प्र1.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तराणि यच्छन्तु — (क) भिक्षुकः किं करोति स्म ? (ख) कदाचित् तेन मार्गेण कः आगच्छति ? (ग) भिक्षुकः धनिकात् किम् इच्छति ? (घ) धनिकः भिक्षुकात् किं याचितवान् ? (ङ) सौभाग्येन वयं किं प्राप्तवन्तः ?
उत्तर
‘एकपदेन’ का अर्थ है — केवल एक पद में उत्तर, पूरा वाक्य नहीं। नीचे पहले वही एक पद, फिर कोष्ठक में उसका हिन्दी अर्थ, और साथ में वह पंक्ति जिससे उत्तर निकला है।
| प्रश्नः | एकपदेन उत्तरम् | पाठस्य आधारवाक्यम् |
|---|---|---|
| (क) भिक्षुकः किं करोति स्म ? | भिक्षाटनम् (भीख माँगता फिरता था) | तथापि सः भिक्षाटनं करोति स्म । |
| (ख) कदाचित् तेन मार्गेण कः आगच्छति ? | धनिकः (एक धनी व्यक्ति) | एकदा तेन मार्गेण कश्चित् धनिकः आगच्छति । |
| (ग) भिक्षुकः धनिकात् किम् इच्छति ? | धनम् (धन — ‘प्रभूतं धनम्’) | आर्य ! अहं प्रभूतं धनम् इच्छामि । |
| (घ) धनिकः भिक्षुकात् किं याचितवान् ? | शरीराङ्गानि (शरीर के अङ्ग — पैर, हाथ आदि) | धनिकः … तस्य अनेकानि शरीराङ्गानि क्रेतुम् इष्टवान् । |
| (ङ) सौभाग्येन वयं किं प्राप्तवन्तः ? | मानवजन्म (मनुष्य-जन्म) | सौभाग्येन एव वयं मानवजन्म प्राप्तवन्तः । |
उत्तर का रूप कैसे तय करें: उत्तर उसी विभक्ति में आएगा जिसमें प्रश्न का प्रश्नवाचक शब्द है। ‘किम्’ यहाँ द्वितीया विभक्ति में है (कर्म पूछा जा रहा है), इसलिए उत्तर भी द्वितीया में — भिक्षाटनम्, धनम्, शरीराङ्गानि, मानवजन्म। परन्तु (ख) में ‘कः’ प्रथमा विभक्ति में है (कर्ता पूछा गया है), इसलिए उत्तर भी प्रथमा में — धनिकः।
Check it yourself: (घ) में सीधा-सा उत्तर ‘पादौ’ भी लिखा जा सकता है, क्योंकि धनिक ने सबसे पहले पैर ही माँगे थे। पर वह अधूरा है — उसने पैर, फिर हाथ और फिर अनेक अङ्ग माँगे। इसलिए एक पद में सबसे पूरा उत्तर शरीराङ्गानि ही है।