दीपकम् अध्याय 8 अष्टमः पाठः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उद्यानस्य चित्रम् उपरि प्रदर्शितम् । एतत् राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे विद्यमानम् अमृत-उद्यानम् अस्ति । अत्र शताधिक-प्रकारकाणि पाटलपुष्पाणि सन्ति । सामान्यतः पञ्चसहस्राधिकानि ऋतुपुष्पाणि च सन्ति । रमणीयः निसर्गः विविधैः वर्णैः सर्वेषां चित्तम् आकर्षति । अस्मिन् पाठे तादृशानां वर्णानां परिचयं प्राप्नुमः । — अस्य अनुच्छेदस्य हिन्दी-अनुवादं कुर्वन्तु ।
उत्तर

पाठ के आरम्भ में दिल्ली के अमृत-उद्यान का चित्र है और नीचे उसका संस्कृत परिचय। वाक्य-दर-वाक्य अनुवाद इस प्रकार है —

संस्कृतम्हिन्दी अनुवादः
उद्यानस्य चित्रम् उपरि प्रदर्शितम् ।उद्यान का चित्र ऊपर दिखाया गया है।
एतत् राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे विद्यमानम् अमृत-उद्यानम् अस्ति ।यह राष्ट्रपति भवन के परिसर में स्थित अमृत-उद्यान है।
अत्र शताधिक-प्रकारकाणि पाटलपुष्पाणि सन्ति ।यहाँ सौ से भी अधिक प्रकार के गुलाब के फूल हैं।
सामान्यतः पञ्चसहस्राधिकानि ऋतुपुष्पाणि च सन्ति ।और साधारणतः पाँच हज़ार से अधिक ऋतु-पुष्प (मौसमी फूल) हैं।
रमणीयः निसर्गः विविधैः वर्णैः सर्वेषां चित्तम् आकर्षति ।सुन्दर प्रकृति अपने अनेक रंगों से सबके मन को आकर्षित करती है।
अस्मिन् पाठे तादृशानां वर्णानां परिचयं प्राप्नुमः ।इस पाठ में हम वैसे ही रंगों का परिचय प्राप्त करते हैं।
ध्यान दीजिए — यहाँ ‘वर्णः’ का अर्थ अक्षर नहीं है: संस्कृत में वर्ण शब्द के दो अर्थ हैं — (१) अक्षर (अ, आ, क, ख …) और (२) रंग। इस पूरे पाठ में हर जगह ‘वर्ण’ का अर्थ रंग ही है। ‘विविधैः वर्णैः’ = अनेक रंगों से।
व्याकरण-संकेतः: ‘विविधैः वर्णैः’ इति तृतीया विभक्तिः बहुवचनम् (करण-अर्थे — ‘रंगों के द्वारा’) । ‘सर्वेषाम्’ इति षष्ठी बहुवचनम् । ‘शताधिक-प्रकारकाणि’ = शतात् अधिकानि प्रकारकाणि, ‘पञ्चसहस्राधिकानि’ = पञ्चसहस्रात् अधिकानि — द्वे अपि नपुंसकलिङ्गे प्रथमा बहुवचनम्, यतः ‘पुष्पाणि’ नपुंसकलिङ्गम् ।
प्र2.
अमृत-उद्यानं कुत्र विद्यते ? तत्र कीदृशानि पुष्पाणि सन्ति ? (पाठ्य-प्रश्नः, पृष्ठ 89)
उत्तर

दोनों उत्तर पहले ही अनुच्छेद में हैं।

संस्कृतेन उत्तरम् — अमृत-उद्यानं राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे विद्यते । (हिन्दी: अमृत-उद्यान राष्ट्रपति भवन के परिसर में है।)

संस्कृतेन उत्तरम् — तत्र शताधिक-प्रकारकाणि पाटलपुष्पाणि पञ्चसहस्राधिकानि ऋतुपुष्पाणि च सन्ति । (हिन्दी: वहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब और पाँच हज़ार से अधिक ऋतु-पुष्प हैं।)

Did you know? यह उद्यान पहले ‘मुगल गार्डन’ नाम से जाना जाता था; सन् 2023 में इसका नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया। हर वर्ष वसन्त ऋतु में यह कुछ सप्ताहों के लिए आम जनता के लिए खोला जाता है — तभी इसके सैकड़ों रंगों के गुलाब देखे जा सकते हैं। ‘पाटलपुष्पम्’ का अर्थ है गुलाब का फूल।
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