दीपकम् अध्याय 3 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
गृहजनानां मित्राणां वा साहाय्येन पञ्चदश (१५) गृहवस्तूनामानि लिङ्गविभागेन लिखन्तु ।
उत्तर

यह घर में घूमकर करने वाला काम है, इसलिए हर विद्यार्थी की सूची अलग होगी। करना यह है — घर के पन्द्रह सामानों के संस्कृत नाम पता कीजिए और उन्हें तीन लिङ्गों में बाँटकर लिखिए।

करने का ढंग —

  1. कॉपी में तीन खाने बनाइए — पुंलिङ्गम् / स्त्रीलिङ्गम् / नपुंसकलिङ्गम्
  2. घर के कमरों में घूमकर पन्द्रह चीज़ें चुनिए और उनके हिन्दी नाम लिखिए।
  3. घर के बड़ों, शिक्षक या पृष्ठ 46 की तालिका की सहायता से हर चीज़ का संस्कृत नाम ढूँढ़िए।
  4. शब्द का अन्तिम वर्ण देखकर लिङ्ग तय कीजिए — ‘ः’ → पुंलिङ्ग, ‘आ / ई’ → स्त्रीलिङ्ग, ‘म्’ → नपुंसकलिङ्ग।
  5. हर शब्द के आगे ‘एषः / एषा / एतत्’ लगाकर एक-एक वाक्य भी बनाइए — इससे जाँच अपने-आप हो जाएगी।
नमूना उत्तर (१५ गृहवस्तूनि, लिङ्गविभागेन):
पुंलिङ्गम् (5)स्त्रीलिङ्गम् (5)नपुंसकलिङ्गम् (5)
आसन्दः — कुर्सीपेटिका — सन्दूकवातायनम् — खिड़की
दीपः — दीपककुञ्चिका — चाबीद्वारम् — दरवाज़ा
घटः — घड़ाउत्पीठिका — मेज़व्यजनम् — पंखा
दर्पणः — दर्पणसम्मार्जनी — झाड़ूपात्रम् — बर्तन
तालः — तालाघटी — घड़ीवस्त्रम् — कपड़ा
वाक्य-रूप में — एषः आसन्दः। एषा पेटिका। एतत् वातायनम्।
अच्छे उत्तर में यह ज़रूर हो: (1) पन्द्रहों नाम घर की ही वस्तुओं के हों; (2) तीनों लिङ्गों में कम-से-कम चार-चार शब्द आएँ, केवल एक ही लिङ्ग के पन्द्रह नहीं; (3) हर शब्द के आगे हिन्दी अर्थ लिखा हो; (4) जो शब्द पृष्ठ 46 की तालिका से लिए हों, वे सही स्तम्भ से लिए गए हों।
आगे बढ़कर कीजिए: कागज़ की पर्चियों पर संस्कृत नाम लिखकर घर की उन वस्तुओं पर चिपका दीजिए — जैसे दरवाज़े पर ‘द्वारम्’, खिड़की पर ‘वातायनम्’। एक सप्ताह में पन्द्रहों शब्द अपने-आप याद हो जाएँगे।
प्र2.
अधः केचन व्यावहारिकाः शब्दाः सन्ति । तेषाम् अर्थं शिक्षकस्य साहाय्येन अन्विष्य लिखन्तु । (अकारान्त-पुंलिङ्गम् / अकारान्त-नपुंसकलिङ्गम् / आकारान्त-स्त्रीलिङ्गम् / ईकारान्त-स्त्रीलिङ्गम् — चतुःस्तम्भा सारणी, पृष्ठ 46)
उत्तर

पृष्ठ 46 की तालिका में चार स्तम्भ और इक्कीस-इक्कीस पंक्तियाँ हैं — कुल चौरासी रोज़मर्रा के शब्द। नीचे चारों स्तम्भ अर्थ सहित दिए गए हैं।

1. अकारान्त-पुंलिङ्गम् —

शब्दःहिन्दी अर्थशब्दःहिन्दी अर्थ
आसन्दःकुर्सीदण्डदीपःट्यूबलाइट
सुधाखण्डःचॉक, खड़ियागजःहाथी
स्यूतःथैलानागदन्तःखूँटी (दीवार की)
विद्यालयःविद्यालयरजकःधोबी
वृक्षःपेड़धीवरःमछुआरा
कटःचटाईयुवकःयुवक
तालःतालाप्रश्नःप्रश्न
दर्पणःदर्पण, शीशाशुनकःकुत्ता
दीपःदीपकआचार्यःआचार्य, गुरु
घटःघड़ाखगःपक्षी
सागरःसमुद्र

2. अकारान्त-नपुंसकलिङ्गम् —

शब्दःहिन्दी अर्थशब्दःहिन्दी अर्थ
फलम्फलद्वारम्दरवाज़ा
उपनेत्रम्चश्मावलयम्चूड़ी, कड़ा
युतकम्कमीज़उद्यानम्बग़ीचा
मन्दिरम्मन्दिरसूच्यौषधम्सुई से दी जाने वाली दवा, इंजेक्शन
भवनम्भवन, इमारतउपांशुकम्ओढ़नी, दुपट्टा
वातायनम्खिड़कीपादांशुकम्पैरों तक का वस्त्र — साड़ी / धोती
व्यजनम्पंखादिनम्दिन
भोजनम्भोजनउत्तरम्उत्तर
कदलीफलम्केलाउष्णीषम्पगड़ी, साफ़ा
पाथेयपात्रम्टिफ़िन, भोजन-पेटिकावस्त्रम्कपड़ा
नगरम्नगर, शहर

3. आकारान्त-स्त्रीलिङ्गम् —

शब्दःहिन्दी अर्थशब्दःहिन्दी अर्थ
बालिकालड़कीतूलिकाकूची, ब्रश
महिलामहिलामञ्जूषाबक्सा, पेटी
शाटिकासाड़ीछुरिकाछुरी, चाकू
पेटिकासन्दूक, पेटीगृहगोधिकाछिपकली
पादुकाचप्पल, खड़ाऊँधूमनलिकाचिमनी
उत्पीठिकामेज़दिनदर्शिकाकैलेण्डर
रोटिकारोटीखट्वाखाट, चारपाई
स्थालिकाथाली, प्लेटशाखाडाली, शाखा
कुञ्चिकाचाबीशिक्षिकाअध्यापिका
सूचिकासुईगुलिकागोली (दवा की)
पिपीलिकाचींटी

4. ईकारान्त-स्त्रीलिङ्गम् —

शब्दःहिन्दी अर्थशब्दःहिन्दी अर्थ
लेखनीकलमगृहिणीगृहस्वामिनी
अङ्कनीपेंसिलमार्जनीझाड़न, पोंछा
दूरवाणीटेलीफ़ोनसम्मार्जनीझाड़ू, बुहारी
कूपीशीशी, छोटी बोतलसखीसहेली
द्रोणीटब, बड़ा बर्तनआकाशवाणीरेडियो
नदीनदीवर्णलेखनीरंगीन पेंसिल, क्रेयॉन
घटीघड़ीजननीमाता
नर्तकीनाचने वालीनारीस्त्री
वेणीचोटीनगरीनगरी, शहर
कर्तरीकैंचीपुनःपूरणीरीफ़िल
कुमारीकन्या, अविवाहिता
तालिका को इस तरह पढ़िए: चारों स्तम्भ केवल शब्द-सूची नहीं, लिङ्ग-पहचान का अभ्यास हैं। पहला और दूसरा स्तम्भ दोनों अकारान्त हैं, फिर भी एक पुंलिङ्ग है और दूसरा नपुंसकलिङ्ग — अन्तर केवल अन्त के ‘ः’ और ‘म्’ का है। तीसरा आकारान्त और चौथा ईकारान्त — दोनों स्त्रीलिङ्ग। यही पृष्ठ 45 के योग्यताविस्तर का नियम यहाँ चौरासी उदाहरणों से सिद्ध हो रहा है।
शिक्षक से अवश्य मिलाइए: प्रश्न ही कहता है — ‘शिक्षकस्य साहाय्येन अन्विष्य लिखन्तु’। कुछ शब्द आधुनिक वस्तुओं के लिए नए गढ़े गए हैं और अलग-अलग शब्दकोशों में उनके अर्थ थोड़े भिन्न मिल सकते हैं — विशेषतः उपांशुकम्, पादांशुकम्, तूलिका, मार्जनी तथा घटी। इन पाँच का अर्थ अपने शिक्षक से पक्का कर लीजिए और कॉपी में वही लिखिए।
शब्द-रचना देखिए: सुधाखण्डः = सुधा (चूना) + खण्ड; दण्डदीपः = डंडे जैसा दीपक (ट्यूबलाइट); पाथेयपात्रम् = पाथेय (रास्ते का भोजन) + पात्र; सूच्यौषधम् = सूची (सुई) + औषध; दिनदर्शिका = दिन दिखाने वाली; पुनःपूरणी = फिर से भरने वाली। संस्कृत के हर नए शब्द में उसका अर्थ खुला रखा होता है — यही इस भाषा की सबसे बड़ी सुविधा है।
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