प्र1.
क्या हम केवल मनोरंजन के लिए तारों के पैटर्नों की पहचान करते हैं या फिर इनका कोई उपयोग भी है?
उत्तर
दोनों— किंतु उपयोग पहले आया। तारों के पैटर्न मनोरंजन बनने से बहुत पहले एक गंभीर, व्यावहारिक साधन थे।
- दिशा ज्ञात करना। चुंबकीय दिक्सूचक के आविष्कार से पहले, और जी.पी.एस. से तो बहुत पहले, नाविक और यात्री तारों से रास्ता खोजते थे। सप्तर्षि से ध्रुव तारा मिलता है, जो उत्तर दिशा में लगभग अचल रहता है। नुब्रा से गुज़रने वाले कारवाँ यही विधि प्रयोग करते थे। आज भी आपात स्थिति में यह वैकल्पिक विधि के रूप में काम आती है।
- तारों की पहचान। हज़ारों तारे एक जैसे दिखते हैं। समूह बना देने पर किसी एक तारे की ओर संकेत करके यह बताया जा सकता है कि वह कौन-सा है— "ओरायन के नीचे-दाईं ओर वाला चमकीला तारा"।
- ऋतु-पंचांग। भिन्न-भिन्न तारा-मंडल भिन्न ऋतुओं में उदित होते हैं, इसलिए उनके दिखने से बुवाई, कटाई और त्योहारों का समय तय होता था।
- कहानी और संस्कृति। हर पैटर्न के साथ एक कहानी जुड़ी थी, और कहानी से बच्चों को पैटर्न याद रह जाता था।
ध्रुव तारा दिशा क्यों बताता है: यह लगभग ठीक पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के ऊपर, पृथ्वी के अक्ष की सीध में है। पृथ्वी घूमती है तो सभी तारे आकाश में घूमते प्रतीत होते हैं, पर ध्रुव तारा लगभग अचल रहता है। उसकी ओर मुँह कीजिए— आप उत्तर की ओर मुँह किए हैं।
क्या आप जानते हैं? बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (आई.ए.यू.) ने तारा-मंडलों की परिसीमाएँ तय कीं और 88 तारा-मंडल सूचीबद्ध किए, इस प्रकार संपूर्ण आकाश को 88 क्षेत्रों में बाँट दिया। इसीलिए आज तारा-मंडल का अर्थ आकाश का एक क्षेत्र है, केवल तारों का पैटर्न नहीं।