कुतूहल अध्याय 10 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपको दो अलग-अलग प्रकार के कृमि जैसे जीव (चित्र 10.5) मिल सकते हैं। ये लार्वा और प्यूपा हैं, जो मच्छरों के विकास के दौरान उनके जीवन की दो विशिष्ट अवस्थाएँ हैं। लार्वा और प्यूपा के आकार में आपने क्या-क्या अंतर देखे?
उत्तर

दोनों जल में तड़पते-से दिखते हैं, किंतु हैंड लेंस से देखने पर वे स्पष्ट रूप से भिन्न हैं।

लक्षणलार्वाप्यूपा
समग्र आकारलंबा, पतला और कृमि जैसा, स्पष्ट खंडों में बँटाछोटा और अल्प-विराम (कॉमा) जैसा— आगे बड़ा गोल भाग, पीछे छोटी मुड़ी पूँछ
सिरएक सिरे पर छोटा स्पष्ट सिरसिर और वक्ष मिलकर एक बड़ा गोल भाग बनाते हैं
शरीर की सतहशरीर पर बाल जैसे तंतु या शूकचिकना, शूकरहित
जल में कैसे लटकता हैसतह से सिर नीचे करके लटकता हैसिर ऊपर करके कॉमा की तरह मुड़ा तैरता है
चालइधर-उधर तेजी से बल खाता हैछेड़ने पर कलाबाजी खाकर भागता है; अन्यथा प्रायः स्थिर
क्या भोजन लेता है?हाँ, भोजन लेकर वृद्धि करता हैनहीं— यह विश्राम की अवस्था है जिसमें शरीर नए सिरे से बनता है
सुरक्षा पहले: उन्हें पात्र में ही हैंड लेंस से देखिए, नंगे हाथ जल में न डालिए और अपने शिक्षक को सूचना दीजिए। इसके बाद जल सूखी भूमि पर उड़ेल दीजिए।
प्र2.
जल निकायों में देखे गए मच्छरों के लार्वा और प्यूपा बार-बार जल की सतह पर आते हैं। इसका क्या कारण हो सकता है?
उत्तर

वे श्वास लेने के लिए ऊपर आते हैं।

मच्छर के लार्वा और प्यूपा जल में रहते हैं और उन्हें श्वास लेने के लिए वायु की आवश्यकता होती है। वे मछली की भाँति जल में घुली वायु नहीं ले सकते, इसलिए उन्हें श्वास लेने के लिए जल की सतह पर आना पड़ता है। दोनों के पास एक छोटी श्वास-नली होती है जिसे वे जल की सतह से जरा-सा ऊपर निकालते हैं और फिर नीचे चले जाते हैं।

जल में रहना  +  वायु की आवश्यकता  →  बार-बार सतह पर आना अनिवार्य
यह एक तथ्य इतना उपयोगी क्यों है: यही मच्छर के जीवन का कमजोर बिंदु है। जो भी वस्तु जल की सतह को वायु से काट दे, वह उस पात्र के हर लार्वा और प्यूपा को समाप्त कर देगी, और बाहर किसी को हानि नहीं पहुँचेगी। अगला प्रश्न ठीक यही उपाय बताता है।
प्र3.
मच्छरों के जीवन-चक्र को किस प्रकार भंग किया जा सकता है?
उत्तर

किसी भी एक अवस्था पर प्रहार कीजिए और वयस्क मच्छर बनेगा ही नहीं। सबसे सरल निशाना वे अवस्थाएँ हैं जो जल में रहती हैं।

जिस अवस्था पर प्रहारक्या करेंयह क्यों काम करता है
अंडाकहीं भी जल इकट्ठा न होने दें; कूलर, गमले, तश्तरियाँ, टायर और टंकियाँ सप्ताह में एक बार खाली करें; जल-भंडारण ढककर रखेंमादा को अंडे देने के लिए स्थान ही नहीं मिलता
लार्वा और प्यूपाजिस स्थिर जल को खाली न किया जा सके उस पर मिट्टी के तेल की पतली परत छिड़केंपरत उन्हें वायु से काट देती है और वे मर जाते हैं
लार्वातालाबों और टंकियों में गप्पी या गैंबूसिया मछली डालेंमछलियाँ लार्वा खा जाती हैं
वयस्कमच्छरदानी, खिड़कियों पर जाली, पूरी बाँह के कपड़े, विकर्षक; आस-पास की सफाईकम काटेंगे, अतः रोग कम फैलेंगे और अंडे भी कम दिए जाएँगे
क्या आप जानते हैं? इसी कारण नगरपालिका के कर्मचारी वर्षा से पहले नालियों में धुआँ करते हैं और तालाबों पर तेल छिड़कते हैं, और विद्यालयों में सप्ताह में एक “शुष्क दिवस” रखा जाता है जिसमें हर पात्र खाली किया जाता है।
प्र4.
मैंने अपनी माताजी को स्थिर जल पर मिट्टी का तेल छिड़कते हुए देखा है। वो ऐसा क्यों करती हैं?
उत्तर

उस जल में पल रहे मच्छर के लार्वा और प्यूपा को मारने के लिए। पुस्तक इसका कारण एक ही वाक्य में स्पष्ट कर देती है।

मिट्टी का तेल जल की सतह पर एक पतली परत बनाता है।
यह परत जल को वायु से पृथक कर देती है और लार्वा एवं प्यूपा श्वास द्वारा वायु ग्रहण नहीं कर पाते हैं।
परिणामतः वे मर जाते हैं।

मिट्टी का तेल इस प्रकार क्यों फैलता है: मिट्टी का तेल जल से हल्का है और उसमें घुलता नहीं, इसलिए थोड़ी-सी मात्रा भी फैलकर पूरी सतह ढक लेती है। लार्वा हमेशा की तरह अपनी श्वास-नली ऊपर निकालता है, वहाँ वायु के स्थान पर तेल मिलता है और वह श्वास नहीं ले पाता।

एक आवश्यक सावधानी: मिट्टी का तेल केवल उसी जल पर डालना चाहिए जिसे कोई पिएगा या उपयोग नहीं करेगा— रुकी नाली, बेकार गड्ढा, जलभराव वाला कोना। पीने के पानी की टंकी या पशुओं के तालाब पर कभी नहीं। घर के पात्रों के लिए सबसे सुरक्षित उपाय है उन्हें खाली करके सुखा देना
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