प्र1.
1 लीटर की एक अनुपयोगी खाली बोतल में लगभग 1 कप जल डालें, ढक्कन कसकर बंद कर दें, 2–3 मिनट तक लगातार बोतल को जल्दी-जल्दी दबाएँ और छोड़ें, फिर बोतल में जल के ऊपर के स्थान का अवलोकन करें। आप क्या अवलोकन करेंगे?
उत्तर
लगभग कुछ नहीं होता। जल के ऊपर का स्थान साफ ही रहता है, या अधिक से अधिक बोतल छोड़ते ही क्षण भर के लिए बहुत हल्की-सी धुंध दिखती है जो तुरंत मिट जाती है।
भीतर क्या हो रहा है:
- दबाने से भीतर की वायु का दाब बढ़ता है; अचानक छोड़ने पर दाब घटता है और भीतर की वायु कुछ ठंडी हो जाती है।
- बोतल की वायु में नीचे के जल से आई जलवाष्प निश्चित रूप से होती है।
- परंतु वाष्प के संघनित होने के लिए कोई आधार नहीं होता। साफ बोतल की वायु में धूल के कण बहुत कम होते हैं।
- अत: कोई टिकाऊ बादल नहीं बनता।
यह पहला, "असफल" चरण ही सबसे महत्वपूर्ण क्यों है: यह नियंत्रण है। इसके बिना, जब क्रियाकलाप के दूसरे भाग में बादल दिखेगा तो आप नहीं बता पाएँगे कि उसका कारण क्या था — दबाना, जल, या धुआँ। बिना धुएँ के पहले करने से स्पष्ट हो जाता है कि केवल ठंडक पर्याप्त नहीं है।
सावधान: कसकर बंद होने वाले ढक्कन की खाली, अनुपयोगी बोतल लीजिए और इतनी जोर से मत दबाइए कि ढक्कन उछल जाए।