कुतूहल अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.8

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने क्रियाकलाप 3.1 में एक सप्ताह में आपके द्वारा उपभोग किए गए खाद्य पदार्थों की एक तालिका तैयार की है। यह जाँचें कि आपके आहार में वृद्धि और विकास के लिए अनिवार्य सभी पोषक और अन्य आवश्यक घटक सम्मिलित हैं या नहीं। यदि नहीं, तो जाँचें कि कौन से पोषक तत्वों अथवा अन्य घटकों को इसमें सम्मिलित करने की आवश्यकता है।
उत्तर

अपनी सप्ताह वाली तालिका लीजिए और दिन-प्रतिदिन प्रत्येक घटक पर सही का निशान लगाइए। जो पंक्ति खाली रह जाए, वही कमी है।

घटककिस आहार से मिलापर्याप्त?
कार्बोहाइड्रेटचावल, रोटी, पोहा, आलू — प्रतिदिनहाँ, कभी-कभी आवश्यकता से भी अधिक
प्रोटीनदाल, राजमा, दही, दूध — सात में से पाँच दिनलगभग; शेष दो दिन दूध या दाल जोड़िए
वसाखाने का तेल, मूँगफली, मक्खनहाँ
विटामिनफल केवल तीन दिन; हरी सब्जी चार दिननहीं — प्रतिदिन एक फल जोड़िए
खनिजदूध, आयोडीनयुक्त नमक, हरी सागआयरन कम है — पालक, चुकंदर, गुड़ जोड़िए
रूक्षांशसब्जियाँ तो हैं, पर कच्चा सलाद और साबुत अनाज बहुत कमनहीं — सलाद और साबुत अनाज जोड़िए
जलजल, छाछ, दूधहाँ, यदि प्रतिदिन 6–8 गिलास हो
नमूना निष्कर्ष: मेरे आहार में ऊर्जा देने वाले पदार्थ पर्याप्त हैं, पर फल, कच्ची साग-भाजी और आयरन कम हैं। मुझे प्रतिदिन एक ऋतु-फल, दोपहर के भोजन के साथ सलाद और सप्ताह में दो बार हरी पत्तेदार साग जोड़नी चाहिए।
लिखकर देखना क्यों आवश्यक है: हर कोई मानता है कि उसका आहार ठीक है। सात दिन का लिखा हुआ ब्योरा इस विश्वास को प्रमाण में बदल देता है — और तब कमियाँ छिप नहीं पातीं।
प्र2.
ऐसा आहार जिसमें शरीर की समुचित वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व, रूक्षांश और जल सही मात्रा में हों, उसे संतुलित आहार कहते हैं। अपने आहार को संतुलित आहार बनाने के लिए आप उसमें क्या परिवर्तन करेंगे?
उत्तर

पहले परिभाषा: संतुलित आहार वह आहार है जिसमें शरीर की समुचित वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व, रूक्षांश और जल सही मात्रा में हों।

मैं ये परिवर्तन करूँगा/करूँगी—

  1. प्रतिदिन एक ऋतु-फल — अमरूद, केला, संतरा या पपीता — विटामिन और रेशों के लिए।
  2. दोपहर के भोजन के साथ खीरा, टमाटर, गाजर और प्याज का कच्चा सलाद
  3. प्रतिदिन दाल, राजमा, चना या दूध — प्रोटीन के लिए।
  4. कुछ पॉलिश किए चावल और मैदा के स्थान पर साबुत अनाज और मिलेट — बाजरा, ज्वार, रागी की रोटी।
  5. आयोडीनयुक्त नमक का प्रयोग, और वह भी पकाने के बाद डालना।
  6. जंक फूड — चिप्स, टॉफी और ठंडे पेय — कभी-कभार ही।
  7. दिन भर पर्याप्त जल, और गर्मियों में छाछ।
  8. साग-भाजी को अधिक न पकाना और धोकर ही काटना।
एक संतुलित भारतीय थालीक्या देती है
रोटी या चावल (या बाजरे की रोटी)कार्बोहाइड्रेट — ऊर्जा
दाल, राजमा या अंडाप्रोटीन — वृद्धि और मरम्मत
एक पकी सब्जी + कच्चा सलादविटामिन, खनिज, रूक्षांश
दही या एक गिलास दूधप्रोटीन और कैल्सियम
थोड़ा घी या तेल, और एक फलवसा तथा विटामिन C
जलपोषक तत्वों का अवशोषण और अपशिष्ट का निष्कासन
थाली स्वयं संतुलित क्यों है: पारंपरिक भारतीय थाली पोषक तत्वों की खोज से बहुत पहले बनी थी, फिर भी उसमें अनाज, दाल, सब्जी, दही और थोड़ी वसा एक ही थाली में हैं। विज्ञान ने बाद में केवल यह बताया कि यह संयोजन काम क्यों करता है।
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