प्र1.
यदि बिना जूते पहने घूमते हुए अप्रत्याशित रूप से आपका पैर काँटे जैसी किसी नुकीली वस्तु पर पड़ जाए या आप गलती से चाय का गरम प्याला छू लें, तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? आप भी तीन उद्दीपनों और उनके प्रति आपके शरीर में होने वाली अनुक्रियाओं को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर
मैं तुरंत पैर (या हाथ) खींच लूँगा/लूँगी— सोचने से भी पहले — और प्रायः चीख भी पड़ूँगा/पड़ूँगी।
कोई भी वस्तु या कोई घटना जो सजीवों को अनुक्रिया करने के लिए प्रेरित करती है, उद्दीपन कहलाती है।
शरीर जो करता है, वह अनुक्रिया है।
शरीर जो करता है, वह अनुक्रिया है।
| उद्दीपन | शरीर की तत्काल अनुक्रिया |
|---|---|
| काँटे पर पैर पड़ना | पैर तुरंत उठ जाता है; मुँह से आवाज़ निकलती है |
| चाय का गरम प्याला छू लेना | दर्द ठीक से महसूस होने से पहले ही हाथ पीछे हट जाता है |
| आँखों पर तेज़ धूप पड़ना | आँखें बंद हो जाती हैं और पुतलियाँ सिकुड़ जाती हैं |
| नाक में काली मिर्च या धूल जाना | छींक आ जाती है |
| भूख में भोजन की गंध आना | मुँह में पानी आ जाता है |
| पीछे अचानक तेज़ आवाज़ | मैं पलटता/पलटती हूँ और हृदय तेज़ धड़कने लगता है |
अनुक्रिया इतनी तेज़ क्यों होती है: संकट वाले उद्दीपन में शरीर आपके निर्णय की प्रतीक्षा नहीं करता। संदेश त्वचा से मेरुरज्जु तक जाता है और वहीं से हटने का आदेश लौट आता है— सब कुछ क्षण के छोटे-से भाग में। इसीलिए “आह” कहने से पहले ही हाथ प्याले से दूर हो चुका होता है।