निष्कर्ष: नाविकों के मसूड़ों से रक्त आना और उनमें सूजन समुद्र या कठिन परिश्रम के कारण नहीं, बल्कि आहार में किसी वस्तु की कमी के कारण था। लंबी यात्राओं में नाविक केवल सूखा, संचित आहार खाते थे और ताजे फल नहीं मिलते थे। 1746 में जेम्स लिंड ने देखा कि जिन नाविकों ने नींबू और संतरे खाए, वे रोग से मुक्त हो गए — इससे सिद्ध हुआ कि जो वस्तु कम पड़ रही थी वह इन फलों में है।
लंबी यात्रा → ताजे फल नहीं → विटामिन C की कमी → मसूड़ों से रक्त और सूजन → स्कर्वी
नींबू और संतरे खाए गए → विटामिन C मिला → नाविक स्वस्थ हो गए
स्कर्वी कैसे ठीक हुआ: विटामिन C से। स्कर्वी रोग विटामिन C की कमी के कारण होता है; नींबू और संतरे जैसे खट्टे फलों में यह विटामिन पाया जाता है, इसलिए वे इस रोग को दूर करने में सहायक हैं। आँवला, अमरूद और हरी मिर्च तो और भी अच्छे भारतीय स्रोत हैं।
अध्ययन 1 का बड़ा विचार: यह अध्याय का पहला संकेत है कि रोग किसी संक्रमण से नहीं, किसी वस्तु की कमी से भी हो सकता है। ऐसे रोगों को अभावजन्य रोग कहते हैं और इनका उपचार औषधि नहीं, आहार है।
क्या आप जानते हैं? लिंड का यह कार्य वैज्ञानिक विधि का सुंदर उदाहरण भी है — उन्होंने अवलोकन किया, प्रश्न बनाया, अनुमान लगाया, नाविकों पर परीक्षण किया और परिणाम का विश्लेषण किया, जबकि तब विटामिन के बारे में कोई नहीं जानता था।