प्र1.
सर्वनाम-प्रयोगः (चित्र-तालिका, पृष्ठ 34) — सः शुकः, एषः बालकः, सा शिक्षिका, एषा बालिका, तत् फलम्, एतत् फलम् — एतेषां त्रीणि वचनानि लिखन्तु, ‘तद्’ ‘एतद्’ इत्यनयोः भेदं च वदन्तु ।
उत्तर
उत्तरम् (संस्कृतम्): तद्-शब्दः दूरस्थ-वस्तूनाम् कृते, एतद्-शब्दः तु समीपस्थ-वस्तूनाम् कृते प्रयुज्यते। (हिन्दी: ‘तद्’ यानी ‘वह’ — दूर की वस्तु के लिए; ‘एतद्’ यानी ‘यह’ — पास की वस्तु के लिए।)
| लिङ्गम् | सर्वनाम | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| पुंलिङ्गम् | तद् (वह) | सः शुकः | तौ शुकौ | ते शुकाः |
| एतद् (यह) | एषः बालकः | एतौ बालकौ | एते बालकाः | |
| स्त्रीलिङ्गम् | तद् (वह) | सा शिक्षिका | ते शिक्षिके | ताः शिक्षिकाः |
| एतद् (यह) | एषा बालिका | एते बालिके | एताः बालिकाः | |
| नपुंसकलिङ्गम् | तद् (वह) | तत् फलम् | ते फले | तानि फलानि |
| एतद् (यह) | एतत् फलम् | एते फले | एतानि फलानि |
सर्वनाम कर्ता के साथ मिलकर चलता है: जिस लिङ्ग और वचन में संज्ञा है, ठीक उसी लिङ्ग-वचन में सर्वनाम आएगा। ‘शुकौ’ द्विवचन-पुंलिङ्ग है, इसलिए उसके साथ तौ; ‘फलानि’ बहुवचन-नपुंसकलिङ्ग है, इसलिए उसके साथ तानि। इसे विशेषण-विशेष्य-भावः कहते हैं।
एक चेतावनी — ‘ते’ तीन बार आता है: ते पुंलिङ्ग-बहुवचन भी है (ते बालकाः), स्त्रीलिङ्ग-द्विवचन भी (ते शिक्षिके) और नपुंसकलिङ्ग-द्विवचन भी (ते फले)। किस अर्थ में है, यह आगे आई संज्ञा से ही तय होगा। इसी तरह ‘एते’ पुंलिङ्ग-बहुवचन, स्त्रीलिङ्ग-द्विवचन और नपुंसकलिङ्ग-द्विवचन — तीनों हो सकता है।