प्र1.
अधोलिखितानां शब्दानाम् अर्थं (संस्कृते, हिन्द्याम्, आङ्ग्लभाषायां च) लिखन्तु, मातृभाषया अपि अर्थं लिखन्तु — दृढकायः, भिक्षाटनम्, प्रभूतम्, अतीव, मह्यम्, शरीराङ्गानि, निराकृतवान्, दुर्बलम्, त्यक्त्वा, नावसीदति ।
उत्तर
पृष्ठ 144 की पूरी तालिका, और साथ में यह भी कि हर शब्द पाठ के किस वाक्य में आया है — इससे शब्द अपने-आप याद रह जाता है।
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी | English | पाठे प्रयोगः |
|---|---|---|---|---|
| दृढकायः | दृढशरीरः | दृढ शरीर वाला | A person with strong body | सः उन्नतः दृढकायः च युवकः आसीत् । |
| भिक्षाटनम् | भिक्षार्थं भ्रमणम् | भीख के लिए घूमना | Roaming for begging | सः भिक्षाटनं करोति स्म । |
| प्रभूतम् | पर्याप्तम् / अधिकम् | ढेर सारा | A lot of | अहं प्रभूतं धनम् इच्छामि । |
| अतीव | अत्यधिकम् | बहुत सारा | Excessive | अहम् अतीव दरिद्रः अस्मि । |
| मह्यम् | मम कृते | मुझे | For me | मह्यं तव हस्तौ यच्छ । |
| शरीराङ्गानि | शरीरस्य अङ्गानि | शरीर के अङ्ग | Body parts | तस्य अनेकानि शरीराङ्गानि क्रेतुम् इष्टवान् । |
| निराकृतवान् | न स्वीकृतवान् | अस्वीकार किया | Refused | किन्तु भिक्षुकः निराकृतवान् । |
| दुर्बलम् | बलहीनम् | निर्बल | Weak | त्वम् आत्मानं दुर्बलं मन्यसे ? |
| त्यक्त्वा | त्यागं कृत्वा | त्याग करके | Having left | भिक्षाटनं त्यक्त्वा परिश्रमेण धनार्जनं कृत्वा … |
| नावसीदति | दुःखितः न भवति | दुःखी नहीं होता है | Doesn’t feel sad | कृत्वा यं नावसीदति ॥ |
‘मातृभाषया अर्थं लिखन्तु’ स्तम्भ कैसे भरें: अन्तिम खाना जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है, क्योंकि हर विद्यार्थी की मातृभाषा अलग है। उदाहरण के लिए दुर्बलम् (निर्बल) — मराठी में ‘अशक्त’, गुजराती में ‘નબળું’, बंगला में ‘দুর্বল’, तमिल में ‘பலவீனம்’, तेलुगु में ‘బలహీనం’, पंजाबी में ‘ਕਮਜ਼ੋਰ’। अपनी भाषा का शब्द अपनी पुस्तक में लिखिए।
Tip — शब्द तोड़कर देखिए:
• दृढकायः = दृढ + काय (शरीर) — बहुव्रीहि समास, ‘जिसका शरीर दृढ़ है वह’।
• भिक्षाटनम् = भिक्षा + अटनम् (घूमना), ‘अट्’ धातु से ‘अटन’ बना है।
• शरीराङ्गानि = शरीर + अङ्गानि (दीर्घसन्धि — अ + अ = आ)।
• निराकृतवान् = निः + आ + कृ + क्तवतु — भूतकाल का कर्तृवाचक रूप, ‘उसने अस्वीकार किया’।
• दृढकायः = दृढ + काय (शरीर) — बहुव्रीहि समास, ‘जिसका शरीर दृढ़ है वह’।
• भिक्षाटनम् = भिक्षा + अटनम् (घूमना), ‘अट्’ धातु से ‘अटन’ बना है।
• शरीराङ्गानि = शरीर + अङ्गानि (दीर्घसन्धि — अ + अ = आ)।
• निराकृतवान् = निः + आ + कृ + क्तवतु — भूतकाल का कर्तृवाचक रूप, ‘उसने अस्वीकार किया’।