दीपकम् अध्याय 3 पुंलिङ्गम् – स्त्रीलिङ्गम् – नपुंसकलिङ्गम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पुंलिङ्गम् — एकवचनम् / द्विवचनम् / बहुवचनम् (चित्र-तालिका, पृष्ठ 31) — बालकः, वृक्षः, गजः — एतेषां त्रीणि वचनानि लिखन्तु ।
उत्तर

उत्तरम् (संस्कृतम्): एकस्मिन् एकवचनम्, द्वयोः द्विवचनम्, त्रिषु अधिकेषु वा बहुवचनम् भवति। (हिन्दी: एक के लिए एकवचन, ठीक दो के लिए द्विवचन, और तीन या तीन से अधिक के लिए बहुवचन।)

पृष्ठ 31 की चित्र-तालिका इस प्रकार पढ़ी जाएगी —

चित्रम्एकवचनम् (1)द्विवचनम् (2)बहुवचनम् (3+)
लड़काबालकःबालकौबालकाः
पेड़वृक्षःवृक्षौवृक्षाः
हाथीगजःगजौगजाः

तीनों शब्द अकारान्त पुंलिङ्ग हैं, इसलिए तीनों का साँचा एक ही है —

प्रातिपदिकम् + = एकवचनम्  →  बालक + ः = बालकः
प्रातिपदिकम् + = द्विवचनम्  →  बालक + औ = बालकौ
प्रातिपदिकम् + आः = बहुवचनम्  →  बालक + आः = बालकाः
द्विवचन क्यों ज़रूरी है: हिन्दी और अंग्रेज़ी में केवल दो वचन हैं — एक और अनेक। संस्कृत में ठीक दो के लिए अलग रूप है। इसीलिए दो पेड़ों को ‘वृक्षाः’ नहीं, वृक्षौ कहा जाएगा। चित्र गिनकर देखिए — दूसरे खाने में हर चित्र में दो ही आकृतियाँ हैं।
अपने आप कीजिए: इसी साँचे पर और शब्द बनाइए — छात्रः / छात्रौ / छात्राः, अश्वः / अश्वौ / अश्वाः, सिंहः / सिंहौ / सिंहाः, मयूरः / मयूरौ / मयूराः।
प्र2.
स्त्रीलिङ्गम् — एकवचनम् / द्विवचनम् / बहुवचनम् (चित्र-तालिका, पृष्ठ 31–32) — बालिका, वैद्या, अजा — एतेषां त्रीणि वचनानि लिखन्तु ।
उत्तर

उत्तरम् (संस्कृतम्): आकारान्त-स्त्रीलिङ्गे एकवचने ‘आ’, द्विवचने ‘ए’, बहुवचने ‘आः’ भवति। (हिन्दी: आकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों में एकवचन में ‘आ’, द्विवचन में ‘ए’ और बहुवचन में ‘आः’ आता है।)

चित्रम्एकवचनम् (1)द्विवचनम् (2)बहुवचनम् (3+)
लड़कीबालिकाबालिकेबालिकाः
महिला चिकित्सकवैद्यावैद्येवैद्याः
बकरीअजाअजेअजाः
बालिका  →  बालिके  →  बालिकाः
वैद्या  →  वैद्ये  →  वैद्याः
अजा  →  अजे  →  अजाः
ध्यान की बात: स्त्रीलिङ्ग के एकवचन में विसर्ग नहीं लगता — ‘बालिकाः’ नहीं, केवल बालिका। विसर्ग तो बहुवचन में आता है (बालिकाः)। पुंलिङ्ग में उल्टा है — वहाँ एकवचन में ही विसर्ग है (बालकः)। यही सबसे आम भूल है, इसे बोलकर याद कीजिए।
पुंलिङ्ग–स्त्रीलिङ्ग की जोड़ियाँ: बालकः – बालिका, शिक्षकः – शिक्षिका, गायकः – गायिका, वैद्यः – वैद्या, अजः – अजा, छात्रः – छात्रा। पुंलिङ्ग में ‘अ’ को ‘आ’ या ‘इका’ करके स्त्रीलिङ्ग बन जाता है।
प्र3.
नपुंसकलिङ्गम् — एकवचनम् / द्विवचनम् / बहुवचनम् (चित्र-तालिका, पृष्ठ 32) — पत्रम्, चक्रम्, पुस्तकम् — एतेषां त्रीणि वचनानि लिखन्तु ।
उत्तर

उत्तरम् (संस्कृतम्): अकारान्त-नपुंसकलिङ्गे एकवचने ‘म्’, द्विवचने ‘ए’, बहुवचने ‘आनि’ भवति। (हिन्दी: अकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द एकवचन में ‘म्’ पर, द्विवचन में ‘ए’ पर और बहुवचन में ‘आनि’ पर समाप्त होते हैं।)

चित्रम्एकवचनम् (1)द्विवचनम् (2)बहुवचनम् (3+)
पत्तापत्रम्पत्रेपत्राणि
पहियाचक्रम्चक्रेचक्राणि
पुस्तकपुस्तकम्पुस्तकेपुस्तकानि
‘पत्राणि’ में ‘ण’ क्यों, और ‘पुस्तकानि’ में ‘न’ क्यों: यह णत्व-विधानम् है। यदि शब्द में पहले कहीं ऋ, र् या ष् आ चुका हो, तो आगे आने वाला ‘न’ बदलकर ‘ण’ हो जाता है — पत्राणि, चक्राणि (दोनों में ‘र्’ है)। ‘पुस्तक’ में ‘र्’ नहीं है, इसलिए वहाँ ‘न’ ही रहता है — पुस्तकानि। इसी नियम से — मित्राणि, वस्त्राणि, नेत्राणि; परन्तु फलानि, भवनानि, कमलानि।
तीनों लिङ्गों का एक-नज़र-साँचा:
लिङ्गम्एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
पुंलिङ्गम् (अकारान्त)–ः (बालकः)–औ (बालकौ)–आः (बालकाः)
स्त्रीलिङ्गम् (आकारान्त)–आ (बालिका)–ए (बालिके)–आः (बालिकाः)
नपुंसकलिङ्गम् (अकारान्त)–म् (फलम्)–ए (फले)–आनि (फलानि)
इन नौ खानों को कण्ठस्थ कर लीजिए — आगे का पूरा पाठ इन्हीं पर चलता है।
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