दीपकम् अध्याय 3 स्त्रीलिङ्गम् (एकवचनम् / द्विवचनम् / बहुवचनम्)

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
स्त्रीलिङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 37 — सा का ? सा वृद्धा । सा किं करोति ? सा विहरति । किं सा क्रीडति ? न, सा न क्रीडति । सा तु विहरति । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
सा का ?वह कौन है ?
सा वृद्धा ।वह बुज़ुर्ग महिला है।
सा किं करोति ?वह क्या कर रही है ?
सा विहरति ।वह टहल रही है।
किं सा क्रीडति ?क्या वह खेल रही है ?
न, सा न क्रीडति ।नहीं, वह खेल नहीं रही।
सा तु विहरति ।वह तो टहल रही है।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘सा’ = तद्-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-एकवचनम्; ‘का’ = किम्-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-एकवचनम्; ‘वृद्धा’ = आकारान्त-स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-एकवचनम्।

क्रिया लिङ्ग से नहीं बदलती: ध्यान दीजिए — ‘सः पाठयति’ और ‘सा विहरति’ — दोनों में क्रिया का रूप एक-सा (–ति) है। संस्कृत की क्रिया वचन से बदलती है, लिङ्ग से नहीं। हिन्दी में उल्टा है — ‘वह पढ़ाता है’ / ‘वह पढ़ाती है’। यह अन्तर पक्का कर लीजिए।
शब्दार्थ: वृद्धा = बुज़ुर्ग स्त्री (पुंलिङ्ग रूप ‘वृद्धः’)। विहरति = टहलता/टहलती है, सैर करता/करती है (वि + हृ)। भ्रमति भी ‘घूमना’ है, पर उसमें इधर-उधर घूमने का भाव है, जबकि ‘विहरति’ में आराम से सैर करने का।
प्र2.
स्त्रीलिङ्गम् (द्विवचनम्), पृष्ठ 37 — ते के ? ते अजे । ते किं कुरुतः ? ते चरतः । किं ते पिबतः ? न, ते न पिबतः । ते तु चरतः । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
ते के ?वे दोनों कौन हैं ?
ते अजे ।वे दोनों बकरियाँ हैं।
ते किं कुरुतः ?वे दोनों क्या कर रही हैं ?
ते चरतः ।वे दोनों चर रही हैं।
किं ते पिबतः ?क्या वे दोनों पी रही हैं ?
न, ते न पिबतः ।नहीं, वे दोनों पी नहीं रहीं।
ते तु चरतः ।वे दोनों तो चर रही हैं।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘ते’ = तद्-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम्; ‘के’ = किम्-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम्; ‘अजे’ = अजा-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम्; ‘चरतः, पिबतः, कुरुतः’ = द्विवचनानि।

यहाँ ‘ते’ का अर्थ ‘वे दोनों’ है: पृष्ठ 35 में ‘ते बालकाः’ में ‘ते’ बहुवचन था, पर यहाँ ‘ते अजे’ में वही ‘ते’ स्त्रीलिङ्ग द्विवचन है। पहचान का सूत्र सरल है — आगे की संज्ञा देखिए। ‘बालकाः’ बहुवचन है, ‘अजे’ द्विवचन। और क्रिया भी बता देती है — ‘क्रीडन्ति’ बहुवचन, ‘चरतः’ द्विवचन।
शब्दार्थ: अजा = बकरी (संस्कृत में ‘छागी’ भी); चरति = चरता/चरती है, घास खाता है। ‘गौः चरति’, ‘अजाः चरन्ति’ — पशुओं के लिए यही क्रिया चलती है।
प्र3.
स्त्रीलिङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 37 — ताः काः ? ताः महिलाः । ताः किं कुर्वन्ति ? ताः धावन्ति । किं ताः गायन्ति ? न, ताः न गायन्ति । ताः तु धावन्ति । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
ताः काः ?वे (सब) कौन हैं ?
ताः महिलाः ।वे महिलाएँ हैं।
ताः किं कुर्वन्ति ?वे क्या कर रही हैं ?
ताः धावन्ति ।वे दौड़ रही हैं।
किं ताः गायन्ति ?क्या वे गा रही हैं ?
न, ताः न गायन्ति ।नहीं, वे गा नहीं रहीं।
ताः तु धावन्ति ।वे तो दौड़ रही हैं।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘ताः’ = तद्-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘काः’ = किम्-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘महिलाः’ = महिला-शब्दस्य प्रथमा-बहुवचनम्।

‘ताः’ और ‘काः’ में विसर्ग: स्त्रीलिङ्ग-बहुवचन की पहचान ही ‘आः’ है — ताः, काः, महिलाः, बालिकाः, अजाः, शिक्षिकाः। दूसरी ओर पुंलिङ्ग-बहुवचन में सर्वनाम ‘ते / के’ बिना विसर्ग के आते हैं, यद्यपि संज्ञा में विसर्ग रहता है (बालकाः)।
शब्दार्थ: धावति = दौड़ता/दौड़ती है; गायति = गाता/गाती है। दोनों के तीनों वचन — धावति / धावतः / धावन्ति; गायति / गायतः / गायन्ति।
प्र4.
स्त्रीलिङ्गम् (एकवचनम्), पृष्ठ 38 — एषा का ? एषा लता । एषा किं करोति ? एषा खादति । किम् एषा पठति ? न, एषा न पठति । एषा तु खादति । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
एषा का ?यह कौन है ?
एषा लता ।यह लता है। (‘लता’ यहाँ लड़की का नाम है)
एषा किं करोति ?यह क्या कर रही है ?
एषा खादति ।यह खा रही है।
किम् एषा पठति ?क्या यह पढ़ रही है ?
न, एषा न पठति । एषा तु खादति ।नहीं, यह पढ़ नहीं रही। यह तो खा रही है।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘एषा’ = एतद्-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-एकवचनम्; ‘लता’ = आकारान्त-स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-एकवचनम्।

‘लता’ के दो अर्थ: पृष्ठ 41 की शब्दार्थ-तालिका में लता = वल्ली = बेल (Creeper) दिया है। पर पृष्ठ 38 के चित्र में एक बालिका मेज़ पर बैठकर खा रही है — इसलिए यहाँ ‘लता’ उस बालिका का नाम है। संस्कृत में बेलों-फूलों के नाम पर लड़कियों के नाम रखने की पुरानी परम्परा है — लता, मालती, कमला, पद्मा।
‘एषा’ बनाम ‘सा’: पास की स्त्री-वस्तु के लिए एषा (यह), दूर की के लिए सा (वह)। इसी तरह पुंलिङ्ग में एषः / सः और नपुंसकलिङ्ग में एतत् / तत्।
प्र5.
स्त्रीलिङ्गम् (द्विवचनम्), पृष्ठ 38 — एते के ? एते बालिके । एते किं कुरुतः ? एते भ्रमतः । किम् एते धावतः ? न, एते न धावतः । एते तु भ्रमतः । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
एते के ?ये दोनों कौन हैं ?
एते बालिके ।ये दोनों लड़कियाँ हैं।
एते किं कुरुतः ?ये दोनों क्या कर रही हैं ?
एते भ्रमतः ।ये दोनों घूम रही हैं।
किम् एते धावतः ?क्या ये दोनों दौड़ रही हैं ?
न, एते न धावतः । एते तु भ्रमतः ।नहीं, ये दोनों दौड़ नहीं रहीं। ये दोनों तो घूम रही हैं।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘एते’ = एतद्-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम्; ‘बालिके’ = बालिका-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम्; ‘भ्रमतः, धावतः, कुरुतः’ = द्विवचनानि।

‘बालिके’ को ‘बालिका’ मत पढ़िए: आकारान्त स्त्रीलिङ्ग में द्विवचन का चिह्न ‘ए’ है — बालिका → बालिके, अजा → अजे, वैद्या → वैद्ये, शिक्षिका → शिक्षिके। यह वही ‘ए’ है जो नपुंसकलिङ्ग के द्विवचन में भी आता है (फलम् → फले)।
चित्र से जाँचिए: पृष्ठ 38 के चित्र में दो लड़कियाँ बाग़ में घूम रही हैं — इसीलिए तीनों (एते, बालिके, भ्रमतः) द्विवचन में हैं।
प्र6.
स्त्रीलिङ्गम् (बहुवचनम्), पृष्ठ 38 — एताः काः ? एताः अजाः । एताः किं कुर्वन्ति ? एताः चरन्ति । किम् एताः धावन्ति ? न, एताः न धावन्ति । एताः तु चरन्ति । — अस्य संवादस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

हिन्दी अनुवाद —

संस्कृतम्हिन्दी
एताः काः ?ये (सब) कौन हैं ?
एताः अजाः ।ये बकरियाँ हैं।
एताः किं कुर्वन्ति ?ये क्या कर रही हैं ?
एताः चरन्ति ।ये चर रही हैं।
किम् एताः धावन्ति ?क्या ये दौड़ रही हैं ?
न, एताः न धावन्ति । एताः तु चरन्ति ।नहीं, ये दौड़ नहीं रहीं। ये तो चर रही हैं।

व्याकरण-विवेचनम्: ‘एताः’ = एतद्-शब्दस्य स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-बहुवचनम्; ‘अजाः’ = अजा-शब्दस्य प्रथमा-बहुवचनम्; ‘चरन्ति, धावन्ति, कुर्वन्ति’ = बहुवचनानि।

‘अजे’ और ‘अजाः’ — दो चित्र, दो वचन: पृष्ठ 37 में दो बकरियाँ थीं, इसलिए ‘ते अजे। ते चरतः।’ पृष्ठ 38 में पाँच बकरियाँ हैं, इसलिए ‘एताः अजाः। एताः चरन्ति।’ एक ही दृश्य, केवल गिनती बदलने से पूरा वाक्य बदल गया — यही संस्कृत के वचन की ताक़त है।
स्त्रीलिङ्ग के छह संवादों का सार: सा / ते / ताः (दूर) और एषा / एते / एताः (पास) — तथा प्रश्न में का / के / काः। संज्ञा में –आ / –ए / –आः और क्रिया में –ति / –तः / –अन्ति।
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