प्र1.
एतानि शब्दरूपाणि पठन्तु, अवगच्छन्तु, स्मरन्तु च — (क) अकारान्त-पुंलिङ्गशब्दाः (ग्राम, भिक्षुक, बालक) (ख) आकारान्त-स्त्रीलिङ्गशब्दाः (भिक्षा, माला, बालिका, तत्) (ग) ईकारान्त-स्त्रीलिङ्गशब्दाः (नदी, लेखनी, भगिनी) (घ) अकारान्त-नपुंसकलिङ्गशब्दाः (फल, जल, गृह) (ङ) सर्वनामशब्दाः (अस्मद्, युष्मद्, तद्, एतद्) ।
उत्तर
पृष्ठ 149 की पाँचों तालिकाएँ यहाँ एक साथ हैं। सब द्वितीया विभक्ति की हैं — यही इस पाठ का व्याकरण-विषय है।
(क) अकारान्त-पुंलिङ्गशब्दाः
| विभक्तिः | शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| द्वितीया विभक्तिः | ग्राम | ग्रामम् | ग्रामौ | ग्रामान् |
| भिक्षुक | भिक्षुकम् | भिक्षुकौ | भिक्षुकान् | |
| बालक | बालकम् | बालकौ | बालकान् |
(ख) आकारान्त-स्त्रीलिङ्गशब्दाः
| विभक्तिः | शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| द्वितीया विभक्तिः | भिक्षा | भिक्षाम् | भिक्षे | भिक्षाः |
| माला | मालाम् | माले | मालाः | |
| बालिका | बालिकाम् | बालिके | बालिकाः | |
| तत् (स्त्री.) | ताम् | ते | ताः |
(ग) ईकारान्त-स्त्रीलिङ्गशब्दाः
| विभक्तिः | शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| द्वितीया विभक्तिः | नदी | नदीम् | नद्यौ | नदीः |
| लेखनी | लेखनीम् | लेखन्यौ | लेखनीः | |
| भगिनी | भगिनीम् | भगिन्यौ | भगिनीः |
(घ) अकारान्त-नपुंसकलिङ्गशब्दाः
| विभक्तिः | शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| द्वितीया विभक्तिः | फल | फलम् | फले | फलानि |
| जल | जलम् | जले | जलानि | |
| गृह | गृहम् | गृहे | गृहाणि |
(ङ) सर्वनामशब्दाः
| विभक्तिः | शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| द्वितीया विभक्तिः | अस्मद् | माम् | आवाम् | अस्मान् |
| युष्मद् | त्वाम् | युवाम् | युष्मान् | |
| तद् (पुं.) | तम् | तौ | तान् | |
| एतद् (पुं.) | एतम् | एतौ | एतान् |
पूरी तालिका एक पंक्ति में: द्वितीया विभक्ति के प्रत्यय हैं — अम् / औ / शस्, अर्थात् एकवचन में -म्, द्विवचन में -औ (नपुंसक तथा आकारान्त-स्त्रीलिङ्ग में -ए), और बहुवचन में -आन् / -आः / -ीः / -आनि। यह याद रखने की सबसे सरल कुंजी यह है कि नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा और द्वितीया के रूप सदा एक-जैसे होते हैं — फलम्/फले/फलानि दोनों विभक्तियों में वही।
Tip: ‘गृह’ का बहुवचन गृहाणि है, ‘गृहानि’ नहीं — क्योंकि ‘ऋ, र्, ष्’ के बाद ‘न्’ का ‘ण्’ हो जाता है (णत्व-विधान)। इसी नियम से ‘शरीराङ्गानि’ में ‘नि’ ही रहा (बीच में ‘ग’ के कारण), पर ‘पुष्पाणि’ में ‘णि’ हुआ।