मुझे कार से अलग करने वाली विशेषताएँ हैं— वृद्धि, पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया, जनन और मृत्यु।
“कार वृद्धि नहीं करती— तो क्या वह निर्जीव है?” केवल इसी एक बात से नहीं। अनेक सजीवों में भी वृद्धि रुक जाती है— पूरी बढ़ चुकी नीम अथवा एक वयस्क व्यक्ति के आमाप में अब कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता। अतः “वृद्धि नहीं होती” अकेले कुछ सिद्ध नहीं करता।
कार को निर्जीव कहने के लिए मैंने वास्तव में इन विशेषताओं का उपयोग किया—
- वह किसी छोटी कार से बड़ी नहीं हुई— कारखाने से ही अपने अंतिम आमाप में निकली।
- वह भोजन नहीं लेती; पेट्रोल या डीजल ईंधन है, ऐसा भोजन नहीं जिससे शरीर बने।
- वह श्वसन नहीं करती— भीतर भोजन से ऊर्जा मुक्त करने के लिए वायु का उपयोग नहीं होता।
- वह शरीर का अपशिष्ट उत्सर्जित नहीं करती।
- वह ताप, प्रकाश या स्पर्श के प्रति स्वयं अनुक्रिया नहीं करती।
- वह जनन नहीं कर सकती।
- वह मरती नहीं— उसे केवल कबाड़ में डाल दिया जाता है।