प्र1.
मान लीजिए कि आप ऐसे पानी के जहाज में यात्रा कर रहे हैं जो शांत समुद्र पर नियत चाल से सरल रेखा में चल रहा है। यह भी मान लीजिए कि जहाज में कोई खिड़की नहीं है। क्या कोई ऐसी विधि है जिससे आप यह सुनिश्चित कर सकें कि जहाज गति में है या विराम अवस्था में है?
उत्तर
नहीं। बंद कक्ष के भीतर ऐसा कोई प्रयोग नहीं है जो बता सके कि जहाज चल रहा है या खड़ा है — बशर्ते चाल सचमुच नियत हो, पथ सचमुच सरल रेखा हो और समुद्र सचमुच शांत हो।
क्यों नहीं? कक्ष के भीतर की हर वस्तु — आप, फ़र्श, हवा, पानी का गिलास — जहाज के साथ ठीक उसी चाल से चल रही है। अतः इनमें से किसी की भी स्थिति जहाज के सापेक्ष कभी नहीं बदलती, और जहाज ही आपके पास बचा एकमात्र संदर्भ बिंदु है।
| आप जो प्रयोग करेंगे | जहाज खड़ा हो | जहाज नियत चाल से चल रहा हो |
|---|---|---|
| हाथ से एक सिक्का गिराइए | सीधे आपके पैरों के पास गिरता है | सीधे आपके पैरों के पास गिरता है — वही परिणाम |
| गिलास में पानी डालिए | सीधा गिलास में गिरता है | सीधा गिलास में गिरता है — वही परिणाम |
| गेंद ऊपर उछालकर पकड़िए | हाथ में ही वापस आती है | हाथ में ही वापस आती है — वही परिणाम |
| कटोरे में पानी की सतह देखिए | समतल रहती है | समतल रहती है — वही परिणाम |
कब आप बता सकते हैं। जैसे ही गति नियत एवं सरल रेखीय नहीं रहती, शरीर तुरंत उसे अनुभव कर लेता है —
- जहाज की चाल बढ़े या घटे — आप पीछे या आगे की ओर झटका अनुभव करते हैं;
- जहाज मुड़े — आप एक ओर झुक जाते हैं और लटकी हुई वस्तुएँ हिलने लगती हैं;
- समुद्र अशांत हो — कक्ष डोलने लगता है;
- आप खिड़की खोल दें — अब समुद्र और तट बाहरी संदर्भ बिंदु के रूप में उपलब्ध हैं और उत्तर स्पष्ट हो जाता है।
बड़ा विचार: सरल रेखा में नियत चाल की गति को भीतर से पहचाना नहीं जा सकता। यही कारण है कि 100 km/h से समान रूप से दौड़ती रेलगाड़ी में आप आराम से पुस्तक पढ़ लेते हैं, परंतु ब्रेक लगते ही वही पुस्तक गोद से फिसल जाती है। गैलीलियो ने लगभग चार सौ वर्ष पहले ठीक यही पहेली — जहाज का ही उदाहरण लेकर — प्रस्तुत की थी।
क्या आप जानते हैं? इसीलिए हमें पृथ्वी की गति का अनुभव नहीं होता। पृथ्वी हमें लगभग 30 km प्रति सेकंड की चाल से सूर्य के चारों ओर ले जाती है, पर इतनी समान रूप से कि हवा, भवन, बादल — सब हमारे साथ ही चलते हैं।