प्र1.
उदाहरणं दृष्ट्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु — यथा – बालकः, बालकौ, बालकाः । (क) चषकः … … (ख) … … देवाः (ग) सैनिकः … … (घ) … रजकौ … (ङ) तन्त्रज्ञः … …
उत्तर
सभी पाँच शब्द अकारान्त पुंलिङ्ग हैं, इसलिए तीनों वचन एक ही साँचे पर बनेंगे — –ः / –औ / –आः।
| क्रमः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| यथा | बालकः | बालकौ | बालकाः (पुस्तके दत्तम्) | लड़का |
| (क) | चषकः | चषकौ | चषकाः | प्याला, गिलास |
| (ख) | देवः | देवौ | देवाः | देवता |
| (ग) | सैनिकः | सैनिकौ | सैनिकाः | सैनिक |
| (घ) | रजकः | रजकौ | रजकाः | धोबी |
| (ङ) | तन्त्रज्ञः | तन्त्रज्ञौ | तन्त्रज्ञाः | तकनीशियन, तन्त्र का जानकार |
पीछे की ओर भी सोचना पड़ता है: (ख) और (घ) में पुस्तक ने बीच का या अन्तिम खाना भरकर दिया है और एकवचन पूछा है। ‘देवाः’ से ‘आः’ हटाकर ‘देव’ बचा, उस पर ‘ः’ लगाकर देवः; ‘रजकौ’ से ‘औ’ हटाकर ‘रजक’ बचा, उस पर ‘ः’ लगाकर रजकः। यानी प्रत्यय पहचानकर उसे हटाना ही असली काम है।
शब्द-निर्माण: तन्त्रज्ञः = तन्त्रं जानाति इति — जो तन्त्र (टेक्नोलॉजी) जानता हो। इसी से बना है तन्त्रज्ञानम् = टेक्नोलॉजी। चषकः = पीने का प्याला; रजकः = कपड़े धोने वाला (‘रज्’ = रँगना/धोना से)।