कुतूहल अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न एवं विचार करें!

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या वायु द्रव्य है?
उत्तर

हाँ, वायु द्रव्य है — क्योंकि वह दोनों कसौटियों पर खरी उतरती है।

  • वायु स्थान घेरती है। खाली गिलास उल्टा करके जल की बाल्टी में दबाइए: जल भीतर नहीं चढ़ पाता, क्योंकि वायु पहले ही वह स्थान घेरे हुए है। फूला हुआ गुब्बारा या पंप की हुई साइकिल की ट्यूब भी इसी कारण बड़ी दिखती है।
  • वायु का द्रव्यमान होता है। पिचके फुटबॉल को तौलिए और फिर हवा भरकर तौलिए — दूसरा पाठ्यांक थोड़ा अधिक आएगा। यही अंतर भरी गई वायु का द्रव्यमान है।

हम वायु को देख नहीं सकते, परंतु देख पाना कोई कसौटी है ही नहीं। जो कुछ भी स्थान घेरता है और जिसका द्रव्यमान होता है वह द्रव्य है, चाहे हमारी आँखें उसे पकड़ पाएँ या नहीं।

वह दिखाई क्यों नहीं देती: वायु गैसों का मिश्रण है और गैसें पारदर्शी होती हैं — प्रकाश बिना बिखरे उनके सीधे आर-पार निकल जाता है, ठीक जैसे स्वच्छ काँच से। वायु का पता हमें तभी चलता है जब वह चलती है, अर्थात् पवन के रूप में।
प्र2.
क्या हमारे आस-पास की सभी सामग्रियाँ द्रव्य के विभिन्न उदाहरण मानी जा सकती हैं? इस संबंध में अपने मित्रों के साथ चर्चा करें।
उत्तर

हाँ। किसी भी वस्तु पर दोनों कसौटियाँ लगाइए, वह खरी उतरेगी—

वस्तुक्या स्थान घेरती है?क्या द्रव्यमान है?द्रव्य?
गिलास में भरा जलहाँ — गिलास भर जाता हैहाँ — भरी बाल्टी भारी होती हैहाँ
रेत और कंकड़हाँहाँहाँ
कागज का कपहाँहाँ — तराजू दिखा देता हैहाँ
वायुहाँ — गुब्बारा भर जाता हैहाँ — हवा भरी गेंद भारी होती हैहाँ
आपका अपना शरीरहाँहाँहाँ

अत: सामग्रियाँ द्रव्य के वे प्रकार हैं जिनका उपयोग वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है। हमारे आस-पास की हर सामग्री — लकड़ी, काँच, प्लास्टिक, मिट्टी, धातु, कपड़ा, जल, वायु — द्रव्य का ही उदाहरण है।

अध्याय की व्यापक सीख: हमने सामग्रियों के समूह उनके गुणों में समानता या अंतर के आधार पर बनाए, और समूह बनाना इसलिए उपयोगी है क्योंकि यह हमें गुणों के स्वरूप का अध्ययन और अवलोकन करने में सहायता करता है। मनुष्य ने न केवल सामग्रियों का, बल्कि चट्टानों, पौधों और जानवरों का भी वर्गीकरण किया है — सजीव जगत का वर्गीकरण आपने ‘सजीव जगत में विविधता’ अध्याय में पढ़ा था। निर्जीव जगत का वर्गीकरण भी उसी प्रकार गुणों के आधार पर होता है।
क्या आप जानते हैं? प्राचीन भारत में भी ऐसी ही प्रणाली थी। आयुर्वेद सभी भौतिक पदार्थों का वर्णन 20 गुणों (विपरीत गुणों के दस जोड़े) से करता है — गुरु (भारी) – लघु (हल्का), हिम (ठंडा) – उष्ण (गरम), मृदु (मुलायम) – कठिन (कठोर), सान्द्र (ठोस) – द्रव (तरल) इत्यादि। ध्यान दीजिए कि भारी/हल्का और नरम/कठोर वही गुण हैं जिनका उपयोग आपने इसी अध्याय में किया है।
प्र3.
विचार करें! क्या आप सोच सकते हैं कि प्लास्टिक के आविष्कार ने मनुष्यों के जीवन में क्या परिवर्तन किया है? क्या यह वरदान है या अभिशाप?
उत्तर

प्लास्टिक दोनों है — उपयोग में वरदान और फेंकने के तरीके में अभिशाप। निर्णय से पहले दोनों पक्ष देखिए।

वरदान के रूप मेंअभिशाप के रूप में
हल्का, अटूट और सस्ता — बाल्टी, कुर्सी, बोतल, मग हर घर तक पहुँचेयह सड़ता नहीं। आज फेंका थैला सैकड़ों वर्ष बाद भी मिट्टी में पड़ा रह सकता है
जलरोधी — पाइप, टंकियाँ और पैकिंग भोजन तथा दवाओं को स्वच्छ और सूखा रखते हैंनालियाँ और नाले थैलों से जाम हो जाते हैं, जिससे वर्षा में जलभराव होता है
पेड़, जानवर और धातु के अयस्क बचे — प्लास्टिक ने कई जगह लकड़ी, हाथीदाँत, चमड़े और धातु का स्थान लियागाएँ फेंके गए थैले खा लेती हैं; नदियों और समुद्र में मछलियाँ तथा कछुए प्लास्टिक निगल लेते हैं
सिरिंज, ड्रिप की बोतलें, चश्मे के लेंस, कंप्यूटर, तार, हेलमेट और सुरक्षित वाहन संभव हुएप्लास्टिक जलाने से विषैला धुआँ निकलता है; सूक्ष्म कण अब हमारे भोजन और जल तक पहुँच रहे हैं

एक तर्कसंगत निष्कर्ष: प्लास्टिक स्वयं में अत्यंत उपयोगी सामग्री है — समस्या एक बार उपयोग वाले प्लास्टिक और लापरवाह निपटान की है। समझदारी प्लास्टिक से घृणा करने में नहीं, उसे कम करने, पुन: उपयोग करने और पुनर्चक्रित करने में है: बाजार कपड़े का थैला लेकर जाइए, प्लास्टिक के स्ट्रॉ और चम्मच मना कीजिए, बोतलबंद जल के स्थान पर स्टील की बोतल रखिए, और साफ प्लास्टिक जलाने या नाली में डालने के बजाय पुनर्चक्रणकर्ता को दीजिए।

यह करके देखिए: एक सप्ताह में अपने घर से निकलने वाली प्लास्टिक की वस्तुएँ गिनिए। उनमें से जिनके स्थान पर कपड़ा, स्टील, कागज या काँच काम आ सकता था, उन पर निशान लगाइए। यही सूची अगले सप्ताह के लिए आपके परिवार की योजना है।
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