प्र1.
एक धागे के एक छोर पर एक रबड़ या एक आलू बाँधिए। धागे का दूसरा छोर पकड़कर रबड़ को (चित्र 5.16) लटकाइए। अपना हाथ स्थिर रखिए। दूसरे हाथ का उपयोग करते हुए धीरे से रबड़ को एक ओर ले जाइए और फिर छोड़ दीजिए। क्या यह एक माध्य स्थिति के इधर-उधर गति करता है? क्या इसकी गति झूले की गति के समान है?
उत्तर
दोनों का उत्तर हाँ है। रबड़ निम्नतम स्थिति के इधर-उधर झूलती है, और उसकी गति पार्क के झूले जैसी ही है। यह दोलन-गति है।
जब कोई वस्तु किसी नियत स्थिति के इधर-उधर गति करती है,
तब उसकी गति दोलन-गति कहलाती है।
तब उसकी गति दोलन-गति कहलाती है।
आप क्या देखेंगे:
- रबड़ हर बार उसी निम्नतम बिंदु से होकर गुजरती है — वही वह नियत स्थिति है जिसके इधर-उधर वह दोलन करती है।
- वह अपना पथ बार-बार दोहराती है: दाएँ, निम्नतम बिंदु, बाएँ, निम्नतम बिंदु, दाएँ…
- प्रत्येक पूरा इधर-उधर का चक्कर समान समय लेता है, अतः यह गति आवर्ती भी है।
- झूलना धीरे-धीरे कम होकर रुक जाता है, क्योंकि वायु का प्रतिरोध और ऊपर का घर्षण उसकी गति धीरे-धीरे ले लेते हैं।
| लटकी हुई रबड़ | पार्क का झूला | |
|---|---|---|
| ऊपर का नियत बिंदु | आपका स्थिर हाथ | झूले के ढाँचे की छड़ |
| क्या गति करता है | धागे के सिरे पर बँधी रबड़ | बच्चे सहित सीट |
| पथ | छोटा चाप, इधर-उधर दोहराया हुआ | छोटा चाप, इधर-उधर दोहराया हुआ |
हाथ स्थिर क्यों रखना है: दोलन किसी नियत स्थिति के सापेक्ष मापा जाता है। यदि हाथ हिलता रहे तो निम्नतम बिंदु भी हिलता रहेगा और शुद्ध इधर-उधर की गति देखने को ही नहीं मिलेगी। दीवार घड़ी के लोलक में भी घड़ी का ढाँचा ऊपरी सिरे को पूर्णतः स्थिर रखता है।
यह करके देखिए: 30 cm के धागे के साथ 30 सेकंड में रबड़ कितने पूरे चक्कर लगाती है, गिनिए; फिर 60 cm के धागे के साथ। लंबे धागे से चक्कर कम मिलेंगे — यही गुण लोलक को समय मापने के योग्य बनाता है।