कुतूहल अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.1

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हम सभी प्रतिदिन आहार लेते हैं। आहार हमारे दैनिक जीवन का एक अनिवार्य घटक है। आपके द्वारा एक सप्ताह में प्रतिदिन खाए गए खाद्य पदार्थों के नाम को तालिका 3.1 में सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर

तालिका अपनी नोटबुक में बनाइए और सात दिन तक प्रतिदिन शाम को भरिए — सप्ताह के अंत में याद करके नहीं। प्रत्येक आहार लिखिए — प्रातःकाल का नाश्ता, दोपहर का भोजन, अल्पाहार और रात का भोजन; साथ ही दूध, चाय, फल और मिठाई भी।

नमूना उत्तर (मध्य भारत के एक घर का एक सप्ताह — आप वही लिखिए जो आपने वास्तव में खाया):
दिनखाद्य पदार्थ
सोमवारमूँगफली वाला पोहा, दूध; चावल, अरहर दाल, भिंडी की सब्जी, दही; केला; रोटी, आलू-मटर
मंगलवारपराठा और दही; चावल, राजमा, सलाद; अमरूद; खिचड़ी, पापड़
बुधवारइडली-साँभर, दूध; रोटी, पालक की सब्जी, दाल, छाछ; भुने चने; चावल, कढ़ी
गुरुवारउपमा, चाय; चावल, मूँग दाल, लौकी की सब्जी, दही; संतरा; रोटी, अंडा करी
शुक्रवारब्रेड-मक्खन, दूध; बाजरे की रोटी, सरसों का साग, गुड़; मूँगफली; चावल, दाल, टमाटर की सब्जी
शनिवारडोसा और नारियल की चटनी; चावल, साँभर, बीन्स की सब्जी; पपीता; रोटी, छोले
रविवारपूरी-सब्जी, दूध; चावल, पनीर/मछली की करी, सलाद; लड्डू; रोटी, मिली-जुली सब्जी
सुझाव: अपनी ओर से एक अतिरिक्त स्तंभ जोड़िए — यह कहाँ से आया? उसमें “घर में बना”, “बाज़ार से” या “पैकेट से” लिखिए। यही जानकारी क्रियाकलाप 3.9 और अनुभाग 3.6 (खाद्य मील) में फिर काम आएगी।
प्र2.
तालिका 3.1 में अंकित जानकारी के आधार पर अपने आहार के संबंध में आपको क्या विशेष बात ध्यान में आती है? क्या आप प्रत्येक आहार में एक ही प्रकार का खाना खाते हैं या अलग-अलग समय पर आपकी पसंद अलग-अलग होती है?
उत्तर

तालिका को केवल सूची की तरह नहीं, बल्कि प्रवृत्ति (पैटर्न) ढूँढ़ते हुए पढ़िए। ऊपर दी गई नमूना तालिका से—

  • एक वस्तु प्रतिदिन दोहराई जाती है — अनाज। चावल या रोटी प्रत्येक दोपहर और रात के भोजन में है। यही कार्बोहाइड्रेट अर्थात् ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
  • दाल या कोई दलहन भी लगभग प्रतिदिन है, परंतु दाल बदलती रहती है — अरहर, राजमा, मूँग, चना। यह प्रोटीन का मुख्य स्रोत है।
  • सब्जी सबसे अधिक बदलती है — भिंडी, पालक, लौकी, बीन्स, टमाटर। सब्जियाँ विटामिन, खनिज और रूक्षांश देती हैं, इसलिए इन्हें बदलते रहना अच्छी आदत है।
  • नाश्ता क्षेत्र और दिन के अनुसार बदलता है — पोहा, इडली, उपमा, पराठा, डोसा।
  • फल, दही और दूध कुछ दिन ही आते हैं तथा मिठाई कभी-कभी।

अतः उत्तर यह है कि पसंद बदलती तो है, पर एक निश्चित आधार के आस-पास। आधार (अनाज + दाल + सब्जी) वही रहता है; केवल व्यंजन बदलते हैं।

यह महत्वपूर्ण क्यों है: यदि प्रत्येक आहार में वही कुछ वस्तुएँ दोहराई जाएँ तो कोई-न-कोई पोषक तत्व अवश्य छूट जाएगा। विविधता ही सबसे सरल उपाय है जिससे सभी खाद्य घटक शरीर तक पहुँचें — यही अनुभाग 3.4 के संतुलित आहार का विचार है।
प्र3.
अपनी सूची की तुलना अपने मित्रों के द्वारा बनाई गई सूची से कीजिए। तालिका में आप और आपके मित्रों द्वारा अंकित किए गए आहार में समानता एवं अंतर ढूँढ़ें। तालिका का अवलोकन करने पर आप क्या पाते हैं, उसे अपनी नोटबुक में अंकित करें।
उत्तर

नोटबुक में तीन स्तंभ बनाइए — सबमें समान | कुछ मित्रों में | केवल एक मित्र में

समानताएँअंतर
प्रत्येक मुख्य आहार में कोई-न-कोई अनाज (चावल, गेहूँ या मिलेट) अवश्य हैकिसी के यहाँ दोनों समय चावल, किसी के यहाँ दोनों समय रोटी
लगभग सभी कोई दाल या दलहन खाते हैंकहीं अरहर की दाल, कहीं साँभर, कहीं कढ़ी
सभी दूध, चाय, छाछ या जल लेते हैंकहीं लस्सी-छाछ, कहीं फिल्टर कॉफी, कहीं बिना दूध की चाय
प्रत्येक सूची में साग-भाजी और फल हैंकुछ परिवार अंडा, मछली या मांस लेते हैं, कुछ पूर्णतः शाकाहारी हैं
सभी कोई अल्पाहार या मीठा खाते हैंतिल के लड्डू, पूरन पोली, पीठा, गुड़-चना — मिठाई क्षेत्र के अनुसार

मैंने यह पाया: आहार का प्रकार (अनाज, दाल, सब्जी, पेय) प्रत्येक सूची में समान है, केवल व्यंजन भिन्न है। अर्थात् हम सब वही खाद्य घटक लेते हैं, बस उनका रूप अलग-अलग होता है।

अंतर क्यों आते हैं: ये अंतर घर के पास उगने वाली फसलों, परिवार की परंपरा और स्वाद, ऋतु तथा उपलब्धता से आते हैं — इससे नहीं कि किसी के शरीर को अलग पोषक तत्व चाहिए। हम सबके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व एक ही हैं।
प्र4.
क्या आपको लगता है कि हमारे देश के सभी राज्यों के आहार में ऐसी विविधता पाई जाती है?
उत्तर

हाँ — और यह विविधता एक कक्षा की तुलना में राज्यों के बीच कहीं अधिक है। भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ विविध प्रकार की मृदा और जलवायु है, इसलिए प्रत्येक क्षेत्र में भिन्न फसलें उगती हैं और वहीं के व्यंजन बने हैं।

क्षेत्रमुख्य फसलप्रतिदिन का व्यंजन
पंजाब और हरियाणागेहूँ, मक्का, चनामक्के की रोटी–सरसों का साग, लस्सी
राजस्थानबाजरा, मोठ, चनाबाजरे की रोटी, दाल-बाटी-चूरमा, केर-सांगरी
पश्चिम बंगाल और ओडिशाचावल, नदी-तालाब की मछलीभात के साथ मछली की तरी, पखाल
कर्नाटक और तमिलनाडुचावल, रागी, नारियल, उड़दरागी मुड्डे, इडली, डोसा, साँभर, रसम
मणिपुर और पूर्वोत्तरचावल, बाँस, सोयाबीनइरोम्बा, सिंगजू, कांगसोई, बिना दूध की चाय
गुजरात और महाराष्ट्रज्वार, बाजरा, मूँगफलीथेपला, खिचड़ी-कढ़ी, ज्वार की भाकरी, पिठला
ऐसा क्यों होता है: फसलें वहीं उगती हैं जहाँ की मृदा और जलवायु उनके अनुकूल हो, और पहले के समय में आहार दूर तक नहीं भेजा जा सकता था। वर्षा वाले तटों पर नारियल उगता है, इसलिए वहाँ नारियल तेल और चटनी है; बाजरा बहुत कम जल में भी हो जाता है, इसलिए वह राजस्थान के सूखे जिलों का आहार बना।
क्या आप जानते हैं? एक ही अनाज का नाम और रूप प्रत्येक राज्य में बदल जाता है — कर्नाटक की रागी उत्तराखंड में मंडुआ और महाराष्ट्र में नाचणी कहलाती है, और वह मुड्डे, रोटी या दलिया बन जाती है।
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