प्र1.
क्रियाकलाप 3.5 में मंड की उपस्थिति का पता लगाने के लिए आपने जिन खाद्य पदार्थों का परीक्षण किया था, उन्हीं की छोटी-सी मात्रा लें। प्रत्येक खाद्य पदार्थ के एक छोटे भाग को कागज के अलग-अलग टुकड़ों पर रखें। खाद्य पदार्थ पर कागज को लपेटें और उसे दबाएँ। यदि खाद्य पदार्थ में कुछ पानी है, तो कागज को सूखने दें। क्या कागज पर किसी प्रकार का तैलीय धब्बा बन जाता है? आपके अनुसार इस तैलीय धब्बे के आने का कारण क्या है?
उत्तर
हाँ, कुछ पदार्थ तैलीय धब्बा छोड़ते हैं — और इसका कारण उनमें उपस्थित वसा है।
एक पंक्ति में परीक्षण: अभिकर्मक — कोई नहीं, केवल सादा कागज; परिणाम — चिकना, पारभासी धब्बा जो सूखने पर भी नहीं जाता।
| क्या होता है | |
|---|---|
| धनात्मक परिणाम | स्थायी तैलीय धब्बा बनता है; वहाँ कागज गहरा और अर्धपारदर्शी दिखता है → वसा उपस्थित है |
| ऋणात्मक परिणाम | कागज गीला भले हो जाए, सूखने पर पूरी तरह साफ और अपारदर्शी हो जाता है → वसा अनुपस्थित है |
धब्बा क्यों बनता है: दबाने पर आहार में से थोड़ी वसा (तेल, घी या मक्खन) निकलकर कागज में समा जाती है। वसा जल की भाँति वाष्पित नहीं होती, इसलिए कागज सूख जाने पर भी धब्बा बना रहता है।
कागज को सुखाना क्यों आवश्यक है: खीरे जैसे जलयुक्त पदार्थ से भी कागज गीला और गहरा दिखता है, जिसे वसा समझ लेने की भूल हो सकती है। जल कुछ ही मिनटों में उड़ जाता है और कागज साफ हो जाता है, जबकि तैलीय धब्बा नहीं जाता। सुखाना ही इस परीक्षण को निष्पक्ष बनाता है।