कुतूहल अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या बड़ी लंबाइयों जैसे कि दो शहरों के बीच रेल की पटरियों की लंबाई अथवा छोटी लंबाइयों जैसे कि किसी पुस्तक के पृष्ठ की मोटाई मापने के लिए मीटर का मात्रक के रूप में उपयोग सुविधाजनक रहेगा?
उत्तर

नहीं, दोनों ही स्थितियों में यह सुविधाजनक नहीं रहेगा। मीटर कमरे या कपड़े जैसी रोज़मर्रा की वस्तुओं के लिए उपयुक्त है, परंतु रेल की पटरियों के लिए बहुत छोटा और पुस्तक के पृष्ठ के लिए बहुत बड़ा है।

स्थिति 1 — दो शहरों के बीच रेल की पटरियाँ। दिल्ली–मुंबई रेल मार्ग लगभग 1384 km लंबा है।

1 km = 1000 m (रूपांतरण गुणक)
1384 km = 1384 × 1000 m = 13,84,000 m

सात अंकों की संख्या कहने, लिखने एवं तुलना करने में कठिन है। 1384 km लिखते ही बात तुरंत समझ आ जाती है — इसीलिए लंबी दूरियों के लिए किलोमीटर का उपयोग करते हैं।

स्थिति 2 — पुस्तक के एक पृष्ठ की मोटाई। एक पृष्ठ लगभग 0.1 mm मोटा होता है।

1 m = 100 cm तथा 1 cm = 10 mm
∴ 1 m = 100 × 10 mm = 1000 mm
अतः 1 mm = 1/1000 m = 0.001 m
पृष्ठ की मोटाई ≈ 0.1 mm = 0.1 × 0.001 m = 0.0001 m

0.0001 m लिखा माप न तो कल्पना में आता है और न ही उसमें शून्य गिनना आसान है। 0.1 mm लिखना सरल है — इसीलिए बहुत छोटी लंबाइयों के लिए मिलीमीटर का उपयोग करते हैं।

क्या मापना हैसुविधाजनक मात्रकसामान्य मान
दो शहरों के बीच रेल की पटरियाँकिलोमीटर (km)≈ 1384 km (दिल्ली–मुंबई)
कपड़े की लंबाई, कमरे की ऊँचाईमीटर (m)2 m, 3 m
पेंसिल की लंबाईसेंटीमीटर (cm)≈ 17 cm
पृष्ठ की मोटाई, सिक्के की मोटाईमिलीमीटर (mm)0.1 mm, 2 mm
ऐसा क्यों: अच्छा मात्रक वही है जो मापी जाने वाली वस्तु के लिए छोटी एवं सरल संख्या दे। km, m, cm और mm — चारों के होने का यही एकमात्र कारण है। लंबाई कभी नहीं बदलती, केवल उसे लिखने का ढंग बदलता है। दूध को बूँदों में या नदी को बूँदों में कोई नहीं मापता।
प्र2.
मान लीजिए कि हम सभी फिर से मेज की लंबाई मापते हैं, किंतु इस बार हम मीटर पैमाने का उपयोग करेंगे। क्या हमारे परिणाम अब भी भिन्न-भिन्न होंगे?
उत्तर

नहीं — इस बार सबको लगभग एक ही उत्तर मिलेगा, क्योंकि मीटर पैमाने पर मानक मात्रक अंकित है। दीपा के पैमाने का एक सेंटीमीटर हरदीप के पैमाने के एक सेंटीमीटर के ठीक बराबर है, जबकि बालिश्त सबका अलग-अलग था।

यदि मेज की लंबाई मान लीजिए 1.24 m है, तो पाँचों मित्रों को यही मिलना चाहिए —

लंबाई = 1.24 m
= 1.24 × 100 cm = 124 cm (1 m = 100 cm से)
= 124 × 10 mm = 1240 mm (1 cm = 10 mm से)

परंतु — और पुस्तक में दी गई उत्तर-पंक्ति यही कहती है — एक-दो मिलीमीटर का अंतर फिर भी आ सकता है, और उसका मात्रक से कोई संबंध नहीं। वह पैमाने के असावधान उपयोग से आता है —

  • पैमाने को मेज से सटाकर न रखना;
  • पैमाने को मेज की लंबाई के अनुदिश न रखना;
  • अंकन को ठीक ऊपर से न देखकर तिरछे देखना;
  • लंबी मेज पर पैमाना बार-बार उठाकर आगे बढ़ाते समय हर बार एक मिलीमीटर छूट जाना या दोहरा जाना।

इसीलिए अगली सीख यही है — पैमाने का सही उपयोग

ऐसा क्यों: मानक मात्रक बड़ा अंतर (13 बनाम 14) समाप्त कर देता है। सावधानीपूर्वक विधि छोटा अंतर (124.0 cm बनाम 124.2 cm) घटाती है। विश्वसनीय माप के लिए दोनों आवश्यक हैं।
संकेत: यदि मेज पैमाने से लंबी है तो जहाँ पैमाना समाप्त हो वहाँ पेंसिल से निशान लगाइए और अगली माप ठीक उसी निशान से आरंभ कीजिए। 100 cm + 24 cm जोड़ने पर 124 cm मिलेगा।
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