प्र1.
उदाहरणानुसारम् अधोलिखितानां पदानां द्वितीयाविभक्तेः रूपाणि लिखन्तु अवगच्छन्तु च — यथा : युवकः – युवकम् । भिक्षा – भिक्षाम् । नदी – नदीम् । धनम् – धनम् । (आसन्दः, पूजा, लेखनी, नगरम्, धनिकौ, कविते, जननी, पुष्पे, पादाः, नासिका, कर्तरी, पुष्पाणि, गोलदीपौ, पत्रिकाः, अङ्कन्यौ, पुस्तकानि, हस्तः, पेटिका, सम्मार्जन्यः, वनानि, अहम्, यूयम्, द्रोणी, त्वम्, युवाम्, आवाम्, भगिनी, सः)
उत्तर
तालिका के चारों स्तम्भ चार अलग-अलग वर्ग के हैं — पहला अकारान्त पुंलिङ्ग तथा सर्वनाम, दूसरा आकारान्त स्त्रीलिङ्ग, तीसरा ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग और चौथा अकारान्त नपुंसकलिङ्ग। सबके 28 उत्तर नीचे हैं।
| पदम् | द्वितीयारूपम् | वचनम् तथा वर्गः | हिन्दी |
|---|---|---|---|
| आसन्दः | आसन्दम् | एकवचनम् — अकारान्त पुं. | कुर्सी को |
| धनिकौ | धनिकौ | द्विवचनम् — अकारान्त पुं. | दो धनिकों को |
| पादाः | पादान् | बहुवचनम् — अकारान्त पुं. | पैरों को |
| गोलदीपौ | गोलदीपौ | द्विवचनम् — अकारान्त पुं. | दो गोल दीपों को |
| हस्तः | हस्तम् | एकवचनम् — अकारान्त पुं. | हाथ को |
| अहम् | माम् | एकवचनम् — सर्वनाम (अस्मद्) | मुझको |
| युवाम् | युवाम् | द्विवचनम् — सर्वनाम (युष्मद्) | तुम दोनों को |
| पूजा | पूजाम् | एकवचनम् — आकारान्त स्त्री. | पूजा को |
| कविते | कविते | द्विवचनम् — आकारान्त स्त्री. | दो कविताओं को |
| नासिका | नासिकाम् | एकवचनम् — आकारान्त स्त्री. | नाक को |
| पत्रिकाः | पत्रिकाः | बहुवचनम् — आकारान्त स्त्री. | पत्रिकाओं को |
| पेटिका | पेटिकाम् | एकवचनम् — आकारान्त स्त्री. | पेटी को |
| यूयम् | युष्मान् | बहुवचनम् — सर्वनाम (युष्मद्) | तुम सबको |
| आवाम् | आवाम् | द्विवचनम् — सर्वनाम (अस्मद्) | हम दोनों को |
| लेखनी | लेखनीम् | एकवचनम् — ईकारान्त स्त्री. | कलम को |
| जननी | जननीम् | एकवचनम् — ईकारान्त स्त्री. | माता को |
| कर्तरी | कर्तरीम् | एकवचनम् — ईकारान्त स्त्री. | कैंची को |
| अङ्कन्यौ | अङ्कन्यौ | द्विवचनम् — ईकारान्त स्त्री. | दो पेंसिलों को |
| सम्मार्जन्यः | सम्मार्जनीः | बहुवचनम् — ईकारान्त स्त्री. | झाड़ुओं को |
| द्रोणी | द्रोणीम् | एकवचनम् — ईकारान्त स्त्री. | नाव / कठौती को |
| भगिनी | भगिनीम् | एकवचनम् — ईकारान्त स्त्री. | बहन को |
| नगरम् | नगरम् | एकवचनम् — अकारान्त नपुं. | नगर को |
| पुष्पे | पुष्पे | द्विवचनम् — अकारान्त नपुं. | दो फूलों को |
| पुष्पाणि | पुष्पाणि | बहुवचनम् — अकारान्त नपुं. | फूलों को |
| पुस्तकानि | पुस्तकानि | बहुवचनम् — अकारान्त नपुं. | पुस्तकों को |
| वनानि | वनानि | बहुवचनम् — अकारान्त नपुं. | वनों को |
| त्वम् | त्वाम् | एकवचनम् — सर्वनाम (युष्मद्) | तुझको |
| सः | तम् | एकवचनम् — सर्वनाम (तद्, पुं.) | उसको |
चार पदों के रूप बदले ही नहीं — क्यों? धनिकौ, गोलदीपौ, कविते, अङ्कन्यौ, पुष्पे, पत्रिकाः, पुष्पाणि, पुस्तकानि, वनानि, नगरम्, युवाम्, आवाम् — इनमें प्रथमा और द्वितीया के रूप एक-जैसे हैं। इसके दो कारण हैं: (1) नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा और द्वितीया सदा समान होती हैं; (2) द्विवचन तथा आकारान्त स्त्रीलिङ्ग के बहुवचन में भी दोनों विभक्तियों के रूप समान रहते हैं। इसलिए इन्हें ‘नहीं बदला’ मत समझिए — ये सही द्वितीया-रूप ही हैं।
Check it yourself — दो कठिन पद:
• सम्मार्जन्यः पहले से बहुवचन (प्रथमा) है; इसका द्वितीया-बहुवचन सम्मार्जनीः होगा (नदी → नदीः के अनुसार)।
• पादाः भी बहुवचन है; अकारान्त पुंलिङ्ग होने से द्वितीया-बहुवचन पादान् बनेगा (बालकाः → बालकान्)।
• अहम् → माम् तथा यूयम् → युष्मान् — सर्वनामों के रूप मूल शब्द से बिलकुल अलग दिखते हैं, इन्हें रटना ही पड़ता है।
• सम्मार्जन्यः पहले से बहुवचन (प्रथमा) है; इसका द्वितीया-बहुवचन सम्मार्जनीः होगा (नदी → नदीः के अनुसार)।
• पादाः भी बहुवचन है; अकारान्त पुंलिङ्ग होने से द्वितीया-बहुवचन पादान् बनेगा (बालकाः → बालकान्)।
• अहम् → माम् तथा यूयम् → युष्मान् — सर्वनामों के रूप मूल शब्द से बिलकुल अलग दिखते हैं, इन्हें रटना ही पड़ता है।