कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.10

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
1 लीटर की एक अनुपयोगी खाली बोतल में लगभग 1 कप जल डालें, ढक्कन कसकर बंद कर दें, 2–3 मिनट तक लगातार बोतल को जल्दी-जल्दी दबाएँ और छोड़ें, फिर बोतल में जल के ऊपर के स्थान का अवलोकन करें। आप क्या अवलोकन करेंगे?
उत्तर

लगभग कुछ नहीं होता। जल के ऊपर का स्थान साफ ही रहता है, या अधिक से अधिक बोतल छोड़ते ही क्षण भर के लिए बहुत हल्की-सी धुंध दिखती है जो तुरंत मिट जाती है।

भीतर क्या हो रहा है:

  • दबाने से भीतर की वायु का दाब बढ़ता है; अचानक छोड़ने पर दाब घटता है और भीतर की वायु कुछ ठंडी हो जाती है।
  • बोतल की वायु में नीचे के जल से आई जलवाष्प निश्चित रूप से होती है।
  • परंतु वाष्प के संघनित होने के लिए कोई आधार नहीं होता। साफ बोतल की वायु में धूल के कण बहुत कम होते हैं।
  • अत: कोई टिकाऊ बादल नहीं बनता।
यह पहला, "असफल" चरण ही सबसे महत्वपूर्ण क्यों है: यह नियंत्रण है। इसके बिना, जब क्रियाकलाप के दूसरे भाग में बादल दिखेगा तो आप नहीं बता पाएँगे कि उसका कारण क्या था — दबाना, जल, या धुआँ। बिना धुएँ के पहले करने से स्पष्ट हो जाता है कि केवल ठंडक पर्याप्त नहीं है।
सावधान: कसकर बंद होने वाले ढक्कन की खाली, अनुपयोगी बोतल लीजिए और इतनी जोर से मत दबाइए कि ढक्कन उछल जाए।
प्र2.
समाचार-पत्र का एक छोटा टुकड़ा जलाकर जल में मिलाएँ और इस प्रक्रिया को दोहराएँ। अब आप क्या अवलोकन करेंगे और ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

अब बादल बन जाता है। पुस्तक के शब्दों में — इस स्थिति में आप बोतल में जल के ऊपर कुछ धुँधलापन (बादल) देखेंगे। दबाइए तो धुँधलापन मिट जाता है; छोड़िए तो फिर आ जाता है, बार-बार।

ऐसा क्यों होता है:

  1. जलते समाचार-पत्र से बोतल में बहुत छोटे, अदृश्य धूल और धुएँ के कण निकल आते हैं।
  2. बोतल छोड़ते ही भीतर की वायु फैलती है और ठंडी हो जाती है।
  3. अब ठंडी वायु की जलवाष्प के पास जमने के लिए आधार है, अत: वह इन सूक्ष्म कणों के चारों ओर संघनित होकर असंख्य नन्ही बूँदें बना देती है।
  4. वे तैरती बूँदें ही बादल हैं — इसीलिए धुँधलापन दिखता है।
  5. फिर दबाने पर भीतर की वायु गरम व संपीडित होती है, बूँदें वाष्पित हो जाती हैं और बोतल साफ हो जाती है।
ठंडक + जलवाष्प + धूल के कण → छोटी-छोटी बूँदें → बादल
यह क्रियाकलाप क्या दर्शाता है: यह बादलों के निर्माण में धूल के कणों की भूमिका दिखाता है। आकाश में यही काम खेतों और मरुस्थलों से उड़ी धूल, समुद्री फुहार का नमक, धुआँ और परागकण करते हैं। इसीलिए वास्तविक वायु, जो कभी पूर्णत: स्वच्छ नहीं होती, इतनी सहजता से बादल बना लेती है।
सावधान: कागज जलाते हुए सावधानी बरतिए, यह कार्य शिक्षक की देखरेख में कीजिए, और जला हुआ टुकड़ा तुरंत जल में डालिए ताकि आग बुझ जाए।
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