कुतूहल अध्याय 11 क्रियाकलाप 11.2: आइए, फिरकी बनाएँ और सजाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अब आप अपने हाथ में फिरकी को पकड़कर दौड़िए। आप इसे फूँक मार कर भी चला सकते हैं। आप क्या देखते हैं? क्या फिरकी घूमती है?
उत्तर

हाँ— जब भी वायु फिरकी के पंखों से टकराती है, फिरकी घूमने लगती है।

आप क्या करते हैंआप क्या देखते हैं
शांत वायु में फिरकी को स्थिर पकड़नावह नहीं घूमती
उस पर फूँक मारनावह घूमती है; तेज फूँक मारने पर और तेज घूमती है
उसे पकड़कर दौड़नावह स्वयं तेजी से घूमने लगती है
उसे आगे-पीछे हिलानाप्रत्येक बार हिलाने पर वह घूमती है
तेज हवा वाले दिन स्थिर खड़े रहनाबिना कुछ किए ही वह लगातार घूमती रहती है
यह घूमती क्यों है: फिरकी के पंख मोड़कर बनाए जाते हैं, इसलिए प्रत्येक पंख तिरछा होता है। तिरछे पंख से टकराकर वायु उसे एक ओर धकेलती है। चारों पंख एक ही दिशा में धकेले जाते हैं, अतः पूरी फिरकी पिन पर घूमने लगती है। दौड़ने पर आप स्थिर वायु में आगे बढ़ते हैं— यह वैसा ही है जैसे वायु आपके पास से गुजर रही हो।
सुझाव: 15 cm × 15 cm का कड़ा किंतु पतला कागज लीजिए और ऑलपिन को डंडी में बहुत कसकर मत ठोकिए। पिन कसी होगी तो कितनी भी फूँक मारिए, फिरकी नहीं घूमेगी।
प्र2.
फिरकी को कौन घुमा रहा है?
उत्तर

पवन अर्थात् चलती हुई वायु ही फिरकी को घुमाती है।

वायु दिखाई नहीं देती, किंतु उसका प्रभाव दिखाई देता है— पेड़ों पर पत्तियों की सरसराहट, रस्सी पर लटके कपड़ों का हिलना, पंखा चलाने पर खुली पुस्तक के पन्नों की फड़फड़ाहट। इसी प्रकार चलती वायु फिरकी के तिरछे पंखों को धकेलकर उसे घुमा देती है।

चलती हुई वायु = पवन
मंद पवन = बयार  •  बहुत तेज पवन = आँधी
मुख्य बात: पवनचक्की भी ठीक फिरकी की तरह ही कार्य करती है, केवल आकार में बहुत बड़ी होती है— पवन उसके पंखों को घुमाती है। पवनचक्की का उपयोग आटे की चक्की चलाने, कुँए से पानी ऊपर खींचने और विद्युत-उत्पादन के लिए किया जाता है। पवनचक्की फार्म वह क्षेत्र है जिसमें अनेक पवनचक्कियाँ एक साथ लगी होती हैं और पवन-ऊर्जा से विद्युत बनाती हैं।
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