हाँ, वायु द्रव्य है — क्योंकि वह दोनों कसौटियों पर खरी उतरती है।
- वायु स्थान घेरती है। खाली गिलास उल्टा करके जल की बाल्टी में दबाइए: जल भीतर नहीं चढ़ पाता, क्योंकि वायु पहले ही वह स्थान घेरे हुए है। फूला हुआ गुब्बारा या पंप की हुई साइकिल की ट्यूब भी इसी कारण बड़ी दिखती है।
- वायु का द्रव्यमान होता है। पिचके फुटबॉल को तौलिए और फिर हवा भरकर तौलिए — दूसरा पाठ्यांक थोड़ा अधिक आएगा। यही अंतर भरी गई वायु का द्रव्यमान है।
हम वायु को देख नहीं सकते, परंतु देख पाना कोई कसौटी है ही नहीं। जो कुछ भी स्थान घेरता है और जिसका द्रव्यमान होता है वह द्रव्य है, चाहे हमारी आँखें उसे पकड़ पाएँ या नहीं।