प्र1.
चने के बीज का आवरण हटा कर बीजों की संरचना को देखें। अब चने और मक्का के बीजों की संरचना का अवलोकन करें। क्या वे समान हैं अथवा भिन्न हैं?
उत्तर
वे स्पष्ट रूप से भिन्न हैं। दो-तीन दिन भिगोने के बाद यह अवलोकन मिलता है।
| अवलोकन | चना — चित्र 2.6 (क) | मक्का — चित्र 2.6 (ख) |
|---|---|---|
| बीज आवरण | भिगोने के बाद सरलता से उतर जाता है | कसकर जुड़ा रहता है, उतरता नहीं |
| विभाजन | दो बराबर भागों में साफ़-साफ़ बँट जाता है | बँटता नहीं — एक ही टुकड़े में रहता है |
| बीजपत्रों की संख्या | दो, दोनों मोटे और मांसल | एक, पतला |
| समूह का नाम | द्विबीजपत्री (डाइकॉट) | एकबीजपत्री (मोनोकॉट) |
| इसी प्रकार के अन्य बीज | राजमा, मूँग, मटर, मूँगफली, सरसों | गेहूँ, धान, ज्वार, बाजरा |
भिगोना क्यों आवश्यक है: सूखा बीज पत्थर जैसा कठोर होता है और बँटने के बजाय टूट जाता। भिगोने पर बीज जल सोखकर फूल जाता है, आवरण ढीला पड़ जाता है और दोनों बीजपत्र अपनी प्राकृतिक संधि से अलग हो जाते हैं। बीच में देखिए — नन्हा भ्रूण, उसकी पहली जड़ और प्ररोह भी दिखाई दे जाएँगे।
क्या आप जानते हैं? भीगे चने के जो दो भाग आपने देखे, वही चना दाल हैं। "दाल" वास्तव में अलग हुए बीजपत्र ही हैं — इसीलिए दाल हमारे लिए भी ऊर्जा और पोषण का इतना अच्छा स्रोत है।