प्र1.
पुंलिङ्गम् — एकवचनम् / द्विवचनम् / बहुवचनम् (चित्र-तालिका, पृष्ठ 31) — बालकः, वृक्षः, गजः — एतेषां त्रीणि वचनानि लिखन्तु ।
उत्तर
उत्तरम् (संस्कृतम्): एकस्मिन् एकवचनम्, द्वयोः द्विवचनम्, त्रिषु अधिकेषु वा बहुवचनम् भवति। (हिन्दी: एक के लिए एकवचन, ठीक दो के लिए द्विवचन, और तीन या तीन से अधिक के लिए बहुवचन।)
पृष्ठ 31 की चित्र-तालिका इस प्रकार पढ़ी जाएगी —
| चित्रम् | एकवचनम् (1) | द्विवचनम् (2) | बहुवचनम् (3+) |
|---|---|---|---|
| लड़का | बालकः | बालकौ | बालकाः |
| पेड़ | वृक्षः | वृक्षौ | वृक्षाः |
| हाथी | गजः | गजौ | गजाः |
तीनों शब्द अकारान्त पुंलिङ्ग हैं, इसलिए तीनों का साँचा एक ही है —
प्रातिपदिकम् + ः = एकवचनम् → बालक + ः = बालकः
प्रातिपदिकम् + औ = द्विवचनम् → बालक + औ = बालकौ
प्रातिपदिकम् + आः = बहुवचनम् → बालक + आः = बालकाः
प्रातिपदिकम् + औ = द्विवचनम् → बालक + औ = बालकौ
प्रातिपदिकम् + आः = बहुवचनम् → बालक + आः = बालकाः
द्विवचन क्यों ज़रूरी है: हिन्दी और अंग्रेज़ी में केवल दो वचन हैं — एक और अनेक। संस्कृत में ठीक दो के लिए अलग रूप है। इसीलिए दो पेड़ों को ‘वृक्षाः’ नहीं, वृक्षौ कहा जाएगा। चित्र गिनकर देखिए — दूसरे खाने में हर चित्र में दो ही आकृतियाँ हैं।
अपने आप कीजिए: इसी साँचे पर और शब्द बनाइए — छात्रः / छात्रौ / छात्राः, अश्वः / अश्वौ / अश्वाः, सिंहः / सिंहौ / सिंहाः, मयूरः / मयूरौ / मयूराः।