प्र1.
क्या आप अनुभव करते हैं कि हमारे दैनिक जीवन की गतिविधियों में जल का उपयोग सही प्रकार से हो रहा है? क्या आपने दैनिक कार्यों में जल को व्यर्थ होते हुए देखा है?
उत्तर
नहीं— अधिकांश घरों और विद्यालयों में जल का उपयोग ठीक प्रकार से नहीं होता। एक बार ध्यान देना आरंभ करें तो अपव्यय हर ओर दिखाई देने लगता है।
- दाँत साफ करते, हाथ में साबुन लगाते या दाढ़ी बनाते समय नल खुला छोड़ देना।
- नल और पाइप का रिसाव— एक सेकंड में एक बूँद टपकने वाला नल दिन भर में कई बाल्टी जल बहा देता है।
- मोटर बंद करना भूल जाने से टंकी का बहना।
- स्कूटर, कार या आँगन को चलते पाइप से धोना।
- दोपहर में बगीचे को पानी देना, जब अधिकांश जल वाष्पित हो जाता है।
- केवल दो-तीन बर्तनों के लिए भी नल या मशीन चला देना।
हमें ध्यान क्यों नहीं जाता: नल घुमाते ही जल आ जाता है, इसलिए वह अनंत लगता है। किंतु उस नल के पीछे कोई नदी, झील या नलकूप है, जो अनंत नहीं है। भारत के कई भागों में लोगों को पीने का पानी लाने के लिए बहुत दूर तक चलना पड़ता है— सभी के पास जल की समान उपलब्धता नहीं है।
स्वयं जाँचिए: सुबह टपकते नल के नीचे एक मग रखिए और शाम को देखिए कि कितना जल भर गया। एक छोटा-सा रिसाव प्रतिदिन इतना जल व्यर्थ कर देता है।