हाँ। छोड़ते ही रबड़ फ़र्श तक सीधे नीचे एक ऊर्ध्वाधर रेखा के अनुदिश गिरती है। उसका पथ सरल रेखा है, अतः यह सरल रेखीय गति है।
जब कोई वस्तु सरल रेखा के अनुदिश गति करती है,
तो उसकी गति को सरल रेखीय गति कहते हैं।
ध्यान से क्या देखें: रबड़ को स्थिर पकड़िए, फिर केवल अँगुलियाँ खोल दीजिए — उसे बगल में फेंकिए नहीं। पथ को बगल से देखिए। वह सीधे नीचे जाती है और छोड़े गए बिंदु के ठीक नीचे गिरती है।
वह सीधी क्यों गिरती है: पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को सीधे अपने केंद्र की ओर खींचती है। यदि रबड़ को बगल से कोई धक्का नहीं मिला तो उसके दाएँ-बाएँ हटने का कोई कारण नहीं, अतः पथ ऊर्ध्वाधर सरल रेखा ही रहता है। (ध्यान दीजिए कि गिरते समय चाल बढ़ती है — परंतु गति का प्रकार पथ के आकार से तय होता है, चाल से नहीं।)
यह करके देखिए: एक रबड़ छोड़िए और ठीक उसी क्षण उसी ऊँचाई से दूसरी रबड़ बगल की ओर फेंकिए। छोड़ी गई रबड़ सरल रेखा में चलती है; फेंकी गई रबड़ वक्र पथ पर। केवल पहली ही सरल रेखीय गति है।