प्र1.
तमिलनाडु का मुप्पंडल पवनचक्की फार्म, राजस्थान के जैसलमेर का पवनचक्की पार्क और महाराष्ट्र का ब्रह्मवेल पवनचक्की फार्म हमारे देश के कुछ प्रमुख पवनचक्की फार्म हैं। अपने देश में पाए जाने वाले अन्य पवनचक्की फार्म के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर
भारत विश्व के सबसे बड़े पवन-ऊर्जा उत्पादक देशों में से एक है। पवनचक्की फार्म वहीं बनाए जाते हैं जहाँ पवन तेज और लगातार चलती है— समुद्र तटों पर, पश्चिमी घाट के दर्रों में और खुले मरुस्थल में।
| पवनचक्की फार्म | राज्य | वहाँ पवन तेज क्यों है |
|---|---|---|
| मुप्पंडल (कन्याकुमारी के पास) | तमिलनाडु | समुद्री पवन पश्चिमी घाट के अरलवायमोझी दर्रे से होकर तेजी से बहती है— एशिया के सबसे बड़े पवन फार्मों में से एक |
| कयत्तार और अरलवायमोझी | तमिलनाडु | तिरुनेलवेली–तूतीकोरिन का वही तेज पवन वाला क्षेत्र |
| जैसलमेर पवन पार्क | राजस्थान | थार मरुस्थल का खुला, समतल विस्तार जहाँ पवन को कोई रोक नहीं |
| ब्रह्मवेल और धुले–साकरी | महाराष्ट्र | सतपुड़ा एवं सह्याद्रि की ऊँची पर्वत-श्रेणियाँ |
| वनकुसवडे (कोयना के पास) | महाराष्ट्र | पश्चिमी घाट का पवन-प्रवण शिखर |
| चित्रदुर्ग और गदग | कर्नाटक | उत्तरी कर्नाटक का खुला पठार |
| कच्छ और जामनगर तट | गुजरात | सौराष्ट्र–कच्छ के पूरे तट पर तेज समुद्री पवन |
| अनंतपुर और रामगिरि | आंध्र प्रदेश | रायलसीमा का शुष्क, खुला पठार |
पवन-ऊर्जा क्यों लाभदायक है: पवन एक नवीकरणीय संसाधन है। पवनचक्की एक बार लग जाने के बाद न कोयला चाहिए, न डीजल, और न ही कोई धुँआ निकलता है। ऊपर बताए गये पाँच राज्य— तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान— मिलकर भारत की अधिकांश पवन-विद्युत बनाते हैं।
पता लगाइए: घर पर पूछिए या मानचित्र में देखिए कि आपके राज्य में कोई पवनचक्की फार्म है या नहीं। यदि नहीं है तो सोचिए क्यों— क्या आपका क्षेत्र पहाड़ों की ओट में है, या समुद्र से बहुत दूर है?