क्रम दिया है।
| पात्रम् | वेशभूषा (सरल उपाय) | तस्य संवादः (पाठात्) |
|---|---|---|
| माधवः | साधारण वस्त्र; एक चटाई या बेंच पर सोने का अभिनय | ‘मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति … भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः ।’ |
| पादः | गत्ते पर बना पैर का चित्र गले में लटकाकर | ‘अहं श्रेष्ठः । मम कारणेन माधवः चलति ।’ |
| हस्तः | गत्ते का हाथ / बड़ा दस्ताना | ‘अरे अरे ! मम कारणेन माधवः लिखति, गृहकार्यं करोति, वस्तूनि आनयति च ।’ |
| नयनम् | गत्ते की बड़ी आँख का मुखौटा | ‘मां विना माधवः किमपि द्रष्टुं शक्नोति किम् ?’ |
| कर्णः | गत्ते का बड़ा कान | ‘माधवः यदा मार्गे गच्छति … तर्हि दुर्घटना भवेत् ।’ (मुस्कुराकर बोलना है) |
| मुखम् | गत्ते का हँसता हुआ मुँह | ‘भोः ! सर्वे शृण्वन्तु, माधवः मम कारणेन भोजनं करोति, भाषणं करोति …’ |
| उदरम् | कमीज़ के भीतर तकिया रखकर गोल पेट | ‘भवतु, भवतु, कोलाहलं न कुर्वन्तु । वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः ।’ |
मंचन का क्रम (पाठ के अनुसार ही): (1) माधव सोता है — पृष्ठभूमि में धीमा सङ्गीत; (2) पादः, हस्तः, नयनम्, कर्णः बारी-बारी से आगे आकर अपना दावा रखते हैं; (3) मुखम् ज़ोर से (‘झटिति’) आकर अपनी बात कहता है; (4) सब एक साथ बोलने लगते हैं — कोलाहल; (5) उदरम् हाथ उठाकर सबको रोकता है; (6) माधव उठकर सबको समझाता है और सब मिलकर ताली बजाते हैं। अन्त में सब मिलकर एक वाक्य दोहराएँ — ‘सर्वाणि अङ्गानि समानरूपेण महत्त्वपूर्णानि सन्ति ।’
Tip: संवाद रटने से पहले अर्थ समझ लीजिए, तभी अभिनय में भाव आएगा — जैसे कर्ण को ‘स्मितं कृत्वा’ बोलना है (मुस्कुराते हुए), मुख को ‘झटिति’ (झट से, उतावली में), और उदर को शान्त स्वर में। बड़े शब्दों पर आवाज़ ज़रा ऊँची कीजिए और ‘अहम् एव श्रेष्ठः’ पर सीने पर हाथ रखिए — दर्शकों को बात तुरन्त समझ आ जाएगी।