नहीं, दोनों ही स्थितियों में यह सुविधाजनक नहीं रहेगा। मीटर कमरे या कपड़े जैसी रोज़मर्रा की वस्तुओं के लिए उपयुक्त है, परंतु रेल की पटरियों के लिए बहुत छोटा और पुस्तक के पृष्ठ के लिए बहुत बड़ा है।
स्थिति 1 — दो शहरों के बीच रेल की पटरियाँ। दिल्ली–मुंबई रेल मार्ग लगभग 1384 km लंबा है।
1384 km = 1384 × 1000 m = 13,84,000 m
सात अंकों की संख्या कहने, लिखने एवं तुलना करने में कठिन है। 1384 km लिखते ही बात तुरंत समझ आ जाती है — इसीलिए लंबी दूरियों के लिए किलोमीटर का उपयोग करते हैं।
स्थिति 2 — पुस्तक के एक पृष्ठ की मोटाई। एक पृष्ठ लगभग 0.1 mm मोटा होता है।
∴ 1 m = 100 × 10 mm = 1000 mm
अतः 1 mm = 1/1000 m = 0.001 m
पृष्ठ की मोटाई ≈ 0.1 mm = 0.1 × 0.001 m = 0.0001 m
0.0001 m लिखा माप न तो कल्पना में आता है और न ही उसमें शून्य गिनना आसान है। 0.1 mm लिखना सरल है — इसीलिए बहुत छोटी लंबाइयों के लिए मिलीमीटर का उपयोग करते हैं।
| क्या मापना है | सुविधाजनक मात्रक | सामान्य मान |
|---|---|---|
| दो शहरों के बीच रेल की पटरियाँ | किलोमीटर (km) | ≈ 1384 km (दिल्ली–मुंबई) |
| कपड़े की लंबाई, कमरे की ऊँचाई | मीटर (m) | 2 m, 3 m |
| पेंसिल की लंबाई | सेंटीमीटर (cm) | ≈ 17 cm |
| पृष्ठ की मोटाई, सिक्के की मोटाई | मिलीमीटर (mm) | 0.1 mm, 2 mm |