कुतूहल अध्याय 11 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
यदि आपको पीने के लिए जल न मिले, विशेषतः जब आपको प्यास लगी हो तब आपको कैसा महसूस होगा?
उत्तर

बहुत बेचैनी और व्याकुलता अनुभव होगी— और यह अनुभूति तेजी से बढ़ती जाती है।

  • मुँह और गला सूख जाता है, बोलना तक कठिन हो जाता है।
  • कमजोरी, थकान और चिड़चिड़ाहट होती है, किसी काम में मन नहीं लगता।
  • बहुत देर तक जल न मिले तो सिरदर्द और चक्कर आने लगते हैं।
  • जब तक एक गिलास जल न मिल जाए, और कुछ सूझता ही नहीं।
ऐसा क्यों होता है: हमारे शरीर का आधे से अधिक भाग जल है। पसीने, श्वास और मूत्र के रूप में यह लगातार बाहर निकलता रहता है, इसलिए इसकी पूर्ति करनी ही पड़ती है। प्यास शरीर का अपना संकेत है कि जल कम हो रहा है। यही कारण है कि जल को अमूल्य कहा गया है— मनुष्य भोजन के बिना कई दिन जी सकता है, किंतु जल के बिना कुछ ही दिन।
सोचिए: गरमियों में भारत के अनेक नगरों-कस्बों में दुकानों और मंदिरों के बाहर राहगीरों तथा पक्षियों के लिए प्याऊ या मटका रखा जाता है। यह पुरानी परंपरा इसी अनुभूति के कारण बनी है।
प्र2.
क्या आप अपने दैनिक जीवन में जल के कुछ अन्य उपयोगों के विषय में सोच सकते हैं? अपने विचार नीचे दिये गये रिक्त स्थान में लिखिए।
उत्तर

पहले बुलबुले में लिखा है— “हमें पीने के लिए जल की आवश्यकता होती है।” रिक्त बुलबुलों में ये उपयोग लिखे जा सकते हैं।

कहाँ उपयोगउदाहरण
घर मेंखाना बनाना, बर्तन धोना, कपड़े धोना, नहाना, फर्श साफ करना, शौचालय में, पौधों को पानी देना
खेत मेंफसलों की सिंचाई, खेत की तैयारी, पशुओं को पानी पिलाना
उद्योगों मेंकागज, कपड़ा, सीमेंट, चीनी और इस्पात बनाने में; मशीनों को ठंडा करने में
सबके लिएबाँधों से विद्युत उत्पादन, आग बुझाना, नौका द्वारा परिवहन, मछली पालन
एक बात ध्यान दीजिए: पीने के अतिरिक्त लगभग हर उपयोग कम जल में, या पहले से एक बार उपयोग किए गये जल से भी पूरा किया जा सकता है। जल की बचत की संभावना यहीं छिपी है।
प्र3.
हमें जल कहाँ-कहाँ से प्राप्त होता है? जल के विभिन्न स्रोतों की एक सूची बनाइए।
उत्तर

पृथ्वी की सतह का लगभग दो-तिहाई भाग जल से घिरा है, फिर भी अधिकांश जल सीधे उपयोग योग्य नहीं है।

जल का प्रकारस्रोतक्या हम उपयोग कर सकते हैं?
लवणीय (नमकीन) जलमहासागर एवं समुद्रनहीं— घरेलू, कृषि तथा औद्योगिक उपयोग के योग्य नहीं
हिम के रूप में मृदु जलबर्फ की चादरें, ऊँचे पर्वतों की हिम और हिमनदमृदु जल है, किंतु प्राप्त करना कठिन
भू-जलकुएँ, नलकूप और हैंडपंप से निकाला गया जलमृदु जल है, किंतु सुगमता से उपलब्ध नहीं
सतही मृदु जलनदियाँ, झरने, झीलें, तालाब, बावड़ियाँ, सोतेहाँ— सहजता से उपलब्ध, किंतु मात्रा बहुत थोड़ी
वर्षाछतों और खुली भूमि से एकत्रित वर्षा जलहाँ— यही मूल स्रोत है जो शेष सभी को भरता है
पृथ्वी का कुल जल → अधिकांश लवणीय समुद्री जल
थोड़ा भाग मृदु जल → उसका भी अधिकांश हिम और भू-जल में बंद
तालाबों, नदियों, झीलों और कुँओं में केवल बहुत थोड़ा भाग सहजता से उपलब्ध
इसीलिए जल अमूल्य है: इतना जल, फिर भी पीने योग्य इतना कम! हमारा देश गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा और महानदी जैसी नदियों से समृद्ध है, फिर भी अनेक भागों में जल की कमी रहती है। यही कारण है कि अज्जी बच्चों को हर बूँद सँभालकर उपयोग करना सिखाती हैं।
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