प्र1.
पट्टिकायां कानिचन पदानि सन्ति, तानि पदानि उचिते घटे पूरयन्तु — (पट्टिका — सैनिकः, चषकः, गायिका, महिषी, जलम्, कुक्कुरः, द्वारम्, फलम्, वृद्धा, वृक्षः, अजा, वातायनम्, अङ्कनी, पुस्तकम्, शुकः) । घटाः — एषः / एषा / एतत् ।
उत्तर
तीन घड़ों पर एषः, एषा और एतत् लिखा है, और हर घड़े में पाँच-पाँच पंक्तियाँ हैं। पट्टिका के पन्द्रह पद ठीक पाँच-पाँच में बँट जाते हैं —
| एषः (पुंलिङ्गम्) | एषा (स्त्रीलिङ्गम्) | एतत् (नपुंसकलिङ्गम्) |
|---|---|---|
| सैनिकः — सैनिक | गायिका — गायिका | जलम् — जल |
| चषकः — प्याला | महिषी — भैंस | द्वारम् — दरवाज़ा |
| कुक्कुरः — कुत्ता | वृद्धा — बुज़ुर्ग स्त्री | फलम् — फल |
| वृक्षः — पेड़ | अजा — बकरी | वातायनम् — खिड़की |
| शुकः — तोता | अङ्कनी — पेंसिल | पुस्तकम् — पुस्तक |
अन्तिम वर्ण ही सबसे बड़ा सुराग़ है: ‘ः’ पर समाप्त होने वाले पाँचों पद एषः के घड़े में गए; ‘आ’ या ‘ई’ पर समाप्त होने वाले पाँचों एषा के घड़े में; और ‘म्’ पर समाप्त होने वाले पाँचों एतत् के घड़े में। यही योग्यताविस्तर (पृष्ठ 45) का अकारान्त–आकारान्त–ईकारान्त नियम है।
बोलकर जाँचिए: हर पद के आगे उसका सर्वनाम लगाकर पूरा वाक्य कहिए — ‘एषः सैनिकः।’ ‘एषा गायिका।’ ‘एतत् जलम्।’ जो वाक्य कान को अटपटा लगे, वहीं भूल है।