कुतूहल अध्याय 10 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
सजीवों को अपनी वृद्धि और विकास के लिए भोजन (पोषण) की आवश्यकता होती है। ऐसे पाँच सजीवों को सूचीबद्ध कीजिए जिन्हें वृद्धि के लिए भोजन की आवश्यकता होती है।
उत्तर

प्रत्येक सजीव को भोजन चाहिए। भारतीय घर के आस-पास के पाँच उदाहरण—

सजीवभोजन के रूप में क्या लेता है
मनुष्य (स्वयं मैं)चावल, रोटी, दाल, सब्ज़ी, दूध
गाय / भैंसघास, चारा, खली, भूसा
गौरैयादाना, छोटे कीट
चींटीचीनी, रोटी के टुकड़े, मरे हुए कीट
आम का पेड़ (कोई भी हरा पौधा)हरी पत्तियों में सूर्य के प्रकाश, जल और वायु से स्वयं भोजन बनाता है; मिट्टी से खनिज लेता है
वृद्धि के लिए भोजन क्यों चाहिए: भोजन तीन काम करता है— कार्य करने के लिए ऊर्जा देता है, शरीर के नए भाग बनाने के लिए पदार्थ देता है और क्षति की मरम्मत के लिए सामग्री देता है। भोजन रुका तो वृद्धि भी रुक जाती है।
प्र2.
अब, ऐसी प्रक्रिया के विषय में सोचिए जिसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते। सामान्य रूप से चलने के बाद, दौड़ने के बाद और थोड़ा नृत्य करने के बाद आपके द्वारा प्रति मिनट ली जाने वाली श्वासों की संख्या गिनिए। आँकड़ों को अंकित कीजिए। क्या आप प्रत्येक स्थिति के बाद श्वासों की संख्या में कोई अंतर देखते हैं?
उत्तर

वह प्रक्रिया है श्वसन। घड़ी लेकर गिनिए— एक बार श्वास लेना और छोड़ना मिलाकर एक श्वास है।

स्थितिश्वासें प्रति मिनट (कक्षा 6 के सामान्य विद्यार्थी में)मुझे कैसा लगा
चुपचाप बैठे हुए (आरंभ से पहले)लगभग 18–22सामान्य
सामान्य रूप से चलने के बादलगभग 22–26थोड़ा तेज़
थोड़ा नृत्य करने के बादलगभग 26–32गरमी लगी, श्वास गहरी हुई
दौड़ने के बादलगभग 35–45हाँफना, हृदय तेज़ धड़कना

हाँ, स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। जितना कठिन कार्य, उतनी अधिक श्वासें प्रति मिनट— और प्रत्येक श्वास भी गहरी होती है।

ऐसा क्यों होता है: पेशियाँ भोजन और वायु के उपयोग से ऊर्जा प्राप्त करती हैं। दौड़ने में बैठने की तुलना में कहीं अधिक ऊर्जा खर्च होती है, इसलिए शरीर को अधिक वायु, और वह भी तेज़ी से चाहिए। यही कारण है कि दौड़ के बाद हाँफ आती है और विश्राम करते ही श्वास धीमी हो जाती है।
स्वयं जाँचिए: तीन मित्रों के आँकड़े लेकर औसत निकालिए। संख्याएँ व्यक्ति-व्यक्ति में भिन्न होंगी, किंतु क्रम— विश्राम < चलना < नृत्य < दौड़— सबमें एक जैसा मिलेगा।
प्र3.
क्या आपने कुत्ते, बिल्ली, गाय और भैंस जैसे अन्य जंतुओं की श्वसन प्रक्रिया पर ध्यान दिया है? जब वे विश्राम कर रहे हों, उनके पेट की गति को ध्यान से देखिए।
उत्तर

हाँ। विश्राम करते हुए जंतु में श्वास लेना दूर से भी सरलता से दिखाई देता है।

  • छाया में बैठी गाय या भैंस को देखिए— उसका पेट नियमित रूप से ऊपर-नीचे होता है, लगभग 15 से 25 बार प्रति मिनट।
  • सोए हुए कुत्ते की छाती और पेट में वही धीमी गति दिखती है। धूप में दौड़ने के बाद वह जीभ निकालकर हाँफता है और बहुत तेज़ श्वास लेता है।
  • दीवार पर ऊँघती बिल्ली इतनी हल्की श्वास लेती है कि ध्यान से देखना पड़ता है।
  • जल में मछली मुँह और क्लोम-ढक्कन खोलती-बंद करती है— यही जल में घुली वायु लेने का उसका ढंग है।
पेट क्यों हिलता है: श्वास भीतर खींचने पर वक्ष-गुहा बड़ी होती है और नीचे के अंग नीचे दबते हैं, जिससे पेट बाहर उभरता है। श्वास छोड़ने पर सब पहले जैसा हो जाता है। यह गति सीधा प्रमाण है कि जंतु श्वसन कर रहा है— अर्थात वह जीवित है।
यह कीजिए: पीठ के बल लेटकर पेट पर एक हल्की पुस्तक रखिए और उसे ऊपर-नीचे होते देखिए। एक मिनट में गिनिए— आपने स्वयं को छुए बिना अपनी श्वास-दर माप ली।
प्र4.
श्वसन प्रक्रिया में जब हम श्वास अंदर की ओर खींचते हैं, वायु बाहर से हमारे शरीर में आती है। जब हम श्वास बाहर निकालते हैं तो वायु हमारे शरीर से बाहर की ओर जाती है। श्वास लेना श्वसन प्रक्रिया का एक भाग है। क्या पौधे भी श्वसन करते हैं?
उत्तर

हाँ— सभी सजीव श्वसन करते हैं और पौधे भी इसके अपवाद नहीं हैं।

पौधा यह कैसे करता है: पौधे की पत्तियों की सतह पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें रंध्र कहते हैं। ये छिद्र पौधे के शरीर में वायु अंदर लेने और बाहर करने में सहायता करते हैं। जड़ें मिट्टी के कणों के बीच की वायु लेती हैं और काष्ठीय तनों में भी अपने सूक्ष्म छिद्र होते हैं।

 हमपौधा
किस मार्ग सेनाक और मुँहपत्ती की सतह के रंध्र (और जड़ों की सतह)
कोई दिखने वाली गति?छाती और पेट ऊपर-नीचे होते हैंकोई नहीं— आदान-प्रदान मौन और बहुत धीमा होता है
क्या रात में रुक जाता है?नहींनहीं— पौधा दिन-रात श्वसन करता है
यह कीजिए— जैसा पुस्तक सुझाती है: अपने विद्यालय की वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों से अनुरोध कीजिए कि वे सूक्ष्मदर्शी से रंध्र दिखाएँ। किसी ताज़ी पत्ती (रीओ, मनी प्लांट या लिली) की निचली सतह की पतली झिल्ली उतारकर स्लाइड पर जल की एक बूँद के साथ रखिए। आपको मुँह जैसे सूक्ष्म छिद्र दिखेंगे, प्रत्येक दो घुमावदार कोशिकाओं के बीच।
एक सामान्य भ्रम दूर कीजिए: पौधा सूर्य के प्रकाश में भोजन बनाता है और श्वसन वह हर समय करता है। ये दो अलग-अलग प्रक्रम हैं। तेज़ धूप में भोजन बनना बहुत तेज़ होता है, इसीलिए प्रायः वही ध्यान में आता है।
प्र5.
क्या आपने ग्रीष्मकाल के दौरान कमीज पर काँख के आस-पास पड़ने वाले सफेद धब्बों को देखा है?
उत्तर

हाँ— और ये धब्बे उत्सर्जन का प्रमाण हैं।

ये धब्बे पसीने के कारण पड़ते हैं। शरीर से अपशिष्ट पदार्थ के रूप में निकलने वाले पसीने में जल और लवण होते हैं। ग्रीष्म की गरमी में जल उड़ जाता है और लवण कपड़े पर सफेद घेरे के रूप में रह जाता है।

शरीर से अपशिष्ट उत्पाद का निष्कासन = उत्सर्जन
  • जंतुओं में उत्सर्जन के एक उत्पाद के रूप में मूत्र भी निर्मित होता है।
  • श्वास के साथ निकलने वाली अपशिष्ट वायु भी बाहर कर दी जाती है।
शरीर को अपशिष्ट बाहर क्यों करना पड़ता है: सजीव शरीर के भीतर लगातार चलने वाली क्रियाओं से ऐसे पदार्थ बनते रहते हैं जो अब किसी काम के नहीं, और कुछ तो जमा होने पर हानिकारक भी होते हैं। उत्सर्जन उन्हें बाहर कर देता है। पेंसिल या कुर्सी में ऐसा कोई अपशिष्ट नहीं बनता, क्योंकि उनके भीतर कुछ घटित ही नहीं हो रहा।
क्या आप जानते हैं? पसीना शरीर को ठंडा भी करता है। जल के वाष्पित होते समय वह त्वचा से ऊष्मा ले लेता है— ठीक उसी कारण से जिससे मटका जल को ठंडा रखता है।
प्र6.
क्या आप जानते हैं कि पौधे भी उत्सर्जन करते हैं?
उत्तर

हाँ। पुस्तक ऐसे दृश्य की ओर संकेत करती है जो आपने प्रायः किसी सर्दी या वर्षा की सुबह देखा होगा।

पौधे पत्तियों की सतह पर अतिरिक्त जल और खनिजों को सूक्ष्म बूँदों के रूप में उत्सर्जित करते हैं— उदाहरण के लिए घास और गुलाब। सूर्योदय के तुरंत बाद लॉन देखिए: घास की हर पत्ती के सिरे और किनारों पर जल की नन्ही बूँदें सजी मिलेंगी।

पौधे अपशिष्ट कैसे निकालते हैंकहाँ दिखाई देता है
पत्ती के सिरे और किनारों पर घुले खनिजों सहित अतिरिक्त जल की बूँदेंप्रातःकाल घास, गुलाब और अरबी की पत्तियाँ
रंध्रों से अपशिष्ट गैसों का निकलनादिखाई नहीं देता
अपशिष्ट का पुरानी पत्तियों और छाल में जमा होकर गिर जानापतझड़ में गिरी पत्तियाँ; यूकेलिप्टस और अर्जुन की उतरती छाल
तने से गोंद और राल का रिसनाबबूल या नीम के तने पर गोंद; चीड़ पर राल
स्वयं जाँचिए: इन बूँदों को ओस समझने की भूल न कीजिए। ओस हर ठंडी सतह पर जमती है— पत्थर और स्कूटर की सीट पर भी। उत्सर्जन की बूँदें पत्ती के सिरे और किनारों पर पंक्तिबद्ध होती हैं, जहाँ शिराएँ समाप्त होती हैं— और ये तब भी बनती हैं जब वायु ठंडी न हो।
अध्याय का निष्कर्ष: सभी सजीव उत्सर्जन करते हैं। जंतु पसीने और मूत्र द्वारा, पौधे बूँदों, गिरती पत्तियों, गोंद और राल द्वारा— किंतु करते सभी हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ