कुतूहल अध्याय 6 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपने रसोईघर में जाएँ और देखें कि आपके माता-पिता ने विभिन्न खाद्य सामग्रियों को किस प्रकार व्यवस्थित किया हुआ है। क्या आप व्यवस्था के लिए किसी बेहतर विधि का सुझाव दे सकते हैं? अपनी नोटबुक में लिखिए।
उत्तर

क्या करना है: अपने रसोईघर में खड़े होकर लिखिए कि क्या कहाँ रखा है। फिर हर खाने से दो प्रश्न पूछिए — इन्हें किस गुण के आधार पर एक साथ रखा गया है? और क्या किसी दूसरे गुण से सामान और शीघ्र मिल सकता है?

प्राय: आपको यह मिलेगा:

  • साबुत और पिसे मसाले चूल्हे के पास मसालेदानी में।
  • दालें और अनाज — चावल, आटा, दाल, राजमा — बड़े वायुरोधी डिब्बों में।
  • चीनी, नमक, चाय और तेल वहीं जहाँ चाय बनती है।
  • सब्जियाँ, दूध और बचा हुआ भोजन रेफ्रिजरेटर में।
  • प्याज, आलू और लहसुन बाहर टोकरी में, अँधेरे और हवादार स्थान पर।

नमूना उत्तर — एक बेहतर विधि:

  1. पहले उपयोग की आवृत्ति से छाँटिए। नमक, चीनी, चाय, तेल और मसालेदानी उस खाने में जहाँ बिना स्टूल के हाथ पहुँचे; त्योहारों का सामान सबसे ऊपर।
  2. फिर इस आधार पर कि भोजन को किससे बचाना है। गरमी से खराब होने वाली वस्तुएँ (दूध, दही, सब्जी) → रेफ्रिजरेटर; नमी से खराब होने वाली (बिस्कुट, पापड़, आटा) → वायुरोधी डिब्बे; प्रकाश से खराब होने वाली (तेल, घी) → बंद अलमारी।
  3. एक ही आकार के पारदर्शी डिब्बे लीजिए और उन पर नाम तथा भरने की तिथि का लेबल लगाइए। एक नजर में दिख जाएगा कि क्या समाप्त होने वाला है।
  4. कच्चा और पका भोजन अलग रखिए, और साबुन, फिनाइल व डिटर्जेंट बिल्कुल अलग खाने में — कभी भोजन के ऊपर नहीं।
  5. “पहले आया, पहले उपयोग” नियम अपनाइए — पुराना पैकेट आगे खिसका दीजिए ताकि वही पहले काम आए और कुछ बरबाद न हो।
यह विधि बेहतर क्यों है: पुरानी व्यवस्था प्राय: आदत के आधार पर बनी होती है। नई व्यवस्था गुणों के आधार पर है — कौन-सी वस्तु कितनी बार चाहिए और किससे खराब होती है। किसी उपयोगी गुण के आधार पर समूह बनाना ही वर्गीकरण है, और इससे समय तथा भोजन दोनों बचते हैं।
प्र2.
स्तंभ I में दिए गए अक्षरों को सही क्रम में लिखें और प्राप्त शब्द का मिलान स्तंभ II में दिए गए उसके गुणों से करें। स्तंभ I: (क) व् य द्र (ख) ल शी घु न ल (ग) र पा र्शी द (घ) य ति म द्यु। स्तंभ II: (i) जिनके आर-पार स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है (ii) स्थान घेरता है और इसका द्रव्यमान होता है (iii) चमकदार सतह (iv) जल में पूरी तरह घुल जाता है
उत्तर

पहले अक्षरों को सही क्रम में लगाइए, फिर प्रत्येक शब्द को उसकी अपनी परिभाषा से मिलाइए।

स्तंभ I (उलटे-पुलटे अक्षर)सही शब्दमिलानस्तंभ II
(क) व् य द्रद्रव्य(ii)स्थान घेरता है और इसका द्रव्यमान होता है
(ख) ल शी घु न लघुलनशील(iv)जल में पूरी तरह घुल जाता है
(ग) र पा र्शी दपारदर्शी(i)जिनके आर-पार स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है
(घ) य ति म द्युद्युतिमय(iii)चमकदार सतह
अंतिम उत्तर: (क) → (ii), (ख) → (iv), (ग) → (i), (घ) → (iii)
सुझाव: आरंभ करने से पहले अक्षरों की संख्या गिन लीजिए। इससे तुरंत पता चल जाता है कि आपने शब्द सही बनाया है या कोई अक्षर छूट गया है।
प्र3.
दुकानों और घरों में सामग्री रखने के लिए जिन पात्रों का उपयोग किया जाता है वे प्राय: पारदर्शी होते हैं। इसके कारण बताइए।
उत्तर

क्योंकि पारदर्शी पात्र को बिना खोले ही भीतर का सामान दिख जाता है। इसी एक गुण से कई व्यावहारिक लाभ मिलते हैं।

  1. सामग्री तुरंत पहचानी जाती है। पचास डिब्बों वाला दुकानदार राजमा एक क्षण में ढूँढ़ लेता है, ढक्कन खोले-बंद किए बिना।
  2. कितना शेष है यह दिख जाता है, इसलिए पता रहता है कि चीनी का डिब्बा कब भरना है या माल कब मँगाना है।
  3. गुणवत्ता जाँची जा सकती है — आटे में कीड़े, अचार पर फफूँदी, रंग का बदलना, दाल में कंकड़ — सब बाहर से दिख जाते हैं।
  4. भोजन सुरक्षित रहता है। हर बार खोलने पर हवा, नमी, धूल और मक्खियाँ भीतर जाती हैं। पारदर्शी डिब्बा बिना खोले जाँचा जा सकता है, इसलिए सामग्री अधिक समय तक ताजी रहती है।
  5. ग्राहक आकर्षित होते हैं। काँच के मर्तबानों में रखी मिठाई, मेवे और बिस्कुट देखने में अच्छे लगते हैं और खरीदने से पहले परखे जा सकते हैं।
  6. समय बचता है और भूल नहीं होती — चीनी के स्थान पर नमक डाल देने की गुंजाइश नहीं रहती।
कब अपारदर्शी पात्र बेहतर होता है: जो वस्तुएँ प्रकाश से खराब होती हैं — सरसों का तेल, घी, दवाइयाँ, कुछ शरबत — उनके लिए दुकानों में जान-बूझकर गहरे रंग के या अपारदर्शी पात्र प्रयोग होते हैं। अर्थात् सामग्री सदैव प्रयोजन के अनुसार चुनी जाती है, आदतवश नहीं।
प्र4.
अंकित कीजिए कि नीचे दिए गए कथन सही हैं या गलत और गलत कथनों को सही करके लिखें। (क) लकड़ी पारभासी है जबकि काँच अपारदर्शी है। (ख) ऐलुमिनियम की पन्नी में चमक होती है, जबकि रबर में नहीं। (ग) चीनी जल में घुल जाती है, जबकि लकड़ी का बुरादा नहीं। (घ) सेब एक द्रव्य है क्योंकि यह कोई स्थान नहीं घेरता और इसमें द्रव्यमान है।
उत्तर
कथनसही / गलतसही किया हुआ कथन
(क) लकड़ी पारभासी है जबकि काँच अपारदर्शी है।गलतलकड़ी अपारदर्शी है जबकि काँच पारदर्शी है। लकड़ी के आर-पार कुछ नहीं दिखता; काँच के आर-पार वस्तुएँ स्पष्ट दिखती हैं।
(ख) ऐलुमिनियम की पन्नी में चमक होती है, जबकि रबर में नहीं।सहीऐलुमिनियम धातु है और चमकती है; रबड़ रबर की होती है और द्युतिहीन है।
(ग) चीनी जल में घुल जाती है, जबकि लकड़ी का बुरादा नहीं।सहीचीनी जल में घुलनशील है; बुरादा अघुलनशील है और सतह पर तैरता रहता है।
(घ) सेब एक द्रव्य है क्योंकि यह कोई स्थान नहीं घेरता और इसमें द्रव्यमान है।गलतसेब एक द्रव्य है क्योंकि यह स्थान घेरता है और इसमें द्रव्यमान है।
गलत कथनों में भूल कहाँ है: कथन (क) में दोनों शब्द आपस में बदल गए हैं — काँच का गुण लकड़ी को और लकड़ी का गुण काँच को दे दिया गया है। कथन (घ) में द्रव्यमान तो ठीक है, पर स्थान घेरने से इनकार कर दिया गया है; यदि यह सच होता तो सेब हाथ में पकड़ा ही नहीं जा सकता। द्रव्य के लिए दोनों शर्तें पूरी होनी चाहिए — स्थान घेरना और द्रव्यमान होना।
प्र5.
हम विभिन्न सामग्रियों, जैसे— लकड़ी, लोहा, प्लास्टिक, बाँस, सीमेंट और पत्थरों से बनी कुर्सियाँ देखते हैं। कुर्सी बनाने के लिए सामग्री के कुछ वांछनीय गुण निम्नलिखित हैं। कौन-सी सामग्रियाँ इन गुणों को पूरा करती हैं? (क) कठोरता (लंबे समय तक उपयोग के बाद भी बैठने पर मुड़ती या हिलती नहीं है)। (ख) हल्का भार (एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने और उठाने में आसान होता है)। (ग) सर्दियों में बैठने पर अधिक ठंडी महसूस नहीं होती। (घ) इसे नियमित रूप से साफ किया जा सकता है और लंबे समय तक उपयोग के बाद भी नई जैसी दिखती है।
उत्तर
वांछनीय गुणसर्वाधिक उपयुक्त सामग्रीक्यों
(क) कठोरता — लंबे उपयोग के बाद भी मुड़ती या हिलती नहींलोहा (पत्थर और सीमेंट भी)लोहा बहुत कठोर और मजबूत है; लोहे की कुर्सी वर्षों बाद भी नहीं मुड़ती या डगमगाती। पत्थर और सीमेंट की बेंच तो मुड़ती ही नहीं।
(ख) हल्का भार — उठाने और ले जाने में आसानप्लास्टिक (बाँस और बेंत भी हल्के हैं)प्लास्टिक की कुर्सी एक बच्चा एक हाथ से उठा लेता है; लोहे या पत्थर की कुर्सी अकेले हिलाई भी नहीं जा सकती।
(ग) सर्दियों में अधिक ठंडी नहीं लगतीलकड़ी और बाँस (प्लास्टिक भी ठीक है)लकड़ी और बाँस ऊष्मा के कुचालक हैं — वे शरीर से ऊष्मा नहीं खींचते। लोहा, पत्थर और सीमेंट ऊष्मा तेजी से खींच लेते हैं, इसलिए बर्फ जैसे ठंडे लगते हैं।
(घ) नियमित साफ की जा सके और नई जैसी दिखेप्लास्टिक (फिर पॉलिश की लकड़ी और रंगा हुआ लोहा)प्लास्टिक की सतह चिकनी होती है, जल नहीं सोखती, जंग नहीं लगती और दीमक नहीं लगती, इसलिए गीले कपड़े से पोंछते ही नई जैसी दिखती है।
कोई एक सामग्री सब कुछ क्यों नहीं जीतती: लोहा सबसे कठोर है पर सबसे भारी और सबसे ठंडा भी; प्लास्टिक हल्का और धुलने योग्य है पर भारी व्यक्ति के बैठने से समय के साथ झुक जाता है; लकड़ी गरम और मजबूत है पर उसमें दीमक लग सकती है और पॉलिश करानी पड़ती है। सामग्री सदैव प्रयोजन के अनुसार चुनी जाती है — इसीलिए कक्षाओं में हल्की प्लास्टिक की कुर्सियाँ, बगीचों में लोहे की बेंचें और गाँव के बरामदे में बाँस के मूढ़े मिलते हैं।
प्र6.
आपको (क) खाद्य अपशिष्ट, (ख) टूटा हुआ काँच और (ग) रद्दी कागज को एकत्रित करने के लिए पात्र की आवश्यकता होगी। इन सभी प्रकार के अपशिष्टों के पात्रों के लिए आप कौन-सी सामग्री का चयन करेंगे? आपको सामग्रियों के किन गुणों के बारे में विचार करना चाहिए?
उत्तर
एकत्रित किया जाने वाला अपशिष्टपात्र के लिए चुनी गई सामग्रीकिन गुणों के कारण
(क) खाद्य अपशिष्ट (गीला कचरा)ढक्कनदार मोटे प्लास्टिक का डिब्बा — या स्टील की बाल्टीजलरोधी (रिसता नहीं, तरी नहीं सोखता), सड़ता नहीं, जंग नहीं लगती, चिकना है इसलिए प्रतिदिन धुल जाता है, और ढक्कन से मक्खियाँ तथा दुर्गंध रुकती है। कागज या गत्ते का डिब्बा गीला होकर फट जाएगा।
(ख) टूटा हुआ काँचकठोर, मोटी दीवार वाला पात्र — धातु का ड्रम या मोटे कड़े प्लास्टिक की बाल्टी, ढक्कन सहितकठोर और मजबूत, ताकि नुकीले किनारे उसे भेद न सकें; दीवार मोटी, ताकि उठाते समय किसी को चोट न लगे; ढक्कन, ताकि टुकड़े बाहर न गिरें। पॉलीथीन या कागज का थैला तुरंत कट जाएगा।
(ग) रद्दी कागज (सूखा कचरा)गत्ते का डिब्बा, बेंत की टोकरी या हल्का प्लास्टिक का डिब्बा — ढक्कन आवश्यक नहींकागज हल्का, सूखा और हानिरहित है, इसलिए पात्र को केवल हल्का, सस्ता और खाली करने में सरल होना चाहिए। उसे सूखा और आग से दूर रखना आवश्यक है।

कोई भी पात्र चुनने से पहले जिन गुणों पर विचार करना चाहिए:

  • कठोरता और मजबूती — क्या अपशिष्ट उसे फाड़ या भेद देगा?
  • जलरोधी है या जल सोखता है — क्या गीला कचरा रिस जाएगा?
  • क्या उसमें जंग लगेगी या वह सड़ेगा, यदि वह देर तक गीला रहे?
  • भार — भर जाने पर क्या उसे उठाकर खाली किया जा सकेगा?
  • सफाई में सरलता — चिकनी, जल न सोखने वाली सतह आसानी से धुल जाती है।
  • मूल्य और पुन: उपयोग — वह कई महीने चलना चाहिए।
क्या आप जानते हैं? भारत भर की नगरपालिकाएँ इसी कारण रंगों की व्यवस्था अपनाती हैं — हरा डिब्बा गीले (खाद्य) कचरे के लिए, नीला कागज-प्लास्टिक जैसे सूखे पुनर्चक्रणीय कचरे के लिए, और काला या लाल टूटा काँच, ब्लेड तथा पुरानी बैटरी जैसे संकटपूर्ण कचरे के लिए।
प्र7.
हमारे चारों ओर वायु है लेकिन यह हमें एक-दूसरे को देखने से नहीं रोकती। वहीं यदि बीच में लकड़ी का दरवाजा आ जाए तो हम एक-दूसरे को नहीं देख पाते। ऐसा इसलिए है क्योंकि वायु ........... है और लकड़ी का दरवाजा ........... है। सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें— (क) पारदर्शी, अपारदर्शी (ख) पारभासी, पारदर्शी (ग) अपारदर्शी, पारभासी (घ) पारदर्शी, पारभासी
उत्तर

सही विकल्प: (क) पारदर्शी, अपारदर्शी।

वायु पारदर्शी है — प्रकाश सीधे आर-पार जाता है, इसलिए हम एक-दूसरे को स्पष्ट देखते हैं
लकड़ी का दरवाजा अपारदर्शी है — प्रकाश आर-पार नहीं जाता, इसलिए कुछ भी दिखाई नहीं देता

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:

  • (ख) पारभासी, पारदर्शी — यदि वायु पारभासी होती तो सब कुछ धुँधला दिखता, और दरवाजा पारदर्शी होता तो खिड़की की भाँति आर-पार दिखता।
  • (ग) अपारदर्शी, पारभासी — यह तो सत्य के ठीक विपरीत है।
  • (घ) पारदर्शी, पारभासी — वायु के लिए सही है, पर लकड़ी का दरवाजा पारभासी नहीं है; उसके आर-पार धुँधली आकृति भी नहीं दिखती। दरवाजा फ्रॉस्टेड काँच का होता तो यह विकल्प सही होता।
संकेत प्रश्न में ही है: “देखने से नहीं रोकती” का अर्थ है स्पष्ट दिखना → पारदर्शी। “नहीं देख पाते” का अर्थ है कुछ भी न दिखना → अपारदर्शी। यदि प्रश्न में लिखा होता “छाया तो दिखती है पर स्पष्ट नहीं”, तो उत्तर पारभासी होता।
प्र8.
कल्पना कीजिए कि आपके पास दो अज्ञात सामग्रियाँ हैं, ‘क’ और ‘ख’। जब आप सामग्री ‘क’ को दबाने का प्रयास करते हैं तो यह कठोर महसूस होती है और आसानी से अपना आकार नहीं बदलती है। दूसरी ओर, जब आप सामग्री ‘ख’ को दबाते हैं तो यह आसानी से अपना आकार बदल लेती है। अब, जब आप दोनों सामग्रियों को जल में मिलाते हैं, तो केवल सामग्री ‘क’ पूरी तरह से घुल जाती है, जबकि सामग्री ‘ख’ अपरिवर्तित रहती है। सामग्री ‘क’ और ‘ख’ क्या हो सकती हैं? क्या आप पहचान सकते हैं कि सामग्री ‘क’ कठोर है या नरम? सामग्री ‘ख’ क्या हो सकती है? अपने उत्तर की व्याख्या करें।
उत्तर

दोनों सामग्रियों के लिए दिए गए दो-दो संकेत पढ़कर उन्हें जोड़िए।

 सामग्री ‘क’सामग्री ‘ख’
दबाने परकठोर लगती है, आसानी से आकार नहीं बदलतीआसानी से आकार बदल लेती है
अत: वह हैकठोरनरम
जल मेंपूरी तरह घुल जाती हैअपरिवर्तित रहती है
अत: वह हैघुलनशीलअघुलनशील
वह क्या हो सकती हैचीनी के दाने, मिश्री, नमक (सेंधा नमक), फिटकरी, ग्लूकोस की गोलीस्पंज, रबड़, रुई, मोम, गूँधा हुआ आटा या चिकनी मिट्टी

व्याख्या:

  • ‘क’ कठोर है — पुस्तक के अनुसार कठोर सामग्रियाँ वे हैं जिन्हें दबाना या खरोंचना कठिन हो। ‘क’ उँगलियों के नीचे अडिग रहती है, इसलिए वह कठोर है। और चूँकि वह जल में पूरी तरह अदृश्य हो जाती है, वह घुलनशील भी है। चीनी या सेंधा नमक का दाना दोनों संकेतों पर ठीक बैठता है।
  • ‘ख’ नरम है — उसे आसानी से दबाया जा सकता है, यही नरम की परिभाषा है। जल में वह दिखती रहती है, इसलिए अघुलनशील है। स्पंज या रबड़ दोनों संकेतों पर ठीक बैठती है।
यह प्रश्न क्या परख रहा है: कठोरता और घुलनशीलता दो अलग-अलग, स्वतंत्र गुण हैं। कोई सामग्री कठोर और घुलनशील (चीनी), कठोर और अघुलनशील (पत्थर), नरम और घुलनशील (गुड़, जो सरलता से टूट जाता है) या नरम और अघुलनशील (स्पंज) हो सकती है। एक गुण से दूसरे का अनुमान कभी नहीं लगाना चाहिए।
प्र9.
(क) मैं कौन हूँ? दिए गए गुणों के आधार पर मुझे पहचानें। (i) मैं चमकदार हूँ। (ii) मुझे आसानी से संपीडित किया जा सकता है। (iii) मैं कठोर और जल में घुलनशील हूँ। (iv) आप मेरे आर-पार स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते। (v) मुझमें द्रव्यमान और आयतन है, लेकिन आप मुझे नहीं देख सकते। (ख) आप स्वयं एक “मैं कौन हूँ?” पहेली बनाएँ।
उत्तर

(क) मैं कौन हूँ?

संकेतबताया गया गुणउत्तरअन्य सही उत्तर
(i) मैं चमकदार हूँ।द्युतिमय — एक धातुलोहा (ताजा कटा टुकड़ा)ताँबा, ऐलुमिनियम की पन्नी, सोना, चाँदी, जस्ता
(ii) मुझे आसानी से संपीडित किया जा सकता है।नरमस्पंजरबड़, रुई, तकिया, रबर की गेंद
(iii) मैं कठोर और जल में घुलनशील हूँ।कठोर + घुलनशीलचीनी (मिश्री का दाना)नमक या सेंधा नमक, फिटकरी
(iv) आप मेरे आर-पार स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते।पारभासीबटर पेपरफ्रॉस्टेड काँच, पतली प्लास्टिक शीट, तेल लगा कागज
(v) मुझमें द्रव्यमान और आयतन है, लेकिन आप मुझे नहीं देख सकते।दिखाई न देने वाला द्रव्य — एक गैसवायुऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प
संकेत (iv) ध्यान से पढ़िए: उसमें लिखा है “स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते”, न कि “बिल्कुल नहीं देख सकते”। यह पारभासी सामग्री, जैसे बटर पेपर, की ओर संकेत करता है। यदि लिखा होता “मेरे आर-पार कुछ भी नहीं देख सकते”, तो उत्तर लकड़ी या गत्ते जैसी अपारदर्शी सामग्री होती।

(ख) आप स्वयं एक “मैं कौन हूँ?” पहेली बनाएँ — नमूना पहेलियाँ:

  1. मैं कठोर और पारदर्शी हूँ, गिरने पर टूट जाता हूँ, और मुझे रेत से बनाया जाता है। मैं कौन हूँ? — काँच
  2. मैं नरम और द्युतिहीन हूँ, जल तुरंत सोख लेता हूँ, और आप मुझ पर लिखते हैं। मैं कौन हूँ? — कागज
  3. मैं चमकदार और कठोर हूँ, और चुंबक मुझे अपनी ओर खींचता है। मैं कौन हूँ? — लोहा
  4. मैं सफेद और कठोर हूँ, जल में घुल जाता हूँ और आपके भोजन को स्वादिष्ट बनाता हूँ। मैं कौन हूँ? — नमक
  5. मैं जल में अघुलनशील हूँ, उस पर तैरता हूँ, और लकड़ी चीरने से बनता हूँ। मैं कौन हूँ? — बुरादा
अच्छी पहेली बनाने का सुझाव: एक नहीं, दो-तीन गुण दीजिए। “मैं कठोर हूँ” से पत्थर, लोहा, काँच या चीनी — कुछ भी हो सकता है; “मैं कठोर, सफेद और जल में घुलनशील हूँ” से केवल नमक या चीनी ही बचते हैं।
प्र10.
आपको अग्रलिखित सामग्रियाँ प्रदान की गई हैं— सिरका, शहद, सरसों का तेल, जल, ग्लूकोस, गेहूँ का आटा। सामग्रियों के कोई ऐसे दो जोड़े बनाएँ जहाँ एक सामग्री दूसरी में घुलनशील हो और कोई दो जोड़े बनाएँ जहाँ एक सामग्री दूसरी में अघुलनशील हो।
उत्तर

दो जोड़े जहाँ एक सामग्री दूसरी में घुलनशील है:

जोड़ाघोलने पर क्या होता है
ग्लूकोस + जलग्लूकोस का चूर्ण पूरी तरह अदृश्य हो जाता है और जल स्वच्छ रहता है — ग्लूकोस जल में घुलनशील है
शहद + जलशहद पूरी तरह मिल जाता है और जल एक-सा हल्का रंगीन हो जाता है — शहद जल में घुलनशील है
यह भी सही है: सिरका + जलसिरका जल में पूरी तरह मिल जाता है और कोई अलग परत नहीं बनती

दो जोड़े जहाँ एक सामग्री दूसरी में अघुलनशील है:

जोड़ाघोलने पर क्या होता है
सरसों का तेल + जलघोलते समय तेल बूँदों में बँटता है, फिर ऊपर अलग परत बना लेता है — अघुलनशील
गेहूँ का आटा + जलजल दूधिया हो जाता है और आटा धीरे-धीरे तली में बैठ जाता है; वह कभी अदृश्य नहीं होता — अघुलनशील
यह भी सही है: गेहूँ का आटा + सरसों का तेलआटा तेल में दिखाई देने वाले कणों के रूप में बना रहता है
किसी भी नए जोड़े को स्वयं कैसे जाँचें: आधे गिलास दूसरी सामग्री में पहली सामग्री का एक चम्मच डालिए, अच्छी तरह घोलिए और पाँच मिनट बिना हिलाए रख दीजिए। यदि कुछ भी दिखाई न दे — न तैरती परत, न बैठा चूर्ण, न धुँधलापन — तो पहली सामग्री दूसरी में घुलनशील है। जो कुछ भी दिखे, उसका अर्थ है अघुलनशील।
क्या आप जानते हैं? यही कारण है कि तेल में तली पूरी गीली नहीं होती जबकि जल में डाली पूरी फूल जाती है। गेहूँ का आटा दोनों में अघुलनशील है, पर जल उसमें रिस जाता है और गरम तेल नहीं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ