कुतूहल अध्याय 5 और भी सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप पैमाने का उपयोग करके अपनी पुस्तिका या पाठ्यपुस्तक के किसी एक पेज की मोटाई को ज्ञात कर सकते हैं? एक विधि के बारे में सोचिए और लिखिए। क्रियाकलाप करके परिणाम लिखिए।
उत्तर

हाँ — एक पेज मापकर नहीं, बल्कि बहुत-से पेज एक साथ मापकर और भाग देकर। एक पन्ना लगभग 0.1 mm मोटा होता है, जो आपके पैमाने के लघुतम विभाजन से भी दस गुना छोटा है, अतः उसे सीधे नहीं मापा जा सकता।

विधि:

  1. पुस्तक खोलिए और जिस गड्डी को दबाना है उसके पहले एवं अंतिम मुद्रित पृष्ठ की पृष्ठ संख्याएँ नोट कीजिए — मान लीजिए पृष्ठ 1 से 200 तक।
  2. याद रखिए कि कागज़ के एक पन्ने पर दो पृष्ठ संख्याएँ होती हैं, प्रत्येक ओर एक। अतः 200 पृष्ठ = 100 पन्ने
  3. बिना जिल्द के, गड्डी को समतल एवं कसकर दबाइए।
  4. गड्डी की मोटाई 15 cm पैमाने से मापिए, आँख अंकन के ठीक ऊपर रखते हुए।
  5. भाग दीजिए।
गिने गए पृष्ठों की संख्या = 200
पन्नों की संख्या = 200 ÷ 2 = 100 पन्ने
गड्डी की मापी गई मोटाई = 1.2 cm = 12 mm

एक पन्ने की मोटाई = 12 mm ÷ 100
= 0.12 mm
= 0.12 ÷ 10 cm = 0.012 cm
= 0.12 ÷ 1000 m = 0.00012 m

परिणाम: पुस्तिका का एक पेज लगभग 0.12 mm मोटा है — अर्थात् एक मिलीमीटर के लगभग आठवें भाग जितना।

यह युक्ति क्यों काम करती है: पैमाना पढ़ने की त्रुटि लगभग उतनी ही (± 0.5 mm) रहती है, चाहे आप एक पन्ना मापें या सौ। सौ पन्नों में बँट जाने पर यह त्रुटि घटकर प्रति पन्ना ± 0.005 mm रह जाती है। बहुत-सी वस्तुएँ एक साथ मापकर भाग देना, अत्यंत छोटी राशियाँ मापने की वैज्ञानिकों की मानक विधि है।
संकेत: सबसे आम भूल है पन्नों के बजाय पृष्ठों की संख्या से भाग देना, जिससे उत्तर आधा रह जाता है। संदेह हो तो किनारों को छूकर पन्ने गिनिए।
प्र2.
एक ही पेड़ से गिरी हुई कुछ पत्तियों को एकत्रित कीजिए। जिस पेड़ की पत्तियाँ आपने ली हैं उसका नाम पहचानिए। 15 cm पैमाने का उपयोग कर इन सभी पत्तियों की लंबाई एवं चौड़ाई का मापन कीजिए जैसा कि चित्र 5.20 में दिया गया है। अपने प्रेक्षणों को तालिका 5.7 में लिखिए। चर्चा कीजिए कि एक ही पेड़ की पत्तियाँ लंबाई एवं चौड़ाई में भिन्न-भिन्न क्यों हैं।
उत्तर

पत्ती कैसे मापें (चित्र 5.20)। पत्ती को मेज़ पर समतल रखिए। लंबाई के लिए पैमाने को मध्य-शिरा के अनुदिश, पत्र-फलक के आधार से सिरे तक रखिए। चौड़ाई के लिए पैमाने को पत्ती के सबसे चौड़े भाग पर आड़ा रखिए। दोनों को निकटतम मिलीमीटर तक पढ़िए।

तालिका 5.7— पत्तियों की लंबाई एवं चौड़ाईपीपल के वृक्ष का एक नमूना प्रेक्षण:

क्र.सं.पेड़ का नामपत्ती की लंबाईपत्ती की चौड़ाई
1.पीपल11.4 cm8.2 cm
2.पीपल9.8 cm7.0 cm
3.पीपल12.6 cm8.9 cm
4.पीपल10.5 cm7.6 cm
5.पीपल8.9 cm6.4 cm
सबसे लंबी पत्ती = 12.6 cm, सबसे छोटी पत्ती = 8.9 cm
अंतर = 12.6 cm − 8.9 cm = 3.7 cm
अर्थात् एक ही पेड़ की पत्तियाँ लंबाई में 3 cm से अधिक भिन्न हो सकती हैं।

एक ही पेड़ की पत्तियाँ भिन्न क्यों होती हैं?

  • आयु — पिछले महीने निकली पत्ती अभी बढ़ ही रही है; पिछले वर्ष की पत्ती अपना पूरा आकार पा चुकी है।
  • पेड़ पर स्थान — ऊपर तेज़ धूप में लगी पत्तियाँ प्रायः छोटी एवं मोटी होती हैं; नीचे छाया में लगी पत्तियाँ अधिक प्रकाश पाने के लिए चौड़ी हो जाती हैं।
  • जल एवं पोषक तत्व — जिस डाल को अधिक जल एवं खनिज मिलते हैं उसकी पत्तियाँ बड़ी होती हैं।
  • क्षति — कीट, इल्लियाँ, ओले एवं हवा पत्ती के भाग नोच लेते हैं, जिससे मापी गई लंबाई या चौड़ाई कम हो जाती है।
  • प्राकृतिक विविधता — कोई भी दो जीवित वस्तुएँ पूर्णतः एक-सी नहीं होतीं, जैसे आपकी कक्षा के दो बच्चों की ऊँचाई ठीक एक-सी नहीं होती।
वैज्ञानिक बात: जीवित वस्तुओं में विविधता सामान्य है। इसीलिए जीव-वैज्ञानिक कभी एक पत्ती पर निर्भर नहीं रहते — वे अनेक पत्तियाँ मापकर औसत लेते हैं। ध्यान दीजिए कि पेंसिल मापने से यह कितना भिन्न है, जहाँ बार-बार मापने पर लगभग वही मान मिलता है।
संकेत: केवल गिरी हुई पत्तियाँ लीजिए, और सब एक ही दिन एक ही पेड़ से। दो पेड़ों की पत्तियाँ मिला दीं तो जो विविधता मिलेगी उसका कारण ही दूसरा होगा।
प्र3.
अपने आस-पास के बड़ों से चर्चा कीजिए कि पुराने दिनों में लंबाई के मापन के लिए किन मात्रकों का उपयोग किया जाता था। इंटरनेट का उपयोग कर भारत में पुरातात्त्विक स्थलों के खनन में प्राप्त लंबाई के पैमानों की जानकारी भी प्राप्त करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर

भाग 1 — बड़ों से पूछिए। मात्रक, उसकी परिभाषा और उसका उपयोग लिखिए। भारत में प्रायः ये मात्रक सुनने को मिलेंगे —

पुराना मात्रककैसे परिभाषित थालगभग बराबरकिसके लिए उपयोग
अँगुलएक अँगुली की चौड़ाई≈ 1.5–2 cmबढ़ईगीरी, सिलाई, मंदिर-वास्तुकला
बालिश्त (हैंडस्पैन)फैले हाथ के अँगूठे से कनिष्ठा के सिरे तक≈ 20 cmकपड़ा, रस्सी, छोटा फर्नीचर
हाथ (हस्त)कोहनी से मध्यमा के सिरे तक≈ 45 cmबाज़ार में कपड़ा, घर की चिनाई
गज़दो हाथ, लगभग नाक से अँगुली के सिरे तक≈ 90 cmकपड़ा एवं भूमि का माप
पैर / कदमपैर की लंबाई; चलते समय एक कदम की लंबाई≈ 25 cm / 75 cmखेत एवं क्यारियाँ नापना, जैसा पद्मा ने बताया
कोसवह दूरी जहाँ तक गाय की आवाज़ सुनाई दे≈ 3 kmगाँवों के बीच की दूरी
योजन, धनुषप्राचीन भारतीय साहित्य में वर्णित मात्रकक्षेत्र एवं काल के अनुसार भिन्ननगर नियोजन, लंबी यात्राएँ

भाग 2 — खनन में मिले पैमाने। चार हज़ार वर्ष से भी अधिक पुरानी सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा) सभ्यता में सावधानीपूर्वक अंकित पैमाने पहले से मौजूद थे —

  • लोथल (गुजरात)हाथीदाँत का एक छोटा टुकड़ा जिस पर महीन समांतर रेखाएँ हैं और विभाजन लगभग 1.7 mm की दूरी पर हैं। यह प्राचीन विश्व के सूक्ष्मतम अंकनों में से एक है।
  • मोहनजोदड़ोशंख का पैमाना, जिसके अंकन लगभग 6.7 mm की समान दूरी पर हैं और प्रत्येक पाँचवें विभाजन पर वृत्त-बिंदु का चिह्न है।
  • हड़प्पाकाँसे की एक टूटी छड़, जिस पर बराबर लंबाइयाँ अंकित हैं।
  • कालीबंगा (राजस्थान) एवं धोलावीरा (गुजरात) — ईंटों तथा गलियों की योजना नियत अनुपातों का पालन करती है, जो किसी सर्वमान्य लंबाई-मानक के बिना संभव ही नहीं।
इससे क्या पता चलता है: हड़प्पा के निर्माता मीटर के आविष्कार से बहुत पहले ही मानक मात्रकों का उपयोग करते थे। सैकड़ों किलोमीटर दूर बसे नगर-दर-नगर उनकी ईंटें 1 : 2 : 4 (मोटाई : चौड़ाई : लंबाई) के अनुपात में बनती थीं — यह संयोग से नहीं हो सकता।
संकेत: बड़ों के ठीक वही शब्द लिखिए और फिर उस मात्रक को स्वयं मापिए। दादी से एक हाथ कपड़ा दिखाने को कहिए और फिर उसे मीटर पैमाने से मापिए। आपको पुराने मात्रकों की उपयोगिता और उनकी परिवर्तनशीलता — दोनों दिखाई देंगी।
प्र4.
1 cm, 2 cm की रेखाओं अथवा उनके संयोजनों का उपयोग करके एक भूल-भुलैया की रचना कीजिए। आपके लिए इसका एक भाग चित्र 5.21 में बनाया गया है। अब, आप अपनी कल्पना का उपयोग कीजिए और अपनी इच्छानुसार इसका विस्तार इतने बड़े आकार तक कीजिए जितना आप चाहते हैं।
उत्तर

क्या करना है। ऐसा वर्ग-अंकित (ग्राफ) कागज़ लीजिए जिसका प्रत्येक छोटा वर्ग 1 cm × 1 cm हो, अथवा 15 cm पैमाने से स्वयं 1 cm का जाल बनाइए। फिर केवल 1 cm एवं 2 cm की रेखाओं से भूल-भुलैया की दीवारें बनाइए।

चरण:

  1. एक वर्गाकार सीमा खींचिए, मान लीजिए 10 cm × 10 cm। बाईं भुजा पर 1 cm का एक अंतराल प्रवेश के लिए और दाईं भुजा पर एक निकास के लिए छोड़ दीजिए।
  2. भीतर दीवारें केवल जाल-रेखाओं पर ही खींचिए। प्रत्येक दीवार ठीक 1 cm या 2 cm की हो — हर एक रेखा के लिए पैमाने का उपयोग कीजिए।
  3. पहले प्रवेश से निकास तक जाने वाला एक मार्ग बनाइए। फिर उसके दोनों ओर बंद-गली (डेड-एंड) शाखाएँ जोड़िए ताकि खेलने वाला भ्रमित हो।
  4. चित्र 5.21 की तरह दो रंग लीजिए — एक रंग 1 cm की दीवारों के लिए और दूसरा 2 cm की दीवारों के लिए।
  5. मित्र के साथ भूल-भुलैया की अदला-बदली कीजिए और एक-दूसरे को हल करने में लगा समय मापिए।
1 cm के जाल पर 10 cm × 10 cm की भूल-भुलैया
= 10 × 10 = 100 इकाई वर्ग
दीवारों के लिए उपलब्ध जाल-रेखाएँ = 11 आड़ी + 11 खड़ी
यदि सभी रेखाएँ खींच दें तो कुल दीवार-लंबाई = 11 × 10 cm × 2 = 220 cm = 2.2 m
इसमें मापन कहाँ है: यह चित्रकला का अभ्यास तो है ही, मापन का भी अभ्यास है। प्रत्येक रेखा पैमाने से जाँचनी पड़ती है, अतः भूल-भुलैया पूरी होते-होते आप सौ बार 15 cm पैमाने का उपयोग कर चुके होंगे और 1 cm आपकी आँख का अंदाज़ बन जाएगा।
यह करके देखिए: वही भूल-भुलैया सभी लंबाइयाँ दुगुनी करके फिर बनाइए — 20 cm × 20 cm के कागज़ पर 2 cm एवं 4 cm की दीवारें। आकृति वही रहेगी पर हर लंबाई दुगुनी। बड़े पैमाने पर बनाने का यही विचार हर मानचित्रकार उपयोग करता है।
प्र5.
मेरी लंबाई कितनी है? एक दीवार के अनुदिश खड़े हो जाइए और किसी वयस्क (अपने से बड़े व्यक्ति) की सहायता से अपनी ऊँचाई (चित्र 5.22) को चिह्नित कीजिए। अपनी एवं अपने भाई-बहनों की लंबाई का अभिलेख रखने के लिए इसे प्रत्येक तीन माह में दोहराइए।
उत्तर

विधि — हर बार ठीक एक ही ढंग से कीजिए, अन्यथा तुलना निरर्थक हो जाएगी।

  1. ऐसी दीवार चुनिए जिसके सामने समतल, कठोर फ़र्श हो — कालीन कभी नहीं।
  2. बिना जूतों के, एड़ियाँ, पीठ एवं सिर दीवार से सटाकर, पैर मिलाकर, सामने देखते हुए खड़े हो जाइए।
  3. कोई बड़ा व्यक्ति आपके सिर पर एक पुस्तक या सेट-स्क्वायर समतल रखकर, दीवार से सटाकर, उसके निचले किनारे पर पतली पेंसिल-रेखा खींचे।
  4. फ़र्श से उस निशान तक की दूरी मापन-फीते या मीटर पैमाने से मापिए, फीता ऊर्ध्वाधर रखते हुए और आँख निशान के तल में रखते हुए।
  5. तिथि एवं ऊँचाई तालिका में लिखिए। हर तीन माह में दोहराइए।

नमूना ऊँचाई-अभिलेख — ऐसी ही एक तालिका अपनी कॉपी में रखिए:

तिथिऊँचाईमीटर मेंपिछली बार से वृद्धि
15 अप्रैल142.0 cm1.420 m
15 जुलाई143.5 cm1.435 m1.5 cm
15 अक्तूबर145.0 cm1.450 m1.5 cm
15 जनवरी146.2 cm1.462 m1.2 cm
पूरे वर्ष में वृद्धि = 146.2 cm − 142.0 cm = 4.2 cm
तीन माह में औसत वृद्धि = 4.2 cm ÷ 4 = 1.05 cm
मिलीमीटर में, प्रति माह वृद्धि ≈ 4.2 × 10 ÷ 12 = 3.5 mm
हर तीन माह में क्यों, हर सप्ताह क्यों नहीं: एक माह में आप केवल लगभग 3 से 4 mm बढ़ते हैं, जो माप की अपनी त्रुटि के लगभग बराबर है। तीन माह प्रतीक्षा करने पर वृद्धि (लगभग 1 cm) त्रुटि से कहीं अधिक हो जाती है, अतः जो परिवर्तन दिखता है वह वास्तविक होता है।
क्या आप जानते हैं? आप सुबह रात की अपेक्षा मापने योग्य रूप से अधिक लंबे होते हैं — एक सेंटीमीटर तक — क्योंकि दिन भर रीढ़ की मुलायम गद्दियाँ थोड़ी दब जाती हैं। इसलिए सदैव दिन के एक ही समय मापिए।
प्र6.
आइए, साइकिल का उपयोग कर दो स्थानों के बीच की दूरी का मापन करने के लिए एक मनोरंजक विधि की रचना करते हैं। धातु की एक लचीली पट्टी को साइकिल के आगे के पहिए की तीली पर इस प्रकार लगाते हैं कि हर बार जब भी यह पहिए को धारण करने वाले फ्रेम को पार करता है तो इससे टकराता है और ध्वनि उत्पन्न करता है (चित्र 5.23)। … ‘जोनेस काउंटर’ के बारे में पता करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर

मूल विचार: पट्टी पहिए के प्रत्येक पूरे चक्कर में एक बार फ्रेम से टकराती है। अतः ध्वनियों की संख्या ही चक्करों की संख्या है, और प्रत्येक चक्कर में साइकिल ठीक पहिए की परिधि जितनी आगे बढ़ती है।

तय की गई दूरी = (पहिए की परिधि की लंबाई) × (चक्करों की संख्या)

चरण 1 — पहिए की परिधि मापिए, ठीक चित्र 5.8 की तरह धागे से। धागा टायर पर एक बार लपेटिए, निशान लगाइए, सीधा कीजिए और मीटर पैमाने से मापिए।

मापी गई परिधि = 2 m 10 cm = 2.10 m

चरण 2 — धीरे-धीरे साइकिल चलाइए और ध्वनियाँ गिनिए। मान लीजिए विद्यालय के गेट से बाज़ार तक आपने 500 ध्वनियाँ गिनीं।

चक्करों की संख्या = 500
दूरी = 2.10 m × 500
= 1050 m
किलोमीटर में: 1050 ÷ 1000 = 1.05 km  (1 km = 1000 m)

चरण 3 — दूसरी विधि से जाँचिए। उसी रास्ते पर कदम गिनते हुए चलिए। यदि आपका एक कदम 0.6 m का है और आपने 1750 कदम लिए, तो दूरी = 0.6 × 1750 = 1050 m — दोनों उत्तर मेल खाते हैं।

‘जोनेस काउंटर’ क्या है? यह एक छोटा यांत्रिक गणक है जो साइकिल के अगले धुरे पर लगाया जाता है और पहिए से जुड़ा रहता है। ध्वनि करने के बजाय यह प्रत्येक चक्कर पर एक नियत संख्या में — लगभग 23 — गणनाएँ चुपचाप दर्ज करता है, अतः यह चक्कर का अंश भी माप लेता है। सड़क पर होने वाली दौड़ों (जैसे मैराथन) के मार्ग की लंबाई प्रमाणित करने के लिए आधिकारिक रूप से यही उपकरण उपयोग होता है। दौड़ से पहले साइकिल को एक सावधानी से मापी गई दूरी पर चलाकर पता किया जाता है कि एक किलोमीटर में कितनी गणनाएँ होती हैं, और फिर पूरे मार्ग पर चलाया जाता है।

यह विधि इतनी शुद्ध क्यों है: परिधि एक बार मापने में जो त्रुटि (मान लीजिए 210 cm में 1 cm) आती है, वह चलाते समय बढ़ती नहीं। 500 चक्कर गिनने का अर्थ है कि पहिए ने वही माप 500 बार दोहराया — 1050 m सड़क पर फीता घसीटने से यह कहीं बेहतर है।
संकेत: टायर में हवा ठीक से भरी रखिए और सीधे रास्ते पर गिनिए। हवा कम होने पर टायर की परिधि कुछ घट जाती है, अतः प्रत्येक चक्कर में कम दूरी तय होती है और आपका कुल उत्तर अधिक आ जाता है।
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