कुतूहल अध्याय 5 क्रियाकलाप 5.4

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक धागे के एक छोर पर एक रबड़ या एक आलू बाँधिए। इसके दूसरे छोर को हाथ से पकड़िए तथा इसे चित्र 5.15 की तरह घुमाइए। इसकी गति का अवलोकन कीजिए। क्या रबड़ की गति घूमने वाले हिंडोले की गति के समान है?
उत्तर

हाँ — दोनों एक ही प्रकार की गति हैं। रबड़ वृत्तीय पथ के अनुदिश गोल-गोल घूमती है, और हिंडोले पर बैठा बच्चा भी। दोनों वृत्तीय गति के उदाहरण हैं।

जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ के अनुदिश गति करती है,
तब उसकी गति वृत्तीय गति कहलाती है।
घुमाई जाती रबड़घूमने वाला हिंडोला
वृत्त का केंद्रआपका हाथकेंद्रीय खंभा
वृत्त पर कौन रोके रखता हैधागा उसे भीतर की ओर खींचता हैधातु की भुजाएँ सीट को भीतर की ओर खींचती हैं
केंद्र से दूरीसदैव समान (धागे की लंबाई)सदैव समान (भुजा की लंबाई)
बना पथवृत्त, बार-बार दोहराया हुआवृत्त, बार-बार दोहराया हुआ
वृत्तीय गति की मुख्य पहचान: गतिशील वस्तु किसी एक नियत बिंदु से नियत दूरी पर बनी रहती है। धागा मापिए — मान लीजिए 40 cm — तो घुमाव के प्रत्येक क्षण रबड़ आपके हाथ से 40 cm दूर है। यही बात पथ को वृत्त बनाती है।
स्वयं जाँचिए: घुमाते-घुमाते धागा छोड़ दीजिए (यह खुले मैदान में, लोगों और खिड़कियों से दूर कीजिए)। रबड़ सरल रेखा में उड़ जाती है, वृत्त में नहीं — यही प्रमाण है कि अब तक धागे का खिंचाव ही उसके पथ को वृत्त में मोड़ रहा था।
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