प्र1.
उच्चैः पठन्तु स्मरन्तु अवगच्छन्तु च — पुंलिङ्गम् / स्त्रीलिङ्गम् / नपुंसकलिङ्गम् इत्येषु सः-एषः-कः, सा-एषा-का, तत्-एतत्-किम् इत्येषां त्रीणि वचनानि सारण्यां लिखन्तु ।
उत्तर
पृष्ठ 40 के अन्त में दी गई यह नौ पंक्तियों की सारणी पूरे पाठ का निचोड़ है। इसे ज़ोर से पढ़िए, याद कीजिए और समझिए —
| शब्दः | पुंलिङ्गम् | स्त्रीलिङ्गम् | नपुंसकलिङ्गम् | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| एक. | द्वि. | बहु. | एक. | द्वि. | बहु. | एक. | द्वि. | बहु. | |
| तद् (वह) | सः | तौ | ते | सा | ते | ताः | तत् | ते | तानि |
| एतद् (यह) | एषः | एतौ | एते | एषा | एते | एताः | एतत् | एते | एतानि |
| किम् (कौन/क्या) | कः | कौ | के | का | के | काः | किम् | के | कानि |
याद रखने की तीन कुंजियाँ:
- ‘एतद्’ = ‘ए’ + ‘तद्’ जैसा। तौ → एतौ, ते → एते, तानि → एतानि। केवल एकवचन में थोड़ा बदलाव है — सः → एषः, सा → एषा, तत् → एतत्।
- ‘किम्’ में ‘त’ की जगह ‘क’। तौ → कौ, ते → के, ताः → काः, तानि → कानि। केवल नपुंसकलिङ्ग-एकवचन में ‘तत्’ के बदले किम् आता है।
- दुहराव पहचानिए — ‘ते’ तीन खानों में है (पुं.-बहु., स्त्री.-द्वि., नपुं.-द्वि.), ‘एते’ भी तीन में, और ‘के’ भी तीन में। इनका अर्थ हमेशा साथ आई संज्ञा से ही तय होगा।
बोलकर अभ्यास कीजिए: कक्षा में कोई वस्तु दिखाकर पूछिए — ‘एषः कः ?’ / ‘एषा का ?’ / ‘एतत् किम् ?’ और उत्तर दीजिए — ‘एषः चषकः।’ / ‘एषा लेखनी।’ / ‘एतत् पुस्तकम्।’ रोज़ पाँच वस्तुओं पर यह अभ्यास कीजिए, सारणी अपने-आप कण्ठस्थ हो जाएगी।