प्र1.
अधः प्रदत्तं चित्रं दृष्ट्वा द्वितीयाविभक्तेः प्रयोगं कृत्वा दश वाक्यानि रचयन्तु — (क) … (ख) … (ग) … (घ) … (ङ) … (च) … (छ) … (ज) … (झ) … (ञ) …
उत्तर
पृष्ठ 148 का चित्र एक विद्यालय-प्राङ्गण का है। उसमें चार दृश्य हैं — (1) जालिका (नेट) के दोनों ओर बालक कन्दुक-क्रीडा कर रहे हैं, (2) पीले वस्त्र वाले योगशिक्षक के साथ तीन छात्र योगासन कर रहे हैं, (3) दो बालिकाएँ काग़ज़, कैंची और रंगों से यान (राकेट) की प्रतिकृति बना रही हैं, और (4) एक गोल घेरे में शिक्षिका दो छात्रों को सङ्गणक (कम्प्यूटर) पर सिखा रही हैं। पीछे विद्यालय-भवन, वृक्ष और पुष्पवाटिका है।
| क्रमः | वाक्यम् | द्वितीयापदम् | हिन्दी |
|---|---|---|---|
| (क) | बालकाः क्रीडाक्षेत्रे कन्दुकं क्रीडन्ति । | कन्दुकम् | बालक मैदान में गेंद खेल रहे हैं। |
| (ख) | एकः बालकः कन्दुकं ताडयति । | कन्दुकम् | एक बालक गेंद पर प्रहार करता है। |
| (ग) | योगशिक्षकः आसनं करोति । | आसनम् | योग-शिक्षक आसन कर रहे हैं। |
| (घ) | छात्राः योगासनानि अभ्यस्यन्ति । | योगासनानि | छात्र योगासनों का अभ्यास कर रहे हैं। |
| (ङ) | बालिके यानप्रतिकृतिं रचयतः । | यानप्रतिकृतिम् | दो बालिकाएँ राकेट का प्रतिरूप बना रही हैं। |
| (च) | बालिका कर्तर्या पत्रं कर्तयति । | पत्रम् | बालिका कैंची से काग़ज़ काटती है। |
| (छ) | शिक्षिका छात्रान् सङ्गणकं पाठयति । | छात्रान्, सङ्गणकम् | शिक्षिका छात्रों को कम्प्यूटर सिखाती हैं। |
| (ज) | छात्रः सङ्गणकं चालयति । | सङ्गणकम् | छात्र कम्प्यूटर चलाता है। |
| (झ) | वयं चित्रे विद्यालयस्य भवनं पश्यामः । | भवनम् | हम चित्र में विद्यालय का भवन देखते हैं। |
| (ञ) | जनाः वाटिकायां पुष्पाणि पश्यन्ति । | पुष्पाणि | लोग वाटिका में फूल देखते हैं। |
ऐसा प्रश्न कैसे हल करें — तीन चरण: (1) चित्र में जो-जो व्यक्ति दिखें, उन्हें कर्ता बनाइए (बालकः, छात्राः, शिक्षिका, बालिके); (2) हर व्यक्ति जो काम कर रहा है, उसकी क्रिया लिखिए (क्रीडति, करोति, पाठयति); (3) उस काम की वस्तु को द्वितीया विभक्ति में रखिए (कन्दुकम्, आसनम्, सङ्गणकम्)। कर्ता का वचन और क्रिया का वचन मिलाना न भूलिए — ‘बालकाः क्रीडन्ति’ (बहुवचन), ‘बालिके रचयतः’ (द्विवचन), ‘छात्रः चालयति’ (एकवचन)।
Tip: (छ) में दो-दो कर्म हैं — छात्रान् और सङ्गणकम्। ‘पाठय्’ (पढ़ाना), ‘याच्’ (माँगना), ‘नी’ (ले जाना) जैसी धातुएँ द्विकर्मक कहलाती हैं, इनके साथ दो कर्म आ सकते हैं और दोनों द्वितीया विभक्ति में रहते हैं। पाठ में भी यही रचना है — ‘धनिकः भिक्षुकात् शरीराङ्गानि याचितवान्’।