कुतूहल अध्याय 10 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
यदि बिना जूते पहने घूमते हुए अप्रत्याशित रूप से आपका पैर काँटे जैसी किसी नुकीली वस्तु पर पड़ जाए या आप गलती से चाय का गरम प्याला छू लें, तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? आप भी तीन उद्दीपनों और उनके प्रति आपके शरीर में होने वाली अनुक्रियाओं को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर

मैं तुरंत पैर (या हाथ) खींच लूँगा/लूँगी— सोचने से भी पहले — और प्रायः चीख भी पड़ूँगा/पड़ूँगी।

कोई भी वस्तु या कोई घटना जो सजीवों को अनुक्रिया करने के लिए प्रेरित करती है, उद्दीपन कहलाती है।
शरीर जो करता है, वह अनुक्रिया है।
उद्दीपनशरीर की तत्काल अनुक्रिया
काँटे पर पैर पड़नापैर तुरंत उठ जाता है; मुँह से आवाज़ निकलती है
चाय का गरम प्याला छू लेनादर्द ठीक से महसूस होने से पहले ही हाथ पीछे हट जाता है
आँखों पर तेज़ धूप पड़नाआँखें बंद हो जाती हैं और पुतलियाँ सिकुड़ जाती हैं
नाक में काली मिर्च या धूल जानाछींक आ जाती है
भूख में भोजन की गंध आनामुँह में पानी आ जाता है
पीछे अचानक तेज़ आवाज़मैं पलटता/पलटती हूँ और हृदय तेज़ धड़कने लगता है
अनुक्रिया इतनी तेज़ क्यों होती है: संकट वाले उद्दीपन में शरीर आपके निर्णय की प्रतीक्षा नहीं करता। संदेश त्वचा से मेरुरज्जु तक जाता है और वहीं से हटने का आदेश लौट आता है— सब कुछ क्षण के छोटे-से भाग में। इसीलिए “आह” कहने से पहले ही हाथ प्याले से दूर हो चुका होता है।
प्र2.
क्या पौधे भी उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं? अपने आस-पास कुछ अन्य ऐसे पौधों का पता लगाइए जिनकी पत्तियाँ सूर्यास्त के बाद बंद हो जाती हैं।
उत्तर

जी हाँ, पौधे भी उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं। पुस्तक दो स्पष्ट उदाहरण देती है—

  • छुई-मुई (लज्जालु, टच मी नॉट, मिमोसा)— छूते ही पत्तियाँ बंद हो जाती हैं और कुछ मिनट बाद फिर खुल जाती हैं।
  • सोती हुई पत्तियाँ— कुछ पौधों की एक-दूसरे के सामने वाली पत्तियाँ सूर्यास्त के बाद आपस में पास आ जाती हैं। यह आँवले के पेड़ में देखा जा सकता है।

आस-पास के अन्य ऐसे पौधे जिनकी पत्तियाँ सूर्यास्त के बाद बंद होती हैं—

पौधाकहाँ मिलेगा
इमलीसड़क के किनारे, विद्यालय का मैदान
वर्षा वृक्ष (गुलाबी सिरस)उद्यान और मार्ग— साँझ होते ही पूरी छतरी झुक जाती है
गुलमोहरसड़कों के किनारे; नन्ही पर्णिकाएँ जोड़ों में बंद होती हैं
अगस्त (हड़गा) और सुबबूलखेत की मेड़ और बाड़
मूँगफली, सेम और चने के पौधेरसोई-बगीचा और खेत
तिपतिया / खट्टी-बूटीलॉन और नम कोने
स्वयं जाँचिए: खिड़की से दिखने वाली आँवले या इमली की एक टहनी चुनिए। उसी दिन 5 बजे और फिर 7 बजे उसका चित्र बनाइए। दूसरे चित्र में पर्णिकाएँ जोड़ों में सटी हुई दिखेंगी।
प्र3.
आँवला और छुई-मुई की पत्तियाँ इस प्रकार की अनुक्रिया क्यों करती हैं? उनके इस प्रकार के व्यवहार के लिए कौन-सा उद्दीपन उत्तरदायी है?
उत्तर

दोनों पौधे अलग-अलग उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया करते हैं।

पौधाउद्दीपनअनुक्रियापौधे को क्या लाभ
छुई-मुईस्पर्श— और झटका, गरम वस्तु या तेज़ हवा भीएक-दो क्षण में पर्णिकाएँ बंद होकर पूरी पत्ती झुक जाती हैचरने वाले पशु को हरी पत्तियों के स्थान पर मुरझाई-सी टहनी दिखती है और वह आगे बढ़ जाता है; पत्ती पर बैठे कीट झड़ जाते हैं
आँवला (तथा इमली, वर्षा वृक्ष)अंधकार— सूर्यास्त पर प्रकाश का घटना, साथ ही तापमान का गिरनाआमने-सामने की पर्णिकाएँ पास आ जाती हैं और पत्ती रात भर बंद रहती हैरात में जल की हानि कम होती है, कोमल पर्णिकाएँ ठंड, ओस और हवा से बचती हैं, और मुड़ी पत्ती पर कीटों को कम जगह मिलती है
यह गति बनती कैसे है: प्रत्येक पर्णिका के आधार पर कोशिकाओं का एक छोटा फूला हुआ गद्दा होता है। उद्दीपन मिलते ही इस गद्दे की एक ओर की कोशिकाओं से जल बाहर निकल जाता है। वह ओर ढीली पड़ जाती है, दूसरी ओर कड़ी बनी रहती है और पर्णिका खिंचकर बंद हो जाती है। जल लौटते ही पत्ती फिर खुल जाती है— इसीलिए छुई-मुई कुछ मिनट बाद और आँवला सूर्योदय पर पुनः खुल जाता है।
क्या आप जानते हैं? पौधों की इस अनुक्रिया को यंत्रों द्वारा सिद्ध करने वाले भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस से आपका परिचय इसी अध्याय के पृष्ठ 187 पर होता है।
प्र4.
क्या आपने बिल्ली, कुत्ते या अन्य जंतुओं के बच्चों को देखा है? पाँच अलग-अलग जंतुओं के बच्चों को सूचीबद्ध कीजिए। क्या आपने किसी निर्जीव वस्तु जैसे पेंसिल, कुर्सी या बल्ब के बच्चों को देखा है?
उत्तर

हाँ, जंतुओं के बच्चे देखे हैं— और नहीं, निर्जीव वस्तुओं के बच्चे कभी नहीं होते।

जंतुउसका बच्चा
बिल्लीबिल्ली का बच्चा
कुत्तापिल्ला
गायबछड़ा
मुर्गीचूजा
बकरीमेमना
मेंढकटैडपोल
तितलीइल्ली (लार्वा)

निर्जीव वस्तुएँ: पेंसिल से कभी छोटी पेंसिल नहीं बनी, कुर्सी से कभी स्टूल नहीं बना और बल्ब से कभी छोटा बल्ब नहीं निकला। नई पेंसिल, कुर्सी और बल्ब सब कारखाने में मनुष्यों द्वारा बनाए जाते हैं— वे किसी पुरानी वस्तु से जन्म नहीं लेते।

सभी सजीव जनन करते हैं। जनन अपनी तरह के नवजातों को जन्म देने की प्रक्रिया है।
प्र5.
जनन क्यों अनिवार्य है?
उत्तर

यह जीवन की निरंतरता के लिए अनिवार्य है। यही पुस्तक का उत्तर है, और इसे थोड़ा खोलकर समझिए।

  • प्रत्येक जीव का एक निश्चित जीवन-काल होता है और अंततः वह मर जाता है— वयस्क मच्छर 10 से 15 दिन, फली का पौधा कुछ महीने, मनुष्य कई दशक।
  • यदि नए जीव उत्पन्न न हों तो हर प्रकार का सजीव एक ही जीवन-काल में पृथ्वी से लुप्त हो जाएगा।
  • जनन मरने वाले जीवों का स्थान भर देता है, जिससे जाति पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती है— इस वर्ष के पौधे के बीज अगले वर्ष के पौधे बनते हैं।
ध्यान दीजिए कि जनन क्या नहीं करता: वह व्यक्ति को जीवित नहीं रखता। फल बनने के बाद माता-पौधा फिर भी पीला पड़कर सूख जाता है। बचती है जाति। इसीलिए अध्याय के सारांश में लिखा है कि जनन की प्रक्रिया जीव की निरंतरता को सुनिश्चित करती है।
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