प्र1.
उपरितनानां चित्राणां नामानि वर्णाः च के इति अभिजानन्तु लिखन्तु च । (चित्राणि — पाटलम्, गन्धपुष्पम्, सूर्यकान्तिः, कमलम्, चम्पकः, कर्णोरः, अपराजिता, जपाकुसुमम्, मल्लिका)
उत्तर
पृष्ठ 97 पर नौ फूलों के रंगीन चित्र हैं और हर चित्र के नीचे उसका संस्कृत नाम लिखा है। आपको केवल रंग जोड़ना है। चित्रों में दिखने वाले रंग इस प्रकार हैं —
| चित्रम् (संस्कृतम्) | हिन्दी | चित्रे वर्णः | संस्कृत-वाक्यम् |
|---|---|---|---|
| पाटलम् | गुलाब | रक्तः (गाढ़ा लाल) | पाटलं रक्तवर्णम् अस्ति । |
| गन्धपुष्पम् | गेंदा | पीतः | गन्धपुष्पं पीतवर्णम् अस्ति । |
| सूर्यकान्तिः | सूरजमुखी | पीतः | सूर्यकान्तिः पीतवर्णा अस्ति । |
| कमलम् | कमल | पाटलः (गुलाबी) | कमलं पाटलवर्णम् अस्ति । |
| चम्पकः | चम्पा | श्वेतः (मध्ये पीतः) | चम्पकः श्वेतवर्णः अस्ति । |
| कर्णोरः | कनेर | पीतः | कर्णोरः पीतवर्णः अस्ति । |
| अपराजिता | अपराजिता (शंखपुष्पी) | नीललोहितः / नीलः | अपराजिता नीललोहितवर्णा अस्ति । |
| जपाकुसुमम् | गुड़हल | रक्तः | जपाकुसुमं रक्तवर्णम् अस्ति । |
| मल्लिका | चमेली / मोगरा | श्वेतः | मल्लिका श्वेतवर्णा अस्ति । |
व्याकरण-संकेतः: वाक्य बनाते समय विशेषण को नाम के लिङ्ग से मिलाइए — नपुंसकलिङ्गे ‘पाटलं रक्तवर्णम्’, पुंलिङ्गे ‘चम्पकः श्वेतवर्णः’, स्त्रीलिङ्गे ‘मल्लिका श्वेतवर्णा’। ‘सूर्यकान्तिः’ और ‘अपराजिता’ भी स्त्रीलिङ्ग हैं।
नाम कैसे बने, यह भी देखिए: सूर्यकान्तिः = सूर्य की कान्ति की ओर मुड़ने वाला (सूरजमुखी); अपराजिता = ‘जो पराजित न हो’ — देवी का ही एक नाम; जपाकुसुमम् वही गुड़हल है जो पाठ के संवाद में मनीषा ने पहचाना था। ध्यान दीजिए कि यहाँ ‘पाटलम्’ फूल (गुलाब) के अर्थ में है, जबकि अभ्यास ३ में ‘पाटलवर्णः’ रंग (गुलाबी) के अर्थ में था।