प्र1.
अब आप अपने हाथ में फिरकी को पकड़कर दौड़िए। आप इसे फूँक मार कर भी चला सकते हैं। आप क्या देखते हैं? क्या फिरकी घूमती है?
उत्तर
हाँ— जब भी वायु फिरकी के पंखों से टकराती है, फिरकी घूमने लगती है।
| आप क्या करते हैं | आप क्या देखते हैं |
|---|---|
| शांत वायु में फिरकी को स्थिर पकड़ना | वह नहीं घूमती |
| उस पर फूँक मारना | वह घूमती है; तेज फूँक मारने पर और तेज घूमती है |
| उसे पकड़कर दौड़ना | वह स्वयं तेजी से घूमने लगती है |
| उसे आगे-पीछे हिलाना | प्रत्येक बार हिलाने पर वह घूमती है |
| तेज हवा वाले दिन स्थिर खड़े रहना | बिना कुछ किए ही वह लगातार घूमती रहती है |
यह घूमती क्यों है: फिरकी के पंख मोड़कर बनाए जाते हैं, इसलिए प्रत्येक पंख तिरछा होता है। तिरछे पंख से टकराकर वायु उसे एक ओर धकेलती है। चारों पंख एक ही दिशा में धकेले जाते हैं, अतः पूरी फिरकी पिन पर घूमने लगती है। दौड़ने पर आप स्थिर वायु में आगे बढ़ते हैं— यह वैसा ही है जैसे वायु आपके पास से गुजर रही हो।
सुझाव: 15 cm × 15 cm का कड़ा किंतु पतला कागज लीजिए और ऑलपिन को डंडी में बहुत कसकर मत ठोकिए। पिन कसी होगी तो कितनी भी फूँक मारिए, फिरकी नहीं घूमेगी।