दीपकम् अध्याय 3 पुंलिङ्गम् (एकवचनम् / द्विवचनम् / बहुवचनम्)

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पुंलिङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 35 — सः कः ? सः शिक्षकः । सः किं करोति ? सः पाठयति । किं सः भ्रमति ? न, सः न भ्रमति । सः तु पाठयति । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु, व्याकरणं च स्पष्टीकुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
सः कः ?वह कौन है ?
सः शिक्षकः ।वह शिक्षक है।
सः किं करोति ?वह क्या कर रहा है ?
सः पाठयति ।वह पढ़ा रहा है।
किं सः भ्रमति ?क्या वह घूम रहा है ?
न, सः न भ्रमति ।नहीं, वह घूम नहीं रहा।
सः तु पाठयति ।वह तो पढ़ा रहा है।

व्याकरण-विवेचनम् (संस्कृतम्): ‘सः’ इति तद्-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमा-विभक्तेः एकवचनम्। ‘कः’ इति किम्-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमैकवचनम्। ‘पाठयति’, ‘भ्रमति’ इति लट्-लकारे प्रथम-पुरुषे एकवचनम्।

दो छोटे शब्द, पूरा अर्थ: किम् वाक्य के आरम्भ में आए तो वह ‘क्या …?’ वाला प्रश्नवाचक बन जाता है — ‘किं सः भ्रमति ?’। और क्रिया से पहले आए तो निषेध करता है — ‘सः भ्रमति’। अन्त में तु (= बल्कि, तो) सही बात पर ज़ोर देता है — ‘सः तु पाठयति’।
अन्तर पकड़िए: पठति = पढ़ता है (स्वयं), पाठयति = पढ़ाता है (दूसरे को)। ‘पाठयति’ में ‘इ’ (णिच्) प्रत्यय है जो क्रिया को ‘करवाने वाली’ बना देता है — जैसे चलति (चलता है) → चालयति (चलाता है)।
प्र2.
पुंलिङ्गम् (द्विवचनम्), पृष्ठ 35 — तौ कौ ? तौ मयूरौ । तौ किं कुरुतः ? तौ नृत्यतः । किं तौ खादतः ? न, तौ न खादतः । तौ तु नृत्यतः । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
तौ कौ ?वे दोनों कौन हैं ?
तौ मयूरौ ।वे दोनों मोर हैं।
तौ किं कुरुतः ?वे दोनों क्या कर रहे हैं ?
तौ नृत्यतः ।वे दोनों नाच रहे हैं।
किं तौ खादतः ?क्या वे दोनों खा रहे हैं ?
न, तौ न खादतः ।नहीं, वे दोनों खा नहीं रहे।
तौ तु नृत्यतः ।वे दोनों तो नाच रहे हैं।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘तौ’ = तद्-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम्; ‘कौ’ = किम्-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम्; ‘मयूरौ’ = मयूर-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम्। ‘कुरुतः, नृत्यतः, खादतः’ इति सर्वाणि लट्-लकारे प्रथम-पुरुषे द्विवचनानि

पूरा वाक्य द्विवचन में: देखिए — सर्वनाम तौ, संज्ञा मयूरौ, क्रिया नृत्यतः — तीनों द्विवचन में हैं। संस्कृत में यह मेल अनिवार्य है। हिन्दी में हम ‘वे दोनों नाच रहे हैं’ कहकर ‘दोनों’ शब्द जोड़ते हैं; संस्कृत में यह काम रूप ही कर देता है।
करोति का पूरा परिवार: करोति (एक करता है) – कुरुतः (दो करते हैं) – कुर्वन्ति (कई करते हैं)। यह ‘कृ’ धातु का रूप है और तीनों वचनों में बहुत बदलता है, इसलिए इसे अलग से याद रखिए।
प्र3.
पुंलिङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 35 — ते के ? ते बालकाः । ते किं कुर्वन्ति ? ते क्रीडन्ति । किं ते गायन्ति ? न, ते न गायन्ति । ते तु क्रीडन्ति । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
ते के ?वे (सब) कौन हैं ?
ते बालकाः ।वे लड़के हैं।
ते किं कुर्वन्ति ?वे क्या कर रहे हैं ?
ते क्रीडन्ति ।वे खेल रहे हैं।
किं ते गायन्ति ?क्या वे गा रहे हैं ?
न, ते न गायन्ति ।नहीं, वे गा नहीं रहे।
ते तु क्रीडन्ति ।वे तो खेल रहे हैं।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘ते’ = तद्-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘के’ = किम्-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘बालकाः’ = प्रथमा-बहुवचनम्। ‘कुर्वन्ति, क्रीडन्ति, गायन्ति’ — लट्-लकारे प्रथम-पुरुषे बहुवचनानि।

चित्र से मिलाइए: पृष्ठ 35 के चित्र में चार लड़के गेंद से खेल रहे हैं — इसीलिए यहाँ बहुवचन है। यदि चित्र में केवल दो होते तो वाक्य होता — ‘तौ बालकौ। तौ क्रीडतः।’ चित्र गिनकर वचन तय करना ही इस पूरे पाठ का अभ्यास है।
तीनों संवादों का एक साँचा: (1) परिचय-प्रश्न — कः / कौ / के ? (2) उत्तर — सः शिक्षकः। (3) क्रिया-प्रश्न — किं करोति / कुरुतः / कुर्वन्ति ? (4) क्रिया-उत्तर। (5) जाँच-प्रश्न — किं सः … ? (6) निषेध — न, सः न …। (7) सुधार — सः तु …। यही साँचा पूरे पाठ में छह बार दोहराया गया है।
प्र4.
पुंलिङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 36 — एषः कः ? एषः शिक्षकः । शिक्षकः किं करोति ? शिक्षकः लिखति । किम् एषः पठति ? न, एषः न पठति । एषः लिखति । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
एषः कः ?यह कौन है ?
एषः शिक्षकः ।यह शिक्षक है।
शिक्षकः किं करोति ?शिक्षक क्या कर रहा है ?
शिक्षकः लिखति ।शिक्षक लिख रहा है।
किम् एषः पठति ?क्या यह पढ़ रहा है ?
न, एषः न पठति । एषः लिखति ।नहीं, यह पढ़ नहीं रहा। यह लिख रहा है।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘एषः’ = एतद्-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमा-एकवचनम् (समीपस्थार्थे)। ‘शिक्षकः’ प्रथमा-एकवचनम्। ‘लिखति, पठति’ लट्-लकारे प्रथम-पुरुषे एकवचनम्।

‘सः’ और ‘एषः’ का फ़र्क़: पृष्ठ 35 के चित्र में शिक्षक कक्षा में दूर खड़ा है, इसलिए वहाँ सः (वह) है। पृष्ठ 36 में दो व्यक्ति शिक्षक की ओर पास से इशारा कर रहे हैं, इसलिए यहाँ एषः (यह) है। संस्कृत में दूरी ही तय करती है कि तद् लगेगा या एतद्।
‘किम्’ का सन्धि-रूप: ‘किम् एषः’ में ‘म्’ ज्यों का त्यों रहा, क्योंकि आगे स्वर (ए) है। पर ‘किं सः’, ‘किं तौ’, ‘किं करोति’ में आगे व्यञ्जन है, इसलिए ‘म्’ बदलकर अनुस्वार (ं) हो गया। यही पिछले पाठ का मोऽनुस्वारः नियम है।
प्र5.
पुंलिङ्गम् (द्विवचनम्), पृष्ठ 36 — एतौ कौ ? एतौ बालकौ । बालकौ किं कुरुतः ? बालकौ पठतः । किम् एतौ लिखतः ? न, एतौ न लिखतः । एतौ तु पठतः । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
एतौ कौ ?ये दोनों कौन हैं ?
एतौ बालकौ ।ये दोनों लड़के हैं।
बालकौ किं कुरुतः ?दोनों लड़के क्या कर रहे हैं ?
बालकौ पठतः ।दोनों लड़के पढ़ रहे हैं।
किम् एतौ लिखतः ?क्या ये दोनों लिख रहे हैं ?
न, एतौ न लिखतः । एतौ तु पठतः ।नहीं, ये दोनों लिख नहीं रहे। ये दोनों तो पढ़ रहे हैं।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘एतौ’ = एतद्-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम्; ‘बालकौ’ = प्रथमा-द्विवचनम्; ‘कुरुतः, पठतः, लिखतः’ = लट्-लकारे प्रथम-पुरुषे द्विवचनानि।

सर्वनाम की जगह संज्ञा: बीच में ‘एतौ किं कुरुतः ?’ न कहकर पुस्तक ने ‘बालकौ किं कुरुतः ?’ कहा है। संस्कृत में जब बात साफ़ हो चुकी हो, तब सर्वनाम की जगह संज्ञा भी रखी जा सकती है — अर्थ वही रहता है, पर वाक्य और स्पष्ट हो जाता है।
द्विवचन के तीन चिह्न याद रखिए: संज्ञा में –औ (बालकौ), सर्वनाम में तौ / एतौ / कौ, और क्रिया में –तः (पठतः)। तीनों एक साथ आएँ, तभी वाक्य शुद्ध है।
प्र6.
पुंलिङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 36 — एते के ? एते बालकाः । बालकाः किं कुर्वन्ति ? बालकाः पिबन्ति । किम् एते जलं पिबन्ति ? आम्, एते जलं पिबन्ति । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
एते के ?ये (सब) कौन हैं ?
एते बालकाः ।ये लड़के हैं।
बालकाः किं कुर्वन्ति ?लड़के क्या कर रहे हैं ?
बालकाः पिबन्ति ।लड़के पी रहे हैं।
किम् एते जलं पिबन्ति ?क्या ये पानी पी रहे हैं ?
आम्, एते जलं पिबन्ति ।हाँ, ये पानी पी रहे हैं।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘एते’ = एतद्-शब्दस्य पुंलिङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘बालकाः’ = प्रथमा-बहुवचनम्; ‘जलम्’ इति कर्म, अतः द्वितीया-विभक्तेः एकवचनम् — ‘जलम्’ → व्यञ्जनात् पूर्वं ‘जलं’। ‘पिबन्ति, कुर्वन्ति’ बहुवचनानि।

यह संवाद बाक़ी पाँच से अलग क्यों है: यहाँ उत्तर ‘न’ से नहीं, ‘आम्’ (हाँ) से शुरू होता है — क्योंकि प्रश्न सही था। यानी पुस्तक दिखा रही है कि प्रश्न का उत्तर हाँ में भी हो सकता है। आम् = हाँ, न = नहीं, तु = बल्कि।
यहाँ पहली बार कर्म आया है: बाक़ी संवादों में केवल कर्ता और क्रिया थी। यहाँ ‘जलं’ जुड़ा है — जो पिया जा रहा है, यानी कर्म। कर्म में द्वितीया विभक्ति लगती है, जो आगे की कक्षाओं में विस्तार से पढ़ी जाएगी। अभी इतना काफ़ी है — जलम् (यह है) → जलं पिबति (इसे पीता है)।
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