कुतूहल अध्याय 2 और भी सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक भारतीय वैज्ञानिक/वन्य जीवविज्ञानी के बारे में पढ़ें जो भारत की जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं। इस पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट बनाएँ।
उत्तर

एक वैज्ञानिक चुनिए, दो-तीन विश्वसनीय स्रोत पढ़िए और लगभग आधा पृष्ठ लिखिए। अच्छी रिपोर्ट में पाँच भाग होने चाहिए: वे कौन हैं, उन्होंने क्या अध्ययन किया, मुख्य कार्य क्या रहा, जैव विविधता के लिए वह क्यों महत्वपूर्ण था, और आपने उनसे क्या सीखा

जिनके बारे में लिख सकते हैं: जानकी अम्माल और सालिम अली (दोनों आपके अध्याय में), उल्लास कारंत (बाघ गणना), कृति कारंत (मानव–वन्यजीव संघर्ष), रमन सुकुमार (हाथी), बिट्टू सहगल (संरक्षण लेखन), पूर्णिमा देवी बर्मन (असम का हरगिला सारस)।

नमूना रिपोर्ट: जानकी अम्माल (1897–1984) केरल की एक भारतीय वनस्पतिशास्त्री थीं जिन्होंने अपना जीवन पौधों और पर्यावरण को समर्पित किया। उन्होंने गन्ने और पश्चिमी घाट के पौधों पर कार्य किया और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण की प्रमुख के रूप में पूरे देश की पादप विविधता का प्रलेखन करने के लिए कार्यक्रम आरंभ किए। जीवन के उत्तरार्ध में वे साइलेंट वैली बचाओ आंदोलन से जुड़ीं और केरल के पालक्काड़ ज़िले के आर्द्र सदाबहार वन को बाँध में डूबने से बचाने में सहायक हुईं। उनकी सबसे बड़ी सीख यह है कि सावधानीपूर्वक अभिलेख रखना स्वयं में संरक्षण का कार्य है — जिसे किसी ने गिना ही नहीं, उसकी रक्षा नहीं की जा सकती।
अच्छी रिपोर्ट क्या होती है: प्रशंसा नहीं, विशिष्ट कार्य लिखिए। "उन्हें पक्षी बहुत प्रिय थे" से कुछ पता नहीं चलता; "उन्होंने भारतीय पक्षियों की सूची बनाई, उनके यात्रा मार्ग और आवास प्रलेखित किए, तथा केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और रंगनाथिट्टु पक्षी अभयारण्य को संरक्षित करवाया" से पाठक को ठीक-ठीक पता चलता है कि सालिम अली के कारण क्या बदला।
प्र2.
भारत में जैव विविधता के प्रति दिव्या मुदप्पा, उषा लाचुंगपा, गज़ाला शाहबुद्दीन, नंदिनी वेलोह, विद्या अथ्रेया, उमा रामाकृष्णन और दिव्या कर्नाड के योगदान के बारे में पता कीजिए। इनमें से किन्हीं तीन के द्वारा किए गए कार्यों का एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार करें।
उत्तर

कोई तीन नाम चुनिए, पता कीजिए कि प्रत्येक कहाँ और किस जीव या आवास पर कार्य करती हैं, और हर एक पर एक छोटा अनुच्छेद लिखिए। अपनी पढ़ाई के बाद इस रूपरेखा को आगे बढ़ाइए।

वैज्ञानिकमुख्य कार्यक्षेत्रजैव विविधता के लिए महत्व
दिव्या मुदप्पापश्चिमी घाट की आनामलै पहाड़ियों में वर्षावन के टुकड़ों का पुनर्स्थापनदिखाया कि स्थानीय प्रजातियाँ लगाकर क्षतिग्रस्त वन पुन: बनाया जा सकता है, और टुकड़ों को जोड़कर धनेश तथा कस्तूरी बिलाव आ-जा सकें
उषा लाचुंगपासिक्किम के वन्य जीव और उच्च हिमालयी आवासदुर्लभ हिमालयी पक्षियों, पौधों और चरागाहों का प्रलेखन तथा स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर उनका संरक्षण
गज़ाला शाहबुद्दीनपक्षी, वन और वन में रहने वाले लोगअध्ययन करती हैं कि वनों का उपयोग और प्रबंधन पक्षी विविधता को कैसे प्रभावित करता है, और संरक्षण को वनवासियों के अधिकारों से जोड़ती हैं
नंदिनी वेलोहपूर्वी हिमालय, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश के संरक्षित क्षेत्रइस पर कार्य कि उद्यान कर्मी और स्थानीय लोग मिलकर संरक्षण को वास्तव में कैसे सफल बनाते हैं
विद्या अथ्रेयामानव बस्तियों के पास रहने वाले तेंदुएदिखाया कि तेंदुए मनुष्यों के साथ एक ही भूदृश्य में रह सकते हैं, जिससे भारत में मानव–वन्यजीव संघर्ष से निपटने का तरीका बदला
उमा रामाकृष्णनबाघ और अन्य भारतीय वन्य जीवों की आनुवंशिकीमल और बालों से प्राप्त डी.एन.ए. द्वारा गणना करती हैं और देखती हैं कि छोटी आबादियाँ एक-दूसरे से कट तो नहीं रहीं
दिव्या कर्नाडभारत के तटों की समुद्री जीव-सृष्टि, मत्स्यन और शार्कमछुआरा समुदायों के साथ मिलकर टिकाऊ मत्स्यन पर कार्य, ताकि समुद्री जैव विविधता और आजीविका दोनों बचें
सुझाव: हर वैज्ञानिक की अपनी संस्था या परियोजना की वेबसाइट तथा विश्वसनीय समाचार लेख काम में लीजिए। रिपोर्ट में अपने शब्दों में एक वाक्य अवश्य लिखिए कि उनका कार्य क्यों महत्वपूर्ण है — शिक्षक उसी वाक्य को सबसे ध्यान से पढ़ेंगे।
प्र3.
अपने विद्यालय में पौधों और वृक्षों को उनके स्थानीय नामों से चिह्नित करें। इसके लिए अपने शिक्षक अथवा माली की सहायता लें। अपनी नोटबुक में इन पेड़-पौधों की सूची बनाएँ।
उत्तर

विधि: शिक्षक या माली के साथ विद्यालय का चक्कर लगाइए। हर पौधे का पहले स्थानीय नाम पूछिए — माली प्राय: उसे सबसे अच्छा जानता है — फिर सामान्य नाम और यदि हो सके तो वैज्ञानिक नाम पता कीजिए। नाम-पट्टी मौसम-रोधी कार्ड या रंगे हुए लकड़ी के टुकड़े पर लिखकर तने से ढीला बाँधिए (कभी कील न ठोकें)।

नोटबुक की सूची में क्या हो:

क्रम सं.स्थानीय नामसामान्य नामशाक / झाड़ी / वृक्षविद्यालय में कहाँ हैकोई विशेष बात
1.आमआमवृक्षमुख्य द्वार के पासजालिकारूपी शिरा-विन्यास; मूसला जड़; वसंत में मंजरी
2.गुड़हलगुड़हलझाड़ीचारदीवारी की बाड़ के साथबड़े लाल फूल, पूजा में प्रयुक्त
3.तुलसीतुलसीशाककार्यालय के पास गमले मेंऔषधीय; पत्तियाँ सम्मुख जोड़ी में
4.नीमनीमवृक्षखेल के मैदान के कोने परकड़वी पत्तियाँ; कीटों से बचाव में प्रयुक्त
स्थानीय नाम अंकित करना क्यों आवश्यक है: स्थानीय नाम अपने साथ वह ज्ञान लाता है जो पाठ्यपुस्तक में नहीं होता — कौन-सा पौधा खाँसी में काम आता है, कौन वर्षा से पहले फूलता है, किसमें पक्षी घोंसला बनाते हैं। जब भी कोई स्थानीय नाम भुला दिया जाता है, उसके साथ यह ज्ञान भी चला जाता है।
प्र4.
अपने शिक्षक की सहायता से क्षेत्र-भ्रमण या प्रकृति की सैर की योजना बनाएँ। अपने अवलोकन अंकित करें। क्षेत्र-भ्रमण अथवा प्रकृति की सैर के दौरान सभी विद्यार्थियों के अवलोकनों और टिप्पणियों को मिलाकर कक्षा के लिए जैव विविधता रजिस्टर तैयार करें।
उत्तर

योजना कैसे बनाएँ:

  1. स्थान और तिथि शिक्षक के साथ तय कीजिए — उद्यान, तालाब, वन का कोई भाग या विद्यालय परिसर। प्रात:काल सर्वोत्तम है; तब पक्षी और कीट सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं।
  2. साथ रखिए नोटबुक, पेन, पानी की बोतल, हो सके तो आवर्धक लेंस, और अनुमति हो तो कैमरा।
  3. कार्य बाँट लीजिए। एक समूह वृक्ष, एक झाड़ी और शाक, एक पक्षी, एक कीट और एक शेष सब अंकित करे। न कुछ छूटेगा, न पाँच बार लिखा जाएगा।
  4. वहीं अंकित कीजिए: नाम (यदि पता हो तो स्थानीय), कहाँ दिखा, कितने, क्या कर रहा था, और कोई विशेष लक्षण। कुछ तोड़िए या छेड़िए मत — केवल गिरी हुई पत्तियाँ और फूल एकत्र कीजिए।
  5. कक्षा में लौटकर सभी समूहों की टिप्पणियाँ मिलाइए, दोहराव हटाइए और अंतिम रजिस्टर लिखिए।

कक्षा का जैव विविधता रजिस्टर ऐसा दिखना चाहिए:

क्रम सं.नाम (स्थानीय / सामान्य)पौधा या जंतुसमूहकहाँ दिखाअवलोकन
1.पीपलपौधावृक्ष, द्विबीजपत्रीतालाब के पासहृदयाकार पत्तियाँ; कोयल इसके फल खा रही थी
2.दूब घासपौधाशाक, एकबीजपत्रीपूरे मैदान मेंसमांतर शिरा-विन्यास; झकड़ा जड़ें मिट्टी बाँधे हुए
3.मैनाजंतुपक्षी, थलीयघास के मैदान परचलती भी है और उड़ती भी; आँख के पीछे पीला धब्बा
4.व्याध-पतंगजंतुकीटतालाब के ऊपरपंखों के दो जोड़े; हवा में ठहरकर तेज़ी से बढ़ती है
रजिस्टर केवल सूची क्यों नहीं है: यदि यही सैर अगले वर्ष और उसके अगले वर्ष दोहराई जाए, तो रजिस्टर परिवर्तन का अभिलेख बन जाता है। यदि गौरैया तीस से घटकर पाँच रह जाएँ या कोई नया पौधा दिखे, तो आपके विद्यालय के पास प्रमाण होगा। सालिम अली जैसे वैज्ञानिकों ने भारत के पक्षियों का प्रलेखन ठीक इसी तरह किया — एक-एक सावधान नोटबुक से।
प्र5.
हमारी जैव विविधता की रक्षा के लिए भारत में प्रारंभ की गई बाघ परियोजना (प्रोजेक्ट टाइगर) और इसी प्रकार की अन्य परियोजनाओं के बारे में पता करें। अपनी कक्षा के लिए एक प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) तैयार करें।
उत्तर

लगभग आठ स्लाइड की प्रस्तुति बनाइए। एक स्लाइड में एक विचार, चित्र और मानचित्र का उपयोग, और अंत में यह कि विद्यार्थी स्वयं क्या कर सकते हैं।

परियोजनाआरंभकिसकी रक्षा
बाघ परियोजना1973बंगाल बाघ की घटती संख्या — कॉर्बेट, कान्हा, रणथंभौर, बांदीपुर, सुंदरबन जैसे बाघ आरक्षित क्षेत्रों के माध्यम से
चीता पुनर्वास परियोजना2022चीते की संख्या की पुन:स्थापना — मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में
गोडावण के संरक्षित क्षेत्रगुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में गोडावण के आवासों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया
हाथी परियोजना1992हाथी, उनके गलियारे और आवास
मगरमच्छ संरक्षण परियोजना1975घड़ियाल, मगर और खारे जल का मगरमच्छ
जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र एवं रामसर आर्द्रभूमिपूरे आवास — नीलगिरि, सुंदरबन, नंदा देवी; चिल्का और केवलादेव जैसी आर्द्रभूमियाँ

सुझाई गई स्लाइड-क्रम: (1) जैव विविधता क्यों घट रही है — मानवीय गतिविधियों से आवास की क्षति। (2) बाघ परियोजना: 1973 ही क्यों, और बाघ आरक्षित क्षेत्र क्या है। (3) भारत के बाघ आरक्षित क्षेत्रों का मानचित्र। (4) बाघों की संख्या में परिवर्तन। (5) चीता पुनर्वास परियोजना, 2022। (6) गोडावण। (7) सामुदायिक संरक्षण — पवित्र उपवन और साइलेंट वैली बचाओ आंदोलन। (8) हम अपने विद्यालय में क्या कर सकते हैं।

इन सभी परियोजनाओं के पीछे का विचार: एक प्रसिद्ध जंतु को बचाने से पूरा आवास बच जाता है। बाघ के लिए आवश्यक वन की रक्षा कीजिए और उसी के साथ हिरण, पक्षी, कीट, वृक्ष और वहाँ से बहती नदी — सब स्वत: सुरक्षित हो जाते हैं।
प्र6.
अपनी कक्षा को छह-छह विद्यार्थियों के समूहों में बाँट लें। कक्षा में इस पर चर्चा आरंभ करें कि आप अपने आस-पास की जैव विविधता की रक्षा कैसे कर सकते हैं। सभी समूहों के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों को सम्मिलित करते हुए एक समूहवार रिपोर्ट तैयार करें।
उत्तर

चर्चा कैसे कराएँ: छह विद्यार्थियों के हर समूह को लगभग पंद्रह मिनट दीजिए। प्रत्येक सदस्य कम से कम एक सुझाव अवश्य दे; एक सदस्य सब लिखे; एक सदस्य कक्षा के सामने प्रस्तुत करे। फिर सभी समूहों की सूचियाँ मिलाकर एक कक्षा-चार्ट बनाइए और उन सुझावों पर निशान लगाइए जिन्हें विद्यालय इसी महीने आरंभ कर सकता है।

प्राय: आने वाले और सचमुच उपयोगी सुझाव:

कहाँहम क्या कर सकते हैं
विद्यालय मेंस्थानीय प्रजातियों के वृक्ष लगाना और सींचना; गरमी में पक्षियों के लिए जल-पात्र रखना; छोटी तितली वाटिका बनाना; पौधों पर नाम-पट्टी लगाना; समारोहों में थर्मोकोल और एकल-प्रयोग प्लास्टिक बंद करना
घर परकपड़े के थैले; कचरे का पृथक्करण; रसोई के कचरे से खाद; तुलसी या करी पत्ते का एक गमला; वन्य जंतुओं के अंगों से बनी वस्तुएँ कभी न ख़रीदना
मोहल्ले मेंतालाब और नालियाँ स्वच्छ रखना; झीलों के पास कूड़ा न फेंकना; स्थानीय उपवन या पुराने वृक्ष की रक्षा; वृक्ष कटाई और वनाग्नि की सूचना देना
जंतुओं के प्रतिघोंसले न छेड़ना, फूल न तोड़ना; जंगली पक्षियों को पालतू न बनाना; निराश्रित पशुओं के साथ करुणा; छत पर उथला जल-पात्र रखना
प्रचार-प्रसारभित्ति पत्रिका, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रतियोगिता, छोटी कक्षाओं के लिए संभाषण, विद्यालय में जैव विविधता दिवस
यहाँ समूह कार्य ही सही विधि क्यों है: छह विद्यार्थी कक्षा में छह भिन्न घर और छह भिन्न गलियाँ लेकर आते हैं। इससे बनी सूची किसी एक विद्यार्थी की सूची से कहीं अधिक समृद्ध होती है — और चूँकि सुझाव सबका है, इसलिए उत्तरदायित्व भी सब अनुभव करते हैं।
प्र7.
अपने परिवार या पड़ोस के वृद्धजनों से बातचीत कर विभिन्न प्रकार के ऐसे पौधों और जंतुओं के विषय में जानकारी प्राप्त करें जिन्हें वे वर्तमान में देखते हैं, परंतु पहले नहीं देखते थे अथवा जिनको वे पहले देखते थे पर अब नहीं देखते हैं। इन पौधों और जंतुओं के चित्र एकत्रित करें और उन्हें एक स्क्रैपबुक में चिपकाएँ।
उत्तर

विधि: तीन-चार वृद्धजनों से बात कीजिए। दो प्रश्न पूछिए — "आपके बचपन में कौन-से पौधे और जंतु दिखते थे जो अब नहीं दिखते?" और "आज कौन-से दिखते हैं जो पहले नहीं थे?" उनके उत्तर उन्हीं के शब्दों में लिखिए, फिर पुरानी पत्रिकाओं, समाचार पत्रों या प्रिंटआउट से चित्र एकत्र कर स्क्रैपबुक में शीर्षक सहित चिपकाइए।

पहले दिखते थे, अब कम दिखते हैंअब दिखते हैं, पहले नहीं थे
गौरैया, गिद्ध, जुगनू, मधुमक्खी, मेंढक, सियार, देशी गाय की नस्लें, देशी आम की किस्में, स्थानीय मोटे अनाज (कोदो, कुटकी)बड़ी संख्या में कबूतर, हर गली में कुत्ते और बिल्लियाँ, यूकेलिप्टस और सुबबूल के बागान, गाजर घास, जलकुंभी, संकर सब्ज़ियाँ, विदेशी सजावटी फूल
सूची दोनों दिशाओं में क्यों बदलती है: कुछ जीव इसलिए लुप्त होते हैं क्योंकि उनका आवास नष्ट हो गया — तालाब पाट दिए गए, पुराने घर कंक्रीट में बदल गए, खेतों में कीटनाशक छिड़का जाने लगा। दूसरे इसलिए बढ़ते या आते हैं क्योंकि नया परिवेश उन्हें रास आता है — कबूतर कंक्रीट की मुँडेरों पर सुख से घोंसला बनाते हैं और यूकेलिप्टस जैसे तेज़ बढ़ने वाले वृक्ष लोग स्वयं लगाते हैं। इसलिए बदलते आवास का अर्थ केवल "कम जंतु" नहीं है; अर्थ है भिन्न समुच्चय — और प्राय: छोटा तथा कम विविध।
सुझाव: वृद्धजन का नाम, आयु, वे किस गाँव या नगर की बात कर रहे हैं और लगभग कौन-से वर्ष की — यह सब अवश्य लिखिए। इनके बिना स्मृति केवल कहानी है; इनके साथ वह आँकड़ा बन जाती है जिससे आपका विद्यालय आगे तुलना कर सकेगा।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ