कुतूहल अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.2

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
भारत के विभिन्न राज्यों में पारंपरिक रूप से खाए जाने वाले आहार और उगाई जाने वाली फसलों के प्रकारों का पता लगाइए। अन्य राज्यों के बारे में जानकारी एकत्रित करें और उसे तालिका 3.2 में भरें।
उत्तर

जानकारी राज्य-दर-राज्य एकत्रित कीजिए और तीनों स्तंभ साथ-साथ भरिए — उगाई जाने वाली फसलें, पारंपरिक व्यंजन, पेय — क्योंकि दूसरा और तीसरा स्तंभ पहले से ही निकलता है।

राज्यस्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली फसलेंखाए जाने वाले कुछ पारंपरिक खाद्य पदार्थपेय
पंजाब (दिया हुआ)मक्का, गेहूँ, चना, दालेंमक्के की रोटी, सरसों का साग, छोले-भटूरे, पराठा, हलवा, खीरलस्सी, छाछ, दूध, चाय
कर्नाटक (दिया हुआ)चावल, रागी, उड़द, नारियलइडली, डोसा, साँभर, नारियल चटनी, रागी मुड्डे, पाल्या, रसम, चावलछाछ, कॉफी, चाय
मणिपुर (दिया हुआ)चावल, बाँस, सोयाबीनचावल, इरोम्बा (चटनी), ऊति, सिंगजू, कांगसोईबिना दूध की चाय
राजस्थानबाजरा, ज्वार, मोठ, चनाबाजरे की रोटी, दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, केर-सांगरीछाछ, जल-जीरा
पश्चिम बंगालचावल, जूट, सरसों, मछलीभात, मछली की तरी, शुक्तो, पीठे, मिष्टी दोईचाय, आम पोड़ा शरबत
गुजरातमूँगफली, बाजरा, ज्वार, कपासढोकला, थेपला, खिचड़ी-कढ़ी, ऊंधियूछास, चाय
केरलचावल, नारियल, केला, मसालेपुट्टु-कडला, अप्पम, अवियल, सद्यासंभारम, नारियल पानी, कॉफी
उत्तराखंडमंडुआ (रागी), झंगोरा, गहतमंडुए की रोटी, झंगोरे की खीर, गहत की दाल, कफुलीबुरांश का शरबत, चाय
असमचावल, सरसों, चाय, बाँसभात के साथ मासोर टेंगा, खार, पीठाअसम की चाय
जानकारी कैसे एकत्र करें: दूसरे राज्य से आए किसी पड़ोसी या दादा-दादी से कुछ निश्चित प्रश्न पूछिए — “आप प्रतिदिन कौन-सा अनाज खाते हैं? हर त्योहार पर कौन-सा व्यंजन बनता है? भोजन के साथ क्या पीते हैं?” उत्तर उन्हीं के शब्दों में लिखिए और राज्य का नाम अवश्य अंकित कीजिए। यही वास्तविक आँकड़ा संग्रहण है।
प्र2.
क्या हमें देश के विभिन्न राज्यों में खाए जाने वाले पारंपरिक आहार में विविधता दिखाई देती है? ऐसा क्यों है?
उत्तर

हाँ, स्पष्ट विविधता दिखाई देती है — क्योंकि किसी राज्य का पारंपरिक आहार वहाँ उगाई जाने वाली फसलों पर आधारित होता है और भारत के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न फसलें उगती हैं।

इसके चार कारण साथ-साथ कार्य करते हैं—

  1. मृदा और जलवायु। भारत में विविध प्रकार की मृदा और जलवायु है। चावल को अधिक जल चाहिए, इसलिए वह पूर्व और दक्षिण में होता है; गेहूँ ठंडे उत्तर में; बाजरा और ज्वार शुष्क पश्चिम में।
  2. वहाँ की जाने वाली खेती। पास में उगा आहार ताजा, सस्ता और सदैव उपलब्ध रहता है, इसलिए पाक-कला उसी के चारों ओर बनी — केरल में नारियल, पंजाब-बंगाल में सरसों, पूर्वोत्तर में बाँस की कोंपल।
  3. स्वाद प्राथमिकताएँ। वही दाल गुजरात में कुछ मीठी, दक्षिण में इमली से खट्टी और पूर्व में सरसों के छौंक के साथ बनती है।
  4. संस्कृति और परंपराएँ। त्योहार, व्रत और पारिवारिक विधियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती हैं — मकर संक्रांति के तिल के लड्डू, असम-ओडिशा का पीठा, महाराष्ट्र का मोदक।
एक वाक्य में उत्तर: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आहारीय प्रवृत्तियाँ उस विशेष क्षेत्र में की जाने वाली खाद्य फसलों की खेती, स्वाद प्राथमिकताओं, संस्कृति और परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
प्र3.
तालिका 3.2 में आपके द्वारा एकत्रित की गई जानकारी का विश्लेषण कीजिए। क्या इसमें ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जो कई राज्यों में खाए जाते हैं? उन खाद्य पदार्थों की एक सूची बनाइए।
उत्तर

हाँ। राज्यों की तुलना करने पर कुछ पदार्थ बार-बार आते हैं, जबकि कुछ केवल एक ही स्थान के हैं।

अनेक राज्यों में समानप्रायः किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित
चावल और गेहूँ (रोटी)रागी मुड्डे — कर्नाटक
किसी-न-किसी प्रकार की दालइरोम्बा, सिंगजू — मणिपुर
दूध, दही और छाछ (लस्सी, छाछ, छास, संभारम)दाल-बाटी-चूरमा — राजस्थान
चायपुट्टु और अप्पम — केरल
आलू, प्याज, टमाटर और हरी साग-भाजीमछली की तरी — पश्चिम बंगाल
खीर या दूध-अनाज से बनी कोई मिठाईऊंधियू — गुजरात
कुछ पदार्थ सर्वत्र क्यों हैं: चावल, गेहूँ, दाल, दूध और चाय या तो लगभग पूरे देश में उगते हैं या सरलता से ले जाए और संचित किए जा सकते हैं। इरोम्बा जैसे व्यंजन के लिए ताजी बाँस की कोंपल चाहिए, जो दूर नहीं भेजी जा सकती — इसलिए वह वहीं रह जाता है।
प्र4.
आप पारंपरिक खाद्य पदार्थों और स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली फसलों के मध्य क्या संबंध पाते हैं?
उत्तर

किसी राज्य का पारंपरिक आहार सामान्यतः वहाँ उगाई जाने वाली फसलों पर ही आधारित होता है। तालिका 3.2 की कोई भी पंक्ति देखिए — व्यंजन वहाँ की फसल का ही पका हुआ रूप है।

पंजाब में मक्का → मक्के की रोटी
कर्नाटक में रागी → रागी मुड्डे
मणिपुर में बाँस और चावल → इरोम्बा और कांगसोई
राजस्थान में बाजरा → बाजरे की रोटी
केरल में नारियल → नारियल की चटनी और अवियल
वहाँ पाले गए पशुओं का दूध → लस्सी, छाछ, मिष्टी दोई
यह संबंध इतना गहरा क्यों है: पहले के समय में न ट्रक थे, न शीत भंडारण, न बड़े बाज़ार। परिवार वही पका सकता था जो आस-पास उगता हो और घर में संचित हो सके। सैकड़ों वर्षों में उन्हीं थोड़ी-सी फसलों को पकाने के सर्वोत्तम ढंग उस क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजन बन गए।
परीक्षा के लिए सुझाव: यदि प्रश्न में कोई राज्य देकर उसका आहार पूछा जाए, तो पहले सोचिए — “वहाँ उगता क्या है?” व्यंजन प्रायः फसल के पीछे-पीछे आता है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ