प्र1.
लगभग 50 cm लंबी धातु की एक पतली पट्टी लीजिए। इसका एक छोर मेज पर दबा दीजिए। आप इसे दबाने के लिए कुछ पुस्तकों या एक ईंट का उपयोग (चित्र 5.17) कर सकते हैं। पट्टी (स्ट्रिप) के दूसरे छोर को थोड़ा दबाइए और फिर छोड़िए। पट्टी के इस छोर की गति का अवलोकन कीजिए। क्या ये ऊपर-नीचे गति करती है?
उत्तर
हाँ। मुक्त छोर अपनी मूल सीधी स्थिति के इधर-उधर ऊपर-नीचे कंपन करता है — पहले तेज़ी से, फिर धीरे-धीरे कम होकर रुक जाता है। यह भी दोलन-गति है।
पट्टी एक नियत स्थिति (अपने विराम-तल) के इधर-उधर गति करती है।
∴ उसकी गति दोलन-गति है।
∴ उसकी गति दोलन-गति है।
क्रियाकलाप 5.5 की लटकी रबड़ से तुलना कीजिए:
| लटकी हुई रबड़ | धातु की पट्टी | |
|---|---|---|
| इधर-उधर की दिशा | बगल में (बाएँ–दाएँ) | ऊपर-नीचे |
| किस नियत स्थिति के इधर-उधर | चाप का निम्नतम बिंदु | जिस तल पर पट्टी विराम में रहती है |
| हर बार वापस कौन लाता है | पृथ्वी का खिंचाव | धातु का लचीलापन (स्प्रिंग जैसा गुण) |
| गति का प्रकार | दोलन-गति | दोलन-गति |
ऊपर-नीचे भी दोलन क्यों है: परिभाषा में दिशा का कोई उल्लेख नहीं है। किसी नियत स्थिति के इधर-उधर दोहराई जाने वाली कोई भी गति दोलन-गति है — झूले की तरह बगल में, इस पट्टी की तरह ऊपर-नीचे, या ढोल की झिल्ली की तरह भीतर-बाहर।
क्या आप जानते हैं? पट्टी को बहुत थोड़ा दबाकर छोड़िए तो वह इतनी तेज़ी से दोलन करती है कि आपको एक हल्की भनभनाहट सुनाई देती है। आप जो भी ध्वनि सुनते हैं, वह किसी दोलन करती वस्तु से ही उत्पन्न होती है — पट्टी, तार, ढोल की झिल्ली, या आपके अपने स्वर-तंतु।