कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.2

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? क्या यह क्रियाकलाप इस निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए पर्याप्त है कि स्टील की प्लेट से जल नहीं रिसता है?
उत्तर

निष्कर्ष: स्टील की प्लेट पर रखा जल धीरे-धीरे छोटा होता जाता है और अंतत: पूरी तरह विलुप्त हो जाता है, जबकि इस पूरे समय प्लेट का निचला भाग पूरी तरह सूखा रहता है। अत: जल स्टील से होकर नहीं गया।

क्या यह क्रियाकलाप पर्याप्त है? इस विशेष प्रश्न के लिए हाँ — और यह एक अच्छी जाँच है क्योंकि:

  • स्टील में छिद्र नहीं होते। यदि कुछ रिसकर पार जाता तो वह दूसरी ओर दिखता, और हम नियमित अंतराल पर वही देखते रहे।
  • नीचे कुछ भी सोखने वाला नहीं रखा गया था, इसलिए रिसाव छिप नहीं सकता था।
पर निष्कर्ष सावधानी से निकालिए: यह क्रियाकलाप सिद्ध करता है कि स्टील से जल नहीं रिसता। यह अकेले यह सिद्ध नहीं करता कि विलुप्त होने का कारण वाष्पीकरण ही है — यह केवल दूसरी संभावना को हटाता है। पूर्ण निश्चय के लिए इसे ढकी हुई प्लेट के साथ भी दोहराना चाहिए, जहाँ वाष्प बाहर न जा सके। तब बहुत कम जल विलुप्त होता है, और यही वाष्पीकरण को कारण सिद्ध करता है।
सुझाव: उतना ही जल एक सूखी मिट्टी की तश्तरी पर भी रखिए। वहाँ निचली सतह नम हो जाती है, क्योंकि मिट्टी सरंध्र होती है। दोनों की तुलना से सतह की भूमिका बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है।
प्र2.
यदि स्टील की प्लेट से जल नहीं रिसता है तो फिर जल कहाँ गया?
उत्तर

वह वायु में चला गया — जल की गैसीय अवस्था में बदलकर, जिसे जलवाष्प कहते हैं।

द्रव जल  + कमरे की ऊष्मा  →  जलवाष्प (अदृश्य गैस)
इस परिवर्तन को वाष्पीकरण कहते हैं।

जलवाष्प के विषय में तीन बातें याद रखिए:

  • यह अदृश्य होती है — इसीलिए जल विलुप्त हुआ प्रतीत होता है।
  • यह जल की तीसरी अवस्था है, बर्फ (ठोस) और जल (द्रव) के साथ।
  • यह हमारे चारों ओर की वायु में सदैव विद्यमान रहती है, बंद कमरे में भी।
सामान्य तापमान पर भी जल क्यों चला जाता है: जल के कण सदैव गतिमान रहते हैं, कुछ तेज तो कुछ धीमे। सतह पर उपस्थित सबसे तेज कण वायु में निकल भागते हैं। यह क्रम हर ताप पर निरंतर चलता है — इसे जल के 100 °C तक पहुँचने की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती।
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