दीपकम् अध्याय 3 उच्चैः पठन्तु स्मरन्तु अवगच्छन्तु च

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उच्चैः पठन्तु स्मरन्तु अवगच्छन्तु च — पुंलिङ्गम् / स्त्रीलिङ्गम् / नपुंसकलिङ्गम् इत्येषु सः-एषः-कः, सा-एषा-का, तत्-एतत्-किम् इत्येषां त्रीणि वचनानि सारण्यां लिखन्तु ।
उत्तर

पृष्ठ 40 के अन्त में दी गई यह नौ पंक्तियों की सारणी पूरे पाठ का निचोड़ है। इसे ज़ोर से पढ़िए, याद कीजिए और समझिए —

शब्दःपुंलिङ्गम्स्त्रीलिङ्गम्नपुंसकलिङ्गम्
एक.द्वि.बहु.एक.द्वि.बहु.एक.द्वि.बहु.
तद् (वह)सःतौतेसातेताःतत्तेतानि
एतद् (यह)एषःएतौएतेएषाएतेएताःएतत्एतेएतानि
किम् (कौन/क्या)कःकौकेकाकेकाःकिम्केकानि
याद रखने की तीन कुंजियाँ:
  1. ‘एतद्’ = ‘ए’ + ‘तद्’ जैसा। तौ → एतौ, ते → एते, तानि → एतानि। केवल एकवचन में थोड़ा बदलाव है — सः → एषः, सा → एषा, तत् → एतत्
  2. ‘किम्’ में ‘त’ की जगह ‘क’। तौ → कौ, ते → के, ताः → काः, तानि → कानि। केवल नपुंसकलिङ्ग-एकवचन में ‘तत्’ के बदले किम् आता है।
  3. दुहराव पहचानिए — ‘ते’ तीन खानों में है (पुं.-बहु., स्त्री.-द्वि., नपुं.-द्वि.), ‘एते’ भी तीन में, और ‘के’ भी तीन में। इनका अर्थ हमेशा साथ आई संज्ञा से ही तय होगा।
बोलकर अभ्यास कीजिए: कक्षा में कोई वस्तु दिखाकर पूछिए — ‘एषः कः ?’ / ‘एषा का ?’ / ‘एतत् किम् ?’ और उत्तर दीजिए — ‘एषः चषकः।’ / ‘एषा लेखनी।’ / ‘एतत् पुस्तकम्।’ रोज़ पाँच वस्तुओं पर यह अभ्यास कीजिए, सारणी अपने-आप कण्ठस्थ हो जाएगी।
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