कुतूहल अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.3

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या समय के साथ खान-पान की आदतें और भोजन पकाने की पद्धतियाँ परिवर्तित हो गई हैं?
उत्तर

हाँ, दोनों में बहुत परिवर्तन हुआ है — और सबसे तेज़ परिवर्तन पिछले पचास वर्षों में आया है।

  • खान-पान की आदतें: पहले परिवार प्रायः वही खाते थे जो आस-पास उगता था और जो ऋतु के अनुसार मिलता था। आज दिल्ली के घर में इडली और चेन्नई के घर में राजमा बनता है, तथा हर ऋतु के फल पूरे वर्ष मिलते हैं।
  • पाक पद्धतियाँ: ईंधन, बर्तन और उपकरण — सब बदल गए। चूल्हे से गैस चूल्हा, सिल-बट्टे से इलैक्ट्रिक ग्राइंडर, मिट्टी की हाँडी से प्रेशर कुकर।
  • समय: जिस भोजन में घंटों लगते थे, वह अब मिनटों में बन जाता है।
यह कीजिए: घर में पूछिए कि कौन-सा एक व्यंजन आज भी ठीक वैसे ही बनता है जैसे परदादी बनाती थीं। प्रायः वह कोई त्योहार का व्यंजन होगा — और यही संकेत है कि कौन-सी पद्धतियाँ धीरे बदलती हैं।
प्र2.
अपने वयोवृद्ध जनों से उनके खान-पान की आदतों और भोजन बनाने की पद्धतियों के बारे में जानकारी एकत्रित करने के लिए प्रश्नों की सूची तैयार कीजिए। तैयार किए गए प्रश्नों के आधार पर कुछ वयोवृद्ध जनों का साक्षात्कार लें।
उत्तर

प्रश्न पहले से तैयार कीजिए, छोटे रखिए और उत्तर उसी समय लिख लीजिए। पुस्तक में दिए तीन नमूना प्रश्नों के साथ अपने प्रश्न भी जोड़िए।

पुस्तक के नमूना प्रश्न:

  • किस प्रकार का खाना आप अभी भी खाते हैं और क्या नया खाने लगे हैं?
  • पिछले कुछ वर्षों में खाना पकाने की पद्धतियाँ किस प्रकार परिवर्तित हो गई हैं?
  • खान-पान संबंधी ये बदलाव किस कारण हुए हैं?

आप ये प्रश्न और जोड़ सकते हैं:

  1. जब आप मेरी आयु के थे, तब भोजन किस पर पकता था — चूल्हा, अंगीठी, स्टोव या गैस?
  2. ईंधन क्या होता था — लकड़ी, उपले, कोयला या मिट्टी का तेल?
  3. मसाले कैसे पीसे जाते थे और उसमें कितना समय लगता था?
  4. साग-भाजी और अनाज कहाँ से आते थे — अपने खेत से, दुकान से या साप्ताहिक हाट से?
  5. रेफ्रिजरेटर के बिना भोजन ताजा कैसे रखा जाता था?
  6. कौन-सा व्यंजन केवल किसी एक ऋतु में बनता था और क्यों?
  7. वह कौन-सा आहार है जो आप प्रतिदिन खाते थे और अब कम बनता है?
  8. क्या आपको लगता है कि पहले का आहार अधिक स्वास्थ्यप्रद था? क्यों?
साक्षात्कार कैसे लें: पहले अनुमति लीजिए, कम से कम दो व्यक्तियों से बात कीजिए, बीच में न टोकिए और अंत में लिखा हुआ उन्हें पढ़कर सुनाइए कि आपने ठीक लिखा है या नहीं। फिर व्यक्ति का नाम, आयु और गाँव/नगर लिखकर आधे पृष्ठ की रिपोर्ट बनाइए।
प्र3.
आपके द्वारा लिए गए साक्षात्कारों से क्या ज्ञात हुआ?
उत्तर

निष्कर्ष तुलना के रूप में लिखिए, क्योंकि इसी से परिवर्तन स्पष्ट दिखता है।

 पहले (वयोवृद्ध जनों के अनुसार)अब
चूल्हालकड़ी या उपलों का पारंपरिक चूल्हागैस चूल्हा, इंडक्शन
पीसनासिल-बट्टा और हाथ की चक्की, प्रतिदिन सुबहइलैक्ट्रिक मिक्सी; पैकेट का मसाला
बर्तनमिट्टी की हाँडी, लोहे की कड़ाही, धीमी आँचप्रेशर कुकर, नॉन-स्टिक तवा, माइक्रोवेव
आहार कहाँ सेअपना खेत, घर की बाड़ी, साप्ताहिक हाटदुकान, सुपर बाज़ार, घर तक आपूर्ति
संचयनअचार, धूप में सुखाना, अनाज की कोठीरेफ्रिजरेटर, बंद पैकेट
क्या खाया जाता थामिलेट, मोटे अनाज, ऋतु की साग-भाजीपॉलिश किया चावल, मैदा, पैकेटबंद अल्पाहार; मिलेट अब लौट रहे हैं
एक वाक्य में निष्कर्ष: भोजन पकाना बहुत सरल और तेज़ हो गया है, परंतु पुरानी समझ का एक भाग — मिलेट, ऋतु की साग-भाजी, ताजा पिसा मसाला — फिर से अपनाया जा रहा है, क्योंकि वह अधिक स्वास्थ्यप्रद था।
प्र4.
भोजन पकाने और पीसने की अन्य विधियों का पता लगाइए।
उत्तर

चित्र 3.1 में दिखाए गए चूल्हे और सिल-बट्टे के अतिरिक्त और भी अनेक साधन प्रयोग होते थे — इनमें से कई आज भी भारतीय घरों में हैं।

कार्यपारंपरिक साधनकैसे काम करता था
पकानाअंगीठी / सिगड़ीकोयले पर धीमी आँच; ठंड में गर्मी भी देती थी
तंदूरलकड़ी से गर्म की गई मिट्टी की भट्ठी; रोटी भीतरी दीवार पर चिपकाई जाती है
भट्ठी और मिट्टी की हाँडीढक्कन बंद करके धीमी आँच पर दम पर पकाना
पत्तों में भाप से पकानाकेले या हल्दी के पत्तों में लपेटकर — पातरा, पतोली, पीठा
पीसना और कूटनाचक्की (दो पाटों की)ऊपरी पाट घुमाकर अनाज का आटा बनाया जाता था
ओखली और मूसलधान कूटकर भूसी अलग करना, मसाले कूटना
अम्मी कल / अट्टुकल (दक्षिण भारत)इडली-डोसे का घोल और चटनी पीसने का चपटा पत्थर
कोल्हू (घानी)बैल से चलने वाला यंत्र, जिससे सरसों, तिल या मूँगफली से तेल निकाला जाता था
क्या आप जानते हैं? लकड़ी की आँच पर पकाने से जो सोंधा स्वाद आता है, वह गैस चूल्हे पर नहीं आता — इसीलिए तंदूरी रोटी और भट्ठी की दाल आज भी ढाबों में पुराने ढंग से ही बनती है।
प्र5.
समय के साथ पाक पद्धतियों में ये परिवर्तन क्यों हुए हैं?
उत्तर

पुस्तक तीन प्रमुख कारण बताती है, और तीनों किसी भी भारतीय नगर में देखे जा सकते हैं।

  1. तकनीकी विकास। गैस कनेक्शन, इलैक्ट्रिक ग्राइंडर, प्रेशर कुकर और रेफ्रिजरेटर बने और सुलभ हुए। जिस काम में एक घंटा लगता था वह अब पाँच मिनट में होता है।
  2. बेहतर परिवहन। ट्रक, रेल और शीत भंडारण हिमाचल के सेब कन्याकुमारी तक और तट की मछली भीतरी नगरों तक पहुँचाते हैं, इसलिए लोग वे वस्तुएँ भी पकाते हैं जो उनके पास कभी नहीं उगती थीं।
  3. बेहतर संचार। दूरदर्शन, मोबाइल और इंटरनेट से व्यंजन-विधियाँ पूरे देश में फैलती हैं — अब बिहार के घर में डोसा और केरल के घर में छोले बनते हैं।

वयोवृद्ध जन दो कारण और बताएँगे—

  • समय की कमी — जब माता-पिता दोनों बाहर काम करते हैं तो जल्दी बनने वाला भोजन ही चुना जाता है।
  • धुआँरहित रसोई — गैस चूल्हे से रसोई में धुआँ नहीं भरता, जो स्वास्थ्य के लिए कहीं अच्छा है।
जो नहीं बदला: शरीर की आवश्यकता। चूल्हा कोई भी हो, आहार को कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज, रूक्षांश और जल तो देना ही होगा।
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