कुतूहल अध्याय 10 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ऐसी कौन-सी विशेषताएँ हैं जो आपको एक कार से अलग करने में सहायता करती हैं? उदाहरण के लिए, कार के आमाप (आकार) में अपने आप वृद्धि नहीं होती है। क्या इसका तात्पर्य है कि वह निर्जीव है? अब, कार को निर्जीव के रूप में वर्गीकृत करने के लिए आपने किन विशेषताओं का उपयोग किया?
उत्तर

मुझे कार से अलग करने वाली विशेषताएँ हैं— वृद्धि, पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया, जनन और मृत्यु।

“कार वृद्धि नहीं करती— तो क्या वह निर्जीव है?” केवल इसी एक बात से नहीं। अनेक सजीवों में भी वृद्धि रुक जाती है— पूरी बढ़ चुकी नीम अथवा एक वयस्क व्यक्ति के आमाप में अब कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता। अतः “वृद्धि नहीं होती” अकेले कुछ सिद्ध नहीं करता।

कार को निर्जीव कहने के लिए मैंने वास्तव में इन विशेषताओं का उपयोग किया—

  • वह किसी छोटी कार से बड़ी नहीं हुई— कारखाने से ही अपने अंतिम आमाप में निकली।
  • वह भोजन नहीं लेती; पेट्रोल या डीजल ईंधन है, ऐसा भोजन नहीं जिससे शरीर बने।
  • वह श्वसन नहीं करती— भीतर भोजन से ऊर्जा मुक्त करने के लिए वायु का उपयोग नहीं होता।
  • वह शरीर का अपशिष्ट उत्सर्जित नहीं करती
  • वह ताप, प्रकाश या स्पर्श के प्रति स्वयं अनुक्रिया नहीं करती
  • वह जनन नहीं कर सकती
  • वह मरती नहीं— उसे केवल कबाड़ में डाल दिया जाता है।
प्रश्न इस प्रकार क्यों पूछा गया है: पुस्तक आपको सावधान रहना सिखा रही है। एक विशेषता का अभाव “निर्जीव” कहने के लिए पर्याप्त है, किंतु यह निश्चित कीजिए कि वह विशेषता सचमुच अनुपस्थित है, केवल रुकी हुई नहीं। वयस्क में वृद्धि रुकी है; कार में वह कभी थी ही नहीं।
प्र2.
ऐसी कौन-सी सामान्य विशेषताएँ हैं जो सजीवों को निर्जीव वस्तुओं से पृथक करती हैं?
उत्तर

अध्याय में आठ विशेषताएँ दी गई हैं। इन्हें एक क्रम में याद कीजिए— यही पूरे अध्याय का आधार है।

गतिपोषणवृद्धिश्वसनउत्सर्जनउद्दीपन के प्रति अनुक्रियाजननमृत्यु
विशेषताकैसे दिखाएँजंतु मेंपौधे में
गतिस्थान बदलते देखिए, या किसी भाग को हिलते देखिएतार से उड़ती गौरैयाप्रातः खिलता कमल; डंडे पर लिपटती लौकी की लता
पोषणदेखिए वह भोजन के रूप में क्या ग्रहण करता हैपत्ते खाती बकरीहरी पत्तियों में भोजन बनना; ड्रोसेरा का कीट पकड़ना
वृद्धिकुछ सप्ताह बाद उसी जीव को मापिएपिल्ले का पट्टा छोटा पड़ जानागीली रुई पर चने का नवोद्भिद प्रतिदिन मापिए
श्वसनश्वासें गिनिए, या पेट की गति देखिएगाय के पेट का ऊपर-नीचे होनापत्तियों के रंध्रों से वायु का आना-जाना
उत्सर्जनशरीर से निकलने वाला अपशिष्ट देखिएकमीज पर पसीने के धब्बे; मूत्रप्रातः घास और गुलाब की पत्तियों पर पानी की बूँदें
अनुक्रियाहल्का उद्दीपन देकर देखिएकाँटे से पैर तुरंत हट जानाछूने पर छुई-मुई की पत्तियों का बंद होना
जननअपनी तरह के नवजात ढूँढ़िएमुर्गी के साथ चूजेबीजों से भरी फली
मृत्युये सभी क्रियाएँ सदा के लिए रुक जाती हैंखिड़की पर पड़ा मरा हुआ कीटफल बनने के बाद पीला पड़कर सूखता फली का पौधा
प्र3.
क्या हम सजीव और निर्जीव के बीच अंतर करने के लिए गति को एक विशेषता मान सकते हैं? अपने आस-पास की पाँच ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए जो अपने आप गतिमान हो सकती हैं। क्या आपके अनुसार सूचीबद्ध की गई पाँचों वस्तुएँ केवल इसलिए सजीव हैं क्योंकि वे स्वयं गतिमान हो सकती हैं?
उत्तर

हाँ, गति एक विशेषता तो है— किंतु उसे अकेले कसौटी नहीं बनाया जा सकता।

अपने आप गतिमान होने वाली पाँच वस्तुएँ—

  1. सड़क पार करता कुत्ता
  2. रसोई की अलमारी पर पंक्ति में चलती चींटी
  3. पंखा (स्विच चालू करने पर)
  4. नदी अथवा नाली में बहता वर्षा का जल
  5. घड़ी की सेकंड वाली सुई (या चाबी वाली खिलौना गाड़ी)

क्या पाँचों सजीव हैं? नहीं— केवल दो।

वस्तुसजीव?कारण
कुत्तासजीवखाता है, वृद्धि करता है, श्वसन करता है, पिल्ले जनता है
चींटीसजीवभोजन ढोती है, अंडे से बड़ी होती है, स्पर्श पर तुरंत अनुक्रिया करती है
पंखानिर्जीवविद्युत मिलने पर ही घूमता है; न वृद्धि करता है, न जनन
नदीनिर्जीवभूमि की ढाल के कारण बहती है
घड़ी की सुईनिर्जीवकमानी या सेल से चलती है
वास्तविक अंतर: सजीव अपने शरीर के भीतर उत्पन्न बल से गति करता है और उसकी ऊर्जा भोजन से आती है। पंखे, नदी और घड़ी— तीनों को बाहर से धक्का चाहिए— विद्युत, गुरुत्व या कमानी।
प्र4.
अब जंतुओं की भाँति पौधे तो स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जा पाते तो क्या आप उन्हें सजीव मानते हैं?
उत्तर

हाँ, पौधे निश्चित रूप से सजीव हैं। वे चलते-फिरते नहीं, किंतु अनेक प्रकार की गतियाँ प्रदर्शित करते हैं और जीवन की शेष सभी विशेषताएँ भी दिखाते हैं।

पौधों में देखी जा सकने वाली गतियाँ—

  • फूलों का खिलना और बंद होना। कमल और सूरजमुखी प्रातः खिलते हैं; रात की रानी अँधेरे के बाद खिलती है।
  • कीटभक्षी पौधे। ड्रोसेरा की पत्तियाँ तश्तरी के आकार की होती हैं जिनमें असमान लंबाई वाले बाल जैसे अनेक तंतु होते हैं जिनके छोर पर चिपचिपा पदार्थ होता है। जब कोई कीट तश्तरी की सतह को स्पर्श करता है, बाल अंदर की ओर मुड़ जाते हैं और अपने चिपचिपे छोर से कीट को जकड़ लेते हैं। कीटभक्षी पौधे अपने पोषण के लिए कीटों पर निर्भर होते हैं।
  • आरोही लताएँ अपने समीप रखी किसी वस्तु के चारों ओर लिपट जाती हैं— जैसे लौकी, करेला और मनी प्लांट।
  • सोती हुई पत्तियाँ। छुई-मुई छूने पर बंद हो जाती है; आँवला और इमली की पत्तियाँ सूर्यास्त के बाद पास आ जाती हैं।
  • वृद्धि की गति। प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ता है, जड़ नीचे की ओर बढ़ती है (यह आप क्रियाकलाप 10.3 में सिद्ध करेंगे)।
पौधे एक ही स्थान पर क्यों रहते हैं: पौधा अपना भोजन सूर्य के प्रकाश, वायु और जल से स्वयं बनाता है और ये तीनों उसे वहीं मिल जाते हैं जहाँ वह खड़ा है। जंतु को भोजन खोजने जाना पड़ता है, इसलिए उसे चलना आवश्यक है। एक स्थान पर टिके रहना निर्जीव होने का नहीं, जीने की एक भिन्न शैली का प्रमाण है।
प्र5.
अन्य कीटभक्षी पौधों में गति के प्रक्रम का अवलोकन करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर

कीटभक्षी पौधे ऐसी मिट्टी में उगते हैं जिसमें नाइट्रोजन कम होती है, इसलिए वे अपने पोषण का एक भाग कीटों से प्राप्त करते हैं। प्रत्येक पौधे का जाल अलग ढंग से काम करता है।

पौधाजाल कैसा दिखता हैजो गति आप देख सकते हैं
ड्रोसेरा (सनड्यू)तश्तरी के आकार की पत्ती, जिस पर असमान लंबाई के बाल जैसे तंतु, छोर पर चिपचिपेतंतु अंदर की ओर मुड़ते हैं और चिपचिपे छोर से कीट को जकड़ लेते हैं
नेपेंथिस (घटपर्णी, मेघालय में)घड़े जैसी पत्ती जिस पर ऊपर एक ढक्कन होता हैढक्कन मुँह पर बंद हो जाता है; कीट चिकनी भीतरी दीवार से फिसल जाता है
यूट्रीकुलेरिया (ब्लैडरवर्ट, तालाबों में)जल के भीतर छोटी थैलियाँ जिन पर एक कपाट होता हैकपाट क्षण भर में खुलकर छोटे जीव को भीतर खींच लेता है
वीनस फ्लाईट्रैप (गमले में उगाया जाता है)पत्ती के दो कब्जेदार भाग जिन पर कड़े रोम होते हैंरोमों को दो बार छूने पर दोनों भाग पुस्तक की भाँति बंद हो जाते हैं
स्वयं देखिए: यदि विद्यालय के बगीचे में घटपर्णी या ड्रोसेरा हो तो पत्ती को माचिस की तीली से हल्के-से छूकर कुछ मिनट देखिए। पौधे को बार-बार छेड़िए— व्यर्थ बंद होने से पौधे की ऊर्जा नष्ट होती है।
प्र6.
आप अपनी तुलना अपने बचपन की तस्वीर से करें। क्या आप वह पोशाक पहन सकते हैं जो आप चार वर्ष पहले पहनते थे?
उत्तर

नहीं। वह पोशाक अब बहुत छोटी और तंग पड़ेगी।

इसका कारण वृद्धि है। चार वर्षों में मेरे हाथ-पैर लंबे हुए, कंधे चौड़े हुए और पूरा शरीर भारी हुआ। यह बढ़ोतरी बाहर से नहीं आई— मेरे शरीर ने भोजन से मिले पदार्थों से स्वयं नए भाग बनाए।

क्या बदलातब (7 वर्ष)अब (11 वर्ष)
लंबाईलगभग 120 सेमीलगभग 143 सेमी
जूते का नापछोटादो-तीन नाप बड़ा
दाँतदूध के दाँतअधिकांश स्थायी दाँतों से बदल गए
वृद्धि जीवन का लक्षण क्यों है: शरीर शून्य से नए भाग नहीं बना सकता। भोजन से ही कच्चा पदार्थ और ऊर्जा दोनों मिलते हैं। चार वर्ष से आलमारी में टँगी कमीज आज भी ठीक उतनी ही है— उसके पास स्वयं को बढ़ाने का कोई साधन नहीं।
यह कीजिए: दरवाजे की चौखट पर पेंसिल से अपनी लंबाई और उसके आगे तिथि अंकित कीजिए। छह माह बाद फिर कीजिए। दोनों निशानों के बीच का अंतर वही वृद्धि है जिसे आपने स्वयं मापा।
प्र7.
पौधे और अन्य सजीव भी वृद्धि करते हैं। क्या हम यह मान सकते हैं कि वृद्धि सजीवों की एक विशेषता है?
उत्तर

हाँ। वृद्धि सजीवों की एक विशेषता है— प्रत्येक सजीव अपने जीवन की किसी न किसी अवस्था में वृद्धि करता है।

  • गीली रुई पर रखा चने का बीज तीन दिन में नवोद्भिद और तीन सप्ताह में कई पत्तियों वाला पौधा बन जाता है।
  • आँगन में लगा आम का पौधा घर से भी ऊँचा वृक्ष बन जाता है।
  • बछड़ा गाय बनता है; टैडपोल मेंढक बनता है।
किंतु सावधान— “बड़ा हो जाना” सदैव वृद्धि नहीं होती। बालू का टीला, बर्फ की लटकन और तश्तरी में तूतिया (कॉपर सल्फेट) का क्रिस्टल— ये सब बड़े होते हैं। पर इनमें पदार्थ बाहर से जुड़ता है। सजीव में नया पदार्थ भोजन के रूप में लिया जाता है, शरीर के भीतर बदला जाता है और शरीर का ही अंग बनता है। इसीलिए सजीव की वृद्धि स्थायी होती है और एक निश्चित क्रम में चलती है, जबकि बालू का टीला एक ही दिन में उड़ भी सकता है।
परीक्षा के लिए संकेत: यदि प्रश्न कहे “क बढ़ता है, अतः क सजीव है”, तो पहले वृद्धि का प्रकार जाँचिए। भीतर से वृद्धि → सजीव। बाहर से जुड़ाव → निर्जीव।
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