क्या करना है: अपने रसोईघर में खड़े होकर लिखिए कि क्या कहाँ रखा है। फिर हर खाने से दो प्रश्न पूछिए — इन्हें किस गुण के आधार पर एक साथ रखा गया है? और क्या किसी दूसरे गुण से सामान और शीघ्र मिल सकता है?
प्राय: आपको यह मिलेगा:
- साबुत और पिसे मसाले चूल्हे के पास मसालेदानी में।
- दालें और अनाज — चावल, आटा, दाल, राजमा — बड़े वायुरोधी डिब्बों में।
- चीनी, नमक, चाय और तेल वहीं जहाँ चाय बनती है।
- सब्जियाँ, दूध और बचा हुआ भोजन रेफ्रिजरेटर में।
- प्याज, आलू और लहसुन बाहर टोकरी में, अँधेरे और हवादार स्थान पर।
नमूना उत्तर — एक बेहतर विधि:
- पहले उपयोग की आवृत्ति से छाँटिए। नमक, चीनी, चाय, तेल और मसालेदानी उस खाने में जहाँ बिना स्टूल के हाथ पहुँचे; त्योहारों का सामान सबसे ऊपर।
- फिर इस आधार पर कि भोजन को किससे बचाना है। गरमी से खराब होने वाली वस्तुएँ (दूध, दही, सब्जी) → रेफ्रिजरेटर; नमी से खराब होने वाली (बिस्कुट, पापड़, आटा) → वायुरोधी डिब्बे; प्रकाश से खराब होने वाली (तेल, घी) → बंद अलमारी।
- एक ही आकार के पारदर्शी डिब्बे लीजिए और उन पर नाम तथा भरने की तिथि का लेबल लगाइए। एक नजर में दिख जाएगा कि क्या समाप्त होने वाला है।
- कच्चा और पका भोजन अलग रखिए, और साबुन, फिनाइल व डिटर्जेंट बिल्कुल अलग खाने में — कभी भोजन के ऊपर नहीं।
- “पहले आया, पहले उपयोग” नियम अपनाइए — पुराना पैकेट आगे खिसका दीजिए ताकि वही पहले काम आए और कुछ बरबाद न हो।